पाक को सिखाना है सबक तो क्यों अप्वाइंट किया पार्ट टाइम रक्षामंत्री?

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नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्‍द ही सियाचिन का दौरा करने वाले हैं। वहां पर तैनात भारतीय सैनिकों का हौसला बढ़ाने के लिए जाने वाले हैं। नरेंद्र मोदी का सियाचिन दौरा उनके लद्दाख दौरे का ही हिस्‍सा होगा। सूत्रों की मानें तो इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सियाचिन में स्थित आर्मी पोस्‍ट पर जाएंगे।

हाल ही में आईएनएस का दौरा करने वाले और मिग-29 पर सवार होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्‍सर यह दावा करते आए हैं कि देश की सुरक्षा और सेनाओं का मनोबल बढ़ाना उनकी पहली प्राथमिकता है।

लेकिन यह भी सच है कि नई सरकार बनने के बाद अभी तक देश को एक स्‍थायी रक्षा मंत्री नहीं मिल सका है।

क्‍या है होती है रक्षा मंत्री की अहमियत

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने जब पहले दिन अपना कार्यभार संभाला था तो उन्‍होंने कहा था कि उनके पास रक्षा मंत्रालय की जिम्‍मेदारी सिर्फ कुछ दिनों तक ही है। अभी तक अरुण जेटली सिर्फ 'पार्ट टाइम' डिफेंस मिनिस्‍टर के तौर पर अपनी जिम्‍मेदारियां संभाल रहे हैं।

एक नजर डालिए कि आखिर क्‍यों देश को एक पार्ट टाइम रक्षा मंत्री की बजाय एक फुल टाइम रक्षा मंत्री क्‍यों बेहद जरूरी है।

  • देश के रक्षा मंत्री पर कई डिफेंस पॉलिसीज को बनाने और उन्‍हें लागू कराने की खास जिम्‍मेदारी होती है।
  • राष्‍ट्रीय सुरक्षा संघ के सदस्‍य के तौर पर मौजूदा खतरों और चुनौतियों के मद्देनजर दीर्घकालिक रक्षा योजनाओं को तैयार करने की एक बड़ी जिम्‍मेदारी होती है। पिछले कुछ वर्षों से इस एक खास पहलू को काफी नजरअंदाज किया गया है।
  • राष्‍ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तत्‍वों को पहचानना और मिलिट्री रणनीति को तैयार करना और उन रणनीतियों को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाना भी रक्षा मंत्री का कार्य होता है।
  • रक्षा मंत्री को यह बात सुनिश्चित करनी होती है कि रक्षा मंत्रालय की ओर से जो रणनीति बनाई गई है उसे पूरी तरह से समय के अनुरुप ही तैयार किया गया है और कैबिनेट कमेटी ऑफ सिक्‍योरिटी यानी (सीसीएस) की ओर से मंजूर की जा चुकी हैं।
  • सेना की रणनीतियों को मजबूत बनाने के लिए जरूरी ताकत उन्‍हें देना, इसे जुड़ी तमाम योजनाओं पर नजर रखना, हथियारों से जुड़ी रणनीति को मिली मंजूरी को तुरंत प्रभाव से लागू कराना ताकि सेनाओं को हथियार, उपकरण, गोला बारूद और सभी तरह का लॉजिस्टिक सपोर्ट मिल सके, जिसके जरिए वह आने वाले समय में युद्ध का मुकाबला करने को तैयार रहें, यह भी रक्षा मंत्री का ही जिम्‍मा होता है।
  • रक्षा मंत्री समय-समय पर 'रक्षा मंत्री ऑपरेशनल डायरेक्टिव्‍स' के तहत तीन सेनाओं के प्रमुखों को निर्देश जारी करने होते हैं। अगर डिफेंस स्‍टाफ का प्रमुख नहीं होता है तो यह तीनों सेवाओं के प्रमुखों पर छोड़ दिया जाता है कि वह आपस में कोऑर्डिनेट कर ज्‍वांइट ऑपरेशनों की योजना बनाएं और उन्‍हें कार्यान्वित करें।
  • पाकिस्‍तान के साथ एलओसी पर मौजूद तनाव और एलएसी पर बढ़ते चीन के दखल के मद्देनजर रक्षा मंत्री को बॉर्डर मैनेजमेंट इश्‍यू से जुड़ना होता है। उन्‍हें इस बात को सुनिश्चित करना होता है कि दूसरे मंत्रियों के साथ बात कर जरूरी तालमेल के साथ योजनाओं के तहत सारे जस्‍री क्षेत्रों पर डेप्‍लॉयमेंट को बरकरार रखा जाएगा।

देश की रक्षा के लिए जल्‍द हो नियुक्ति

अरुण जेटली ने जब वर्ष 2014-2015 के लिए आम बजट का ऐलान किया तो उन्‍होंने देश के रक्षा बजट में 12.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी कर दी। इसके साथ ही उन्‍होंने एफडीआई भी 29 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दिया। कुछ लोगों को एफडीआई की दर से थोड़ी निराशा जरूर हुई लेकिन इसके बावजूद उनकी सराहना भी की गई लेकिन फिर भी वह मानते हैं कि जल्‍द से जल्‍द एक स्‍थायी रक्षा मंत्री की नियुक्ति देश की सुरक्षा के लिए काफी जरूरी है।

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