मोदी की कोर टीम का नया टास्क- विधानसभाा चुनाव

इसके रूप में सांसद के तौर पर दाखिल किए गए उनके बायोडेटा को भी प्राथमिकता से लिया जाएगा। इसी के साथ उनके जमीनी कामकाज का भी ब्यौरा पेश किया जाएगा। इस पड़ताल की जिम्मेदारी उसी टीम को सौंपी गई है, जिसने चुनाव के दौरान मोदी की कोर टीम के रूप में काम किया था। कहा तो यह भी जा रहा है कि मोदी ने शपथ लेने के लिए एक सप्ताह का वक्त इसीलिए लिया है। नरेंद्र मोदी की कोर टीम में वही सिपाही जगह बनाएंगे, जिन्होंने जनता के दिलों में जगह बनाई हो।
यूपी का एजेंडा है खास
मोदी ने उत्तर प्रदेश को मुख्य एजेंडे में ऐसे ही शामिल नहीं किया है। सूबे को लेकर पार्टी में बेहद अहमियत भरे फैसले लिए गए हैं। पिछले एक दशक से यूपी संघ के लिए बड़ी चुनौती रहा है। प्रदेश में संघ परिवार की घटती ताकत मोहन भागवत की चिंता का विषय बना रहा है। इसे संघ की ओर से कई मौकों पर बयां भी किया जाता रहा है। पूरे चुनाव अभियान में भी मोदी ने अक्सर कहा कि कांग्रेस मुक्त भारत का सपना यूपी का दिल जीते बिना संभव नहीं है।
क्या है नया प्लान
लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 80 में अकेले दम पर 71 और गठबंधन के साथ 73 सीटें जीतने के बाद भी संघ यूपी को लेकर निश्चिंत नहीं है। संघ के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर मोदी लहर का लाभ प्रदेश में संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए ना किया गया, तो बहुत मुश्किल हो सकता है। इसीलिए अभी से ही मोदी के मंत्रिमंडल में यूपी की भागीदारी से नया दांव खेले जाने की तैयारी चल रही है। इसी के साथ आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भी यूपी, हरियाणा और दिल्ली में अभी से पार्टी नई बिसात बिछाने लगी है।












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