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National Herald Case Timeline: वो 'कागजी किला' जो कांग्रेस के लिए बना 'जी का जंजाल', जानें कब-कब क्या हुआ?

National Herald Case Timeline: कहते हैं राजनीति में सबसे बड़ा अपराध होता है - जनता के विश्वास को तोड़ना। और जब मामला हो धरोहर जैसे अखबार 'नेशनल हेराल्ड' का, जिसे कभी पंडित नेहरू ने आजादी की लड़ाई की आवाज बनाया था, तब तो सवाल और भी बड़े हो जाते हैं।

लेकिन अब ये वही केस बन चुका है जिसे कांग्रेस चाहकर भी झाड़ नहीं पा रही - नेशनल हेराल्ड केस, एक ऐसा 'कागजी जाल' जो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को कानूनी कटघरे तक खींच लाया है। विवाद की जड़ क्या है, क्या है कर्ज, कंपनी और कब्जा का 'कागजी खेल'? टाइमलाइन में जानें कब-कब क्या-क्या हुआ विस्तार से...

National Herald Case Timeline

What is National Herald Case: नेशनल हेराल्ड क्या है?

1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू (Pandit Jawaharlal Nehru) ने एक अंग्रेजी अखबार शुरू किया था - नेशनल हेराल्ड, जिसे उनकी कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) चलाती थी। हिंदी में इसका संस्करण नवजीवन, और उर्दू में कौमी आवाज था। 2008 में भारी घाटे की वजह से AJL ने अखबारों का छपाई बंद कर दी। 2016 में डिजिटल फॉर्म में फिर से इन्हें लॉन्च किया गया।

आरोप क्या है? कहानी शुरू कहां से हुई?

कहानी की शुरुआत साल 2012 से हुई। बीजेपी के नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने बम फोड़ा - 'नेशनल हेराल्ड के नाम पर करोड़ों की प्रॉपर्टी हड़प ली गई है।' आरोप ये कि कांग्रेस ने एक नई कंपनी 'यंग इंडियन' बनाई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी 76% हिस्सेदार थे।

फिर इस 'यंग इंडियन' ने एक बेहद पुराने और बंद हो चुके अखबार 'नेशनल हेराल्ड' की मालिक कंपनी 'एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL)' का 90 करोड़ का कर्ज 'एक झटके' में ले लिया - और उसके साथ ही देशभर में फैली हजारों करोड़ की प्रॉपर्टी भी कब्जे में आ गई। यानी न अखबार चला, न पत्रकारिता - सीधा रियल एस्टेट खेल।

कर्ज, कंपनी और कब्जा - पूरा 'कागजी खेल

  • कांग्रेस ने AJL को सालों पहले 90 करोड़ का कर्ज दिया।
  • फिर बनाई एक नई कंपनी - यंग इंडियन (YI)
  • YI ने महज 50 लाख में AJL का सारा कर्ज ले लिया
  • इसके बदले AJL की सारी संपत्तियां यंग इंडियन के हाथ में आ गईं।
  • फिर यही बना सवाल- 'क्या यह महज एक कॉर्पोरेट लेन-देन था, या राजनीतिक चेहरों के लिए बनाई गई एक 'शेल कंपनी', ताकि अरबों की प्रॉपर्टी पर कब्जा किया जा सके?'

क्या-क्या दांव पर है?

  • कांग्रेस हाईकमान - सोनिया और राहुल - खुद आरोपी
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही है मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
  • कोर्ट में केस - कई बार पूछताछ, बार-बार पेशी
  • देशभर में फैली बहुमूल्य प्रॉपर्टी अब जांच के घेरे में
  • राजनीतिक नुकसान भी तगड़ा- भाजपा इसे कांग्रेस की 'भ्रष्ट सोच की नजीर' बताती है, वहीं कांग्रेस इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' करार देती है।

क्या है इस 'नेशनल हेराल्ड' की संपत्ति का माया-जाल?

देश के दिल्ली, मुंबई, पटना, चंडीगढ़, लखनऊ, भोपाल और पंचकूला जैसे शहरों में फैली इन प्रॉपर्टीज की कीमत हजारों करोड़ में आंकी जाती है। बीती 12 अप्रैल 2025 को दिल्ली, लखनऊ और मुंबई में ₹661 करोड़ की अचल संपत्तियों को कब्जे में लेने के लिए ED ने नोटिस भी जारी किया था। दिल्ली का हेराल्ड हाउस - जहां अब तक कांग्रेस का ऑफिस चलता था - खुद इस पूरे विवाद का केंद्र है।

कानूनी मोर्चे पर कांग्रेस की चुनौती

  • सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा (अब दिवंगत), ऑस्कर फर्नांडिस, सैम पित्रोदा - सभी के नाम केस में
  • ईडी और आयकर विभाग की संयुक्त जांच
  • कोर्ट में लंबी सुनवाई, बार-बार तारीखें
  • कांग्रेस हर बार कहती रही: 'हम निर्दोष हैं, यह बदले की कार्रवाई है'

अब एक नजर टाइमलाइन पर: कब क्या हुआ?

क्रमांक साल कब क्या हुआ?
1
1937-38 नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत
2
2008 AJL ने अखबार की छपाई बंद की
3
2010 यंग इंडिया लिमिटेड की स्थापना
4
1 नव. 2012 सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट में शिकायत दर्ज की
5
2,014 कोर्ट ने सोनिया, राहुल को समन भेजा; ED ने जांच शुरू की
6
2015 सभी आरोपियों को जमानत मिली
7
2,016 सुप्रीम कोर्ट ने उपस्थिति से छूट दी, लेकिन केस जारी रहा
8
2019 ED ने ₹64 करोड़ की संपत्ति जब्त की
9
2023 ED ने ₹751.9 करोड़ की और संपत्तियां जब्त की
10
12 अप्रैल 2025 ED ने दिल्ली, मुंबई, लखनऊ की ₹661 करोड़ की संपत्ति कब्जे में ली
11
15 अप्रैल 2025
ED ने पहली चार्जशीट दायर की
12
25 अप्रैल 2025 अगली सुनवाई, कोर्ट चार्जशीट पर संज्ञान लेगा

यंग इंडिया लिमिटेड (YIL) क्या है?

यह एक गैर-लाभकारी कंपनी (धारा 25 के तहत) है, जिसे केवल सामाजिक कामों के लिए बनाया जाना चाहिए। मगर विवाद है कि इसका उपयोग AJL की 2,500 करोड़ की संपत्ति हथियाने के लिए किया गया।

अब आगे क्या होगा?

25 अप्रैल 2025 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट चार्जशीट पर विचार करेगी। अगर, कोर्ट चार्जशीट को स्वीकार करती है, तो ट्रायल शुरू हो सकता है। कांग्रेस इस पूरे मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है।

नेशनल हेराल्ड केस एक ऐसा मामला बन गया है जिसने राजनीति, कानून और मीडिया को आपस में जोड़ दिया है। इसमें सिर्फ गांधी परिवार की भूमिका नहीं, बल्कि भारत के राजनीतिक फाइनेंस और पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल है।

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