तो अब देश जानेगा नेताजी की मौत की वजह
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) कैसे हुई थी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत ? क्या वे 1945 में ताइवान के विमान हादसे में मारे गए थे या सोवियत संघ के नेता जोसेफ स्टालिन के इशारे पर उनकी हत्या की गई थी। इन सवालों के जवाब मिलेंगे देश को।
इस बीच, सूत्रों ने बताया कि केन्द्र सरकार नेताजी की मौत से जुड़ी गोपनीय फाइलें जारी करेगी। हालांकि, इसके लिए कोई निश्चित समय नहीं बताई जा सकती। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कुछ समय पहले आरटीआई के एक जवाब में कहा था कि नेताजी से संबंधित 41 फाइलें हैं।
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बोस के परिवार की जासूसी के पीछे का सच, हादसा नहीं हत्या हुई थी बोस की
महत्वपूर्ण है कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु करीब लंबे समय तक नेता सुभाष चंद्र बोस के करीबी संबंधियों की जासूसी करवाते थे। यह सनसनीकेज जानकारी मिली है इंटेलिजेंस ब्यूरो की तरफ से हाल ही में डीक्लैसफाइ (गुप्त सूची से हटाना ) से हटाई गई फाइल से।
संबंध खराब होंगे
जानकार दावा करते हैं कि नेता जी की मौत से जुड़ी गुप्त जानकारियों वाली फाइल को सार्वजनिक करने से भारत के ब्रिटेन तथा रूस से संबंध खराब हो सकते हैं। जानकार दावा करते हैं कि नेता जी की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए गठित
मुखर्जी आयोग ने कहा था कि इस तरह के विमान हादसे के कोई रिकॉर्ड नहीं मिलते जिससे पता चल सके कि वे विमान हादसे में मारे गए थे। यही नहीं, ताइवान के किसी अस्पताल में भी जले हुए शव का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
अस्थियां जापान में
महत्वपूर्ण है कि नेताजी की अस्थियां जापान के एनकोजी मंदिर में संभाल कर रखी गई हैं। यह दावा जापान में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिक बीएस देशमुख ने अहमदाबाद में एक बार किया था।वे अपने संगठन ‘नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेमोरियल इंडो-जापान फाउन्डेशन' के बैनर तले नेताजी की अस्थियां स्वदेश लाने के लिए प्रयासरत हैं। हालांकि कहने वाले कहते हैं कि उन अस्थियों का डीएनए टेस्ट होना चाहिए।













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