EXIT POLL के नतीजों से भाजपा खुश, लेकिन मोदी की बढ़ सकती हैं टेंशन

मोदी ने चुनाव के दौरान जो रिकॉर्ड चुनावी रैलियां की उसका सकारात्मक परिणाम एक्जिट पोल में दिख रहा है। मोदी के नेतृत्व में केन्द्र में एनडीए की सरकार बनती दिख रही है।एक्जिट पोल के नतीजों से अतिअत्साहित भाजपा के नेता खुलकर बोलने लगे हैं, लेकिन भारतीयजनता पार्टी के पीएम पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी ने अब तक चुप्पी साधे रखी है। वह कई नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं लेकिन सार्वजनिक तौर पर कोई बयान नहीं दे रहे।
मोदी की चुप्पी का एक कारण ये हो सकता है कि एक्जिट पोल के नतीजों में हमेशा भाजपा को अधिक सीटें मिलती हुई दिखाई जाती हैं लेकिन जब परिणाम आते हैं तो एक्जिट पोल के परिणाम से भाजपा की सीटें कम हो जाती हैं। मोदी की चिंता कारण यहीं है कि मोदी एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं कर पा रहे है। अगर पिछले तीन चुनावों के एक्जिट पोले के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरी कहानी भाजपा को चिंता में डाल सकती है।
1999 के चुनाव के बाद एक्जिट पोल में एनडीए को 300 से 334 सीटें और यूपीए को 138 से 146 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था लेकिन परिणाम के बाद राजग को 296, संप्रग को 134 सीटें मिलीं।
जबकि 2004 के चुनाव के बाद एक्जिट पोल में एनडीए को 240 से 284 और संप्रग को 164 से 197 सीटें मिलने का अनुमान था लेकिन चुनाव परिणाम में राजग को 189 और संप्रग को 222 सीटें मिलीं।
बात 2009 के चुनाव की करें तो मतदान के बाद आए एग्जिट पोल में एनडीए को 177 से 197 और संप्रग को 191 से 216 सीटों का अनुमान था लेकिन परिणाम के बाद राजग को 159 और संप्रग को अनुमान से अधिक 262 सीटें मिलीं । ऐसे में मोदी इस हकीकत से वाकिफ है कि एग्जिट पोल के आंकड़े कम ही वक्त सच साबित होते है।












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