बढ़ते जल संकट को देख ससुराल छोड़ जा रही हैं बहुएं, इस गांव में लोग नहीं ब्याह रहे हैं अपनी बेटियां

बढ़ते जल संकट को देख ससुराल छोड़ जा रही हैं बहुएं, इस गांव में लोग नहीं ब्याह रहे हैं अपनी बेटियां

मुंबई, 05 मई: महाराष्ट्र के कुछ गांवों में गर्मियों में भीषण जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग, विशेष रूप से नवविवाहित दुल्हनें इस महाराष्ट्र गांव के गंभीर जल संकट का सामना करने में असमर्थ हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नासिक जिले के दांडीची बाड़ी गांव में पानी की किल्लत ने इस हद तक विकराल स्थिति पैदा कर दी है कि दुल्हनें अपने ससुराल छोड़कर जा रही हैं। मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में आया है।

'इस गांव में लोग नहीं ब्याह रहे हैं अपनी बेटियां'

'इस गांव में लोग नहीं ब्याह रहे हैं अपनी बेटियां'

मानवाधिकार निकाय ने कहा है, ''महिलाओं को हर गर्मियों में, मार्च से जून तक, एक पहाड़ी के तल पर लगभग सूखी धारा से पानी लाने के लिए डेढ़ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है और बर्तन भरने में बहुत समय और धैर्य लगता है। कथित तौर पर, परिवार अब संकोच करते हैं इस गांव के पुरुषों से अपनी बेटियों की शादी कराने के लिए।''

मानवाधिकार आयोग ने जानें क्या कहा?

मानवाधिकार आयोग ने जानें क्या कहा?

मानवाधिकार आयोग ने पाया है कि यह उनके बुनियादी मानवाधिकारों यानी जीवन और सम्मान के अधिकार का घोर उल्लंघन है। एनएचआरसी ने टिप्पणी की, "ऐसा लगता है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा कई प्रयासों और पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणा के बावजूद राहत अभी भी इस विशेष गांव से दूर है।"

'पानी का एक बर्तन भरने के लिए तीन घंटे लगते हैं...'

'पानी का एक बर्तन भरने के लिए तीन घंटे लगते हैं...'

एनएचआरसी ने 2 मई को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें दावा किया गया था कि "एक बर्तन भरने में तीन घंटे लग सकते हैं और महिलाओं को सुबह चार बजे सबसे पहले पानी लाने के लिए दिन में दो बार विषम घंटों में पहाड़ी इलाके में चलना पड़ता है और चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए फिर से सूर्यास्त के बाद। नई दुल्हनें अक्सर भयानक स्थिति का सामना करने में सक्षम नहीं होती हैं।"

'महिलाएं मायके लौटना चाहती हैं...'

'महिलाएं मायके लौटना चाहती हैं...'

इसमें कहा गया है, "वे अत्यधिक पानी की किल्लत से इतने बौखला गए हैं कि वे गांव में नहीं रहना चाहती हैं और अपने मायके लौटना चाहते चाहती हैं।" इस बीच, उक्त मीडिया रिपोर्ट के हवाले से गांव के सरपंच ने गांव में मौजूद गंभीर स्थिति से अवगत होने के बाद भी प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाया है।

'लोग इस गांव की मदद नहीं करते हैं...'

'लोग इस गांव की मदद नहीं करते हैं...'

एनसीआरसी ने कहा, "गांव के सरपंच ने कथित तौर पर कहा कि कई बाबु और पत्रकार गांव में आते हैं और ग्रामीणों की पीड़ा की तस्वीरें लेते हैं, लेकिन कोई मदद नहीं करता है।" आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी कर छह सप्ताह के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

आयोग ने कहा कि रिपोर्ट में इस गांव के निवासियों की शिकायतों के निवारण के लिए उठाए जा रहे या प्रस्तावित किए जाने वाले कदम और क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता के संबंध में वर्तमान स्थिति शामिल होनी चाहिए।

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