मोदी की सलाह प्रधानमंत्री नहीं कोई गरीब छात्र हो मुख्य अतिथि
नई दिल्ली। अगर देश के सबसे प्रख्यात अस्पताल और मेडिकल कालेज के सालाना दीक्षांत समारोह में किसी गरीब छात्र को मुख्य अतिथि बनाया जाए तो कैसा रहे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह सुझाव सोमवार को राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्था्न (एम्स) के दीक्षांत समारोह में दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों में आसपास के स्कूरलों के गरीब छात्रों को मुख्यह अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा सकता है और इस तरह के आयोजनों से उनमें एक प्रोत्साहन की भावना का विकास हो सकेगा। नरेन्द्र मोदी ने चिकित्सा स्ना्तकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आपके सीखने का अंत नहीं है और अब आप बंद कक्षा से एक खुली कक्षा की तरफ जा रहे हैं।

डाक्टरों की क्लास ली
प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों को अपनी सोच के तरीकों को हमेशा जीवंत रखना चाहिए ताकि वे अपने व्य वसाय की अधिकतम बुलंदियों को छू सके। उन्होंने चिकित्सा स्नातकों से आग्रह किया कि वे चिकित्सा के क्षेत्र में बुलंदियां हासिल करने वाले जिन मशहूर चिकित्सतकों को आज जीवन पर्यन्तं उपलब्धि पुरस्काजरों से सम्मा नित किया गया वे उनसे कुछ सीख लें।
प्रधानमंत्री ने छात्रों के जीवन में दीक्षांत समारोह के महत्वे का उल्लेाख करते हुए कहा कि दीक्षांत शब्द का प्रथम उल्लेख तैत्रिया उपनिषद में मिलता है। उन्हों ने कहा कि एक डॉक्ट र की एक छोटी सी गतिविधि या फिर मरीज के साथ एक अल्पककालीन संवाद उस इंसान को जिन्दगी दे सकता है क्यों कि समाज डॉक्टीरों पर बहुत अधिक भरोसा करता है। उन्हों ने छात्रों से इस विचार को अपने प्रतिदिन के कार्यों के दौरान प्रयुक्तं करने का आग्रह किया।
उन्होंने इन चिकित्सा स्नातकों से कहा कि वे भविष्य में अपने मरीजों के साथ इस प्रकार की भावना से काम करें ताकि मरीज एक प्रकार से उनपर अपना हक जता सकें। उन्हों ने उम्मी द जताई कि चिकित्सकों के काम से समाज को फायदा होगा और एक स्वस्थ् भारत के सपने को हासिल किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के अनेक डॉक्टरों ने अपने उल्ले खनीय कार्यों से विश्व में अपनी पहचान बनाई है और बदलते वैश्विक परिदृश्य के साथ चलने के लिए भारत को अपने चिकित्साव शोध के क्षेत्र में और अधिक प्रयास करने की जरूरत है।












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