National Anti-Terrorism Day: 21 मई को क्यों मनाते हैं राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस, क्या है इतिहास
National Anti-Terrorism Day:राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस 21 मई को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर मनाया जाता है। 1991 में तमिलनाडु में राजनीतिक अभियान के दौरान एक आत्मघाती हमलावर द्वारा उनकी हत्या हुई थी।

National Anti-Terrorism Day 2023: भारत में हर साल 21 मई को नेशनल एंटी टेररिज्म डे यानी राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 को ही हत्या हुई थी, इसी उपलक्ष्य में भारत हर साल 21 मई को राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है। यह दिन आतंकवाद के उन्मूलन और शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के महत्व पर प्रकाश डालता है।
राजीव गांधी भारत के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री थे, जो 40 साल की उम्र में सत्ता में आए थे। राजीव गांधी, भारत के छठे पीएम थे। राजीव गांधी की हत्या 21 मई 1991 को मद्रास के पास एक गांव श्रीपेरंबुदूर में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम की एक महिला ने की थी। जिसके बाद वीपी सिंह की सरकार ने घोषणा की कि 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में भारत में अब मनाया जाएगा।
राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस का इतिहास
राजीव गांधी 40 साल की उम्र में भारत के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री थे। 31 अक्टूबर 1984 को राजीव गांधी की मां और देश की पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की नृशंस हत्या के बाद राजीव गांधी ने देश की सत्ता संभाली थी।
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हालांकि 21 मई 1991 को राजीव गांधी की LTTE आतंकवादी द्वारा हत्या कर दी गई थी। यह एक उग्रवादी अलगाववादी समूह था जो श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में तमिलों के लिए एक स्वतंत्र मातृभूमि के लिए लड़ रहा था।
तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक रैली के दौरान राजीव गांधी के पास एक महिला ह्यूमन बम बनकर आई थी। उस महिला ने राजीव गांधी के पैरे छुए और एक विस्फोट हुआ जिससे राजीव गांधी की मृत्यु हो गई।
उसके बाद से ही वीपी सिंह की सरकार ने घोषणा की कि अब देश में हर साल 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाएगा।
राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस 2023: कैसे मनाया जाता है?
राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस पर देश भर में कई कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय इस विषय पर वाद-विवाद, सेमिनार आयोजित करते हैं। यह दिन आतंकवादी हमलों के सभी पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है।
इस दिन बहादुर सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों को भी श्रद्धांजलि दी जाती है, जिन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान गंवाई। यह पीड़ितों के परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त करने और हमारे सशस्त्र बलों और सुरक्षा कर्मियों द्वारा दिए गए बलिदान को स्वीकार करने का दिन है। भारत सरकार देश में आतंकवाद से निपटने के लिए कई कदम उठा रही है।
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