सरदार पटेल को मोदी के मुस्लिमों के प्रति रवैये से दुख होता: राजमोहन गांधी

हालांकि राजमोहन ने इस बात को स्वीकार किया कि पटेल को कांग्रेस ने एक लंबे वक्त के लिए भुला दिया था। राजमोहन के अनुसार पटेल का विकास गांधी जी और कांग्रेस की छत्रछाया में हुआ जबकि मोदी ने आरएसएस के की छत्रछाया में रहकर खुद का विकास किया। मोदी न तो पटेल को ठीक ढंग से समझते हैं और न ही उनका प्रतिनिधित्व करते हैं। गुजरात में 2002 में जो कुछ भी हुआ, उससे पटेल को दुख होता। वह सभी को एक साथ जोड़कर चलने वाले नेता थे।
पटेल के प्रधानमंत्री न बनने की बात पर राजमोहन का कहना है कि महात्मा गांधी ने इस पद के लिए नेहरू का नाम आगे किया था क्योंकि पटेल की तबियत खराब रहती थी और नेहरू पटेल से 14 साल बड़े भी थे। उन्होने कांग्रेस की निंदा करने के अंदाज में कहा कि गांधी परिवार के इंदिरा, राजीव, संजय, सोनिया और राहुल राजनीति में आये लेकिन पटेल के परिवार के किसी भी सदस्य को उनकी विरासत का लाभ नहीं मिला। वहीं पटेल ने 1947 में हुए दंगों में आरएसएस द्वारा किये गये कामों की सराहना की थी लेकिन गांधी जी की मृत्यु के बाद वह संघ के विरोधी हो गये थे।
मोदी द्वारा पटेल की विरासत हथियाने पर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सच तो यह है कि भाजपा के पास ऐसी कोई बड़ी शख्सियत नहीं है, इसलिए वह पटेल की विरासत को अपनाने का प्रयास कर रही है।












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