दिल्ली में बैठी कांग्रेस सरकार को सिर्फ सत्ता में रुचि: मोदी

कांग्रेस के नेता हमारी इन भावनाओं को नहीं समझ पायेंगे। हमारे लिये पटेल एक कार्यकर्ता नहीं देश के नेता हैं। उस महापुरुष के काम को कांग्रेसी कभी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। आज जब गुजरात के लोगों ने बीड़ा उठाया है, देश के लोगों का सहयोग मिल रहा है, तब उन्हें भी सरदार पटेल का नाम लेना पड़ रहा है। यही हमारी सफलता है, हमने आपको सरदार पटेल को याद करने के लिये मजबूर कर दिया।
एक समृद्ध प्रदेश के लोग इतने गरीब क्यों हैं। कौन जिम्मेदार है इसके लिये। आपको पता है, तो झेलते क्यों हो। किसका इंतजार था। अब वक्त बर्बाद मत कीजिये, 100 दिन का सवाल है, इनकी विदाई निश्चित है। देश की जनता ने उनको विदाई देने का फैसला कर लिया है। अब कांग्रेस पार्टी बच नहीं सकती है।
चाय और मोदी
असम में टी भी है, टिंबर भी है। मैं बचपन में आपके असम से आने वाली चाय को उबाल-उबाल कर लोगों में ऊर्जा भरता था। जिस असम की चाय ने मुझे यहां तक पहुंचाया, आज वो मेरा असम पिछड़ रहा है। इस असम को लहूलुहान किसने कर दिया। इसको खून से किसने लतपत कर दिया। आये दिन नौजवानों की जिंदगी जा रही है। इसका जिम्मेदार कौन है। हमने कितने नौजवान खो दिये। इस मिट्टी की संतानों को क्या हम मरने देंगे। क्या खून का खेल चलने देंगे।
प्रधानमंत्री पर वार
असम की धरती पिछले 23 साल से प्रधानमंत्री को भेज रही है। इतना बड़ा आपने इंवेस्टमेंट किया आपको क्या मिला। प्रधानमंत्री जी अगर हमारा एक छोटा सा कार्यकर्ता भी सदन में यहां से बैठा होता, तो असम की सूरत बदल गई होती। पीएम साहब 23 साल से आपके प्रतिनिधि हो, पीएम हो, उसके बाद भी उनके अपने प्रदेश असम की यह दुर्दशा होगी, तो पूरे हिन्दुस्तान का कितना बुरा हाल होगा, आप सोच सकते हैं।
प्रधानमंत्री जी आपको जवाब देना पड़ेगा। लोकतंत्र में हिन्दुस्तान की जनता का हक बनता है आपसे जवाब मांगना, विशेषकर असम की जनता का। पीएम आपके मुख्यमंत्री आपके, लगातार कांग्रेस की सरकार चली, लेकिन उसके बावजूद नॉर्थ ईस्ट के आठ राज्यों में सबसे बुरा हाल है तो वो असम का है। असम के हालात नागालैंड से भी खराब है। सिक्किम ने पर्यटन पर इतना काम किया। क्या हिन्दुस्तान के लोगों को असम देखने का मन नहीं कर सकता।
असम में बेरोजगारी
हिन्दुस्तान के नौजवानों में विकास की भूख, तड़पन दिख रही है, लेकिन उसमें असम कहीं नहीं दिख रही है। यहां की औद्योगिक विकास दर आधा प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे बुरा हाल क्या हो सकता है। जहां पर इतनी प्राकृतिक संपदा हो, विकास की पूरी संभावनाएं हों, नौजवान बुद्धिमान हो, उसके बावजूद औद्योगिक विकास के हाल बुरा है। एक हजार नौजवानों में से करीब 675 नौजवान बेरोजगार हैं। इनके रहते हुए हजार में सात सौ बेरोजगार हैं, आगे जाकर क्या होगा इसका हिसाब लगा लीजिये।
नरेगा पर हमला
असम में 12 लाख लोगों ने नरेगा के अंतर्गत काम मांगा था, उनमें से मात्र 10,018 हजार लोगों को काम मिला। इस खराब स्थिति के बावजूद कांग्रेसी नरेगा के गीत गा रहे हैं। यहां पर पुलिस के जवान मारे जा रहे हैं, बम धमाके हो रहे हैं, हत्याएं, हो रही हैं, कानून व्यवस्था बर्बाद हो चुकी है। लेकिन इन लोगों को नहीं दिखाई देता।
60 साल कांग्रेस को झेला, मुझे 60 महीने दो
मोदी ने जनता से पूछा कि 60 साल तक कांग्रेस को झेला, इतनी तकलीफें उठायीं, अब मुझे 60 महीने दो मैं आपको देश बदल कर दिखाउंगा। ये कांग्रेसी क्या भारत को अपनी निजी प्रॉपर्टी समझते हैं क्या। इन लोगों ने असम की जमीन पर निर्णय लिया, आपसे पूछा क्या।
असम का नौजवान भूखा, घुसपैठिये मजे से खाना खायें, ऐसा कैसे चलेगा। समय की मांग है कि बांग्लादेश से सटे हुए राज्यों में रजिस्ट्रेशन का काम होना चाहिये, सबूतों का वैरिफिकेशन होना चाहिये, कौन बाहर के हैं, कौन देश के हैं, यह पता करना चाहिये। गांधी जी ने जो वादा किया था, उनके परिवार के लोग ही पूरा नहीं कर रहे हैं, वो क्या हम उस वादे को पूरा कर के दिखायेंगे।
पूर्वोत्तर में रोजगार के अवसर नहीं हैं, तो यहां के लोगों को बाहर रोजगार के अवसर मिलने चाहिये।












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