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नरेंद्र मोदी बच्चों से बोले, सफलता की कोई रेसिपी नहीं होती

नई दिल्ली। श‍िक्षक विदस की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को समर्पित 125 रुपए के सिक्के लॉन्च किये। ये सिक्का बाजार में नहीं चलेगा, केवल श्रद्धांजलि स्वरूप इसे लॉन्च किया गया है। ये सिक्के सोने, चांदी और कांस्य के बने हैं। इस मौके पर कला उत्सव का लोकार्पण किया, जिसे हर साल दिसंबर में आयोजित किया जायेगा।

Narendra Modi

नरेंद्र मोदी के भाषण के मुख्य बिंदु-

  • मां जन्म देती है, शिक्षक जीवन देता है। टीचर कभी रिटायर नहीं होते। 90 साल की आयु में भी वो पढ़ाते हैं।
  • हममें से बहुतों ने डा. राधा कृष्णन जी को नहीं देखा, लेकिन अभी-अभी हमें डा. अब्दुल कलाम छोड़ कर चले गये।
  • कलाम कहते थे, कि अगर मुझे याद रखना है, तो टीचर के रूप में याद रखें।
  • राष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने के दूसरे दिन कलाम साहब चेन्नई चले गये और क्लास ली। जीवन के अंतिम दिन भी वे छात्रों के साथ थे।
  • डा. कलाम जीवन में कभी भी अपने जीवन में विद्यार्थ‍ियों से अलग नहीं हुए।
  • एक आंगनवाड़ी की कार्यकत्री अपनी साड़ी काट कर रुमाल बनाती थी और बच्चों की ड्रेस पर पिन कर देती थी। उसका समर्पण ही था, जिसकी वजह से बच्चे आजीवन उसे याद रखेंगे।
  • श‍िक्षा का व्यवसाय अन्य व्यवसायों से आगे है। एक डॉक्टर अगर ऑपरेशन करके जिंदगी बचा ले, तो देश भर के अखबारों में फोटो छपती है, एक टीचर अगर अपने जीवनकाल में ऐसे 100 डॉक्टर बना दे, उनकी तरफ कोई नहीं देखता। आज अगर हमें अच्छे डॉक्टर, साइंटिस्ट, इंजीनियर मिले हैं, तो उनके पीछे टीचर हैं।
  • हर चीज रुपए पैसे नहीं होते, संस्कार उससे कहीं ऊपर होते हैं।
  • कला उत्सव की वेबसाइट लॉन्च की है। हमारे देश में यूथ फेस्ट‍िवल होता है। हमारे छोटे-छोटे बच्चों में जो प्रतिभा छिपी है, उन्हें अवसर मिलना चाहिये। हमारे पास कितना ही ज्ञान क्यों न हो, हमें रोबोट बनने से बचना है।

बच्चों से सवाल-जवाब

तेलंगाना की छात्रा ने पूछा- आप किससे सबसे ज्यादा प्रभावित होकर आगे बढ़े?

तुम ये बताओ पर्वत चढ़ने के बाद बच्चे तुम्हारे से दूर भागते हैं, या तुम्हें बड़ा मानते हैं। तुम्हारा सवाल बहुत महत्वपूर्ण है कि मैं जीवन में मैंने किससे सबसे ज्यादा प्रेरणा ली है। जीवन में हर व्यक्त‍ि कुछ न कुछ देता है। रेल के डिब्बे में सफर करते वक्त कुछ न कुछ सीखने को मिल जाता है।

इंफाल से छात्रा नंदीशी ने पूछा, राजनीति में आने के लिये क्या करें?

देश में जो राजनीतिक जीवन की इतनी बदनामी हो चुकी है, इसके कारण देश का बहुत नुकसान हो रहा है। राजनीतिक दल, राजनेता, देश के लिये बहुत आवश्यक है कि राजनीति में अच्छे लोग आयें, जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों के लोग आयें। सभी क्षेत्रों से लोग आयें। आपके क्षेत्र में कुछ हो, तो आप सबसे पहुंचें, आप सोच कर चलें

उत्तराखंड का सार्थक भारद्वाज ने पूछा- डिजिटल इंडिया कार्यक्रम अनोखा कार्यक्रम है, लेकिन बिजली नहीं है, तो इसे कैसे सार्थक बनायेंगे?

मोदी- खाना पकाने का शौक कहां से आ गया? तुम्हारी सबसे प्रिय डिश कौन सी है? तुम्हारी कौन सी डिश और लोगों को पसंद आती है? जवाब मिला- केक, मम्मी के हाथ की आलू पूड़ी। मोदी- तुम्हें क्या बनना है? मुझे बहुत बड़ा शेफ बनना है। किस उमर में क्या खाना चाहिये। या लोगों को जंकफूड खाने के लिये कहते हो? डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं, बिजली तो है नहीं, हमारे देश में 18 हजार गांवों में बिजली नहीं है। मैंने संकल्प लिया है कि अगले 1000 दिनों में 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचानी है। डिजिटल इंडिया से हम अछूते नहीं रह सकते। सोलर 2022 तक मैं घरों में 24 घंटे बिजली होनी चाहिये। उसके प्रयास हम कर रहे हैं।

गोवा से सोनिया येलप्पा पाटिल, वोकेशनल ट्रेनिंग ले रही है। आपको कौन सा गेम पसंद है?

मैं एक छोटे से गांव से हूं, मैं बचपन में आज कल के खेलों के बारे में जानता तक नहीं था। उछलना कूदना ही हमारा खेल था। ज्यादा से ज्यादा खो-खो, कबड्डी। मुझे कपड़े धोने के लिये तालाब जाना पड़ता था, इसकी वजह से मुझे तैरना आ गया। मेरे एक पीटी टीचर थे, जिन्होंने मलखम सिखाया। मैं उनमें से था, जो बाउंड्री पर बैठ कर गेंद उठाता था।

ऐड्रॉयड ऐप बनाने वाली बेंगलुरु की टीम पेंटागन से अनुपमा ने पूछा- कूड़ा प्रबंधन देश की सबसे बड़ी चुनौती है। कौन-कौन सी चुनौतियां सबसे बड़ी हैं हैं इस क्षेत्र में?

मोदी- स्वच्छ भारत अभ‍ियान के दौरान मुझे पता था कि यह बहुत बड़ी चुनौती है। लेकिन मीडिया के लोगों ने इसे खूब आगे बढ़ाया। लोग खुद से आये आये। मुझे विश्वास है कि और भी लोग आते जायेंगे। और यह अभ‍ियान सफल होगा।

पटना से अनमोल कावरा ने पूछा- जिन बच्चों पर दबाव डाला जाता है, इंजीनयिर बनो, डॉक्टर बनो इस पर आप क्या कहना चाहेंगे?

मोदी- हमारे यहां स्कूलों में कैरेक्टर सर्टिफिकेट मिलता है। जो जेल में हैं, उनके पास भी होता है, जो फांसी पर लटक गये, उनके पास भी कैरेक्टर सर्टिफिकेट होता है। कैरेक्‍टर सर्टिफिकेट एक परंपरा, बदलाव एक कठिन काम है लेकिन डिपार्टमेंट इस पर काम कर रहा है। यह करने से ही करियर बनेगा, ऐसा नहीं है। आप कभी छोटा सा काम लेकर भी काफी कुछ कर सकते हैं। जब तक हम डिग्री और नौकरी के दायरे में सोचते हैं और सामाजिक प्रतिष्‍ठा उससे तय होती है तो कठिनाई होती है। आप वही करें जिसका आपको शौक हो। तीन घंटे के एग्‍जाम के दायरे से बाहर निकलकर कुछ काम करें और आपको शांति मिलेगी।

तिरुविनेली, तमिलनाडु से के विशालनी, पूछा- मैं अपने देश के लिये कुछ करना चाहती हूं। क्या आप मुझे कोई सुझाव दे सकते हैं।

मोदी- कुछ लोगों को लगता है फौज में जाकर, नेता बनकर ही कर ही देश की सेवा सकते हैं। लेकिन अगर आपके घर में 100 रुपए का बिजली का बिल आता है और आप पंखा, बल्ब ऑफ करके, 10 रुपए की बिजली बचाते हैं, तो ये भी देश की सेवा है। हमारे सामान्य व्यवहार से देश का कुछ नुकसान होने से बचा लें, वो ही देश सेवा है। अगर मैंने स्कूटर चालू किया, फोन आ गया, मैं दौड़ कर फोन उठाने चला गया। स्कूटर को चालू छोड़ दिया, पेट्रोल बर्बाद हुआ। पेट्रोल बचाकर भी हम देश की सेवा कर सकते हैं। हमारे घर में कोई काम वाली आती है, अगर हम उसे पढ़ना सिखा दें, तो वो भी देश सेवा है।

बोकारो से अंश‍िका मिंस ने पूछा- आपको क्या लगता है कि किसी विद्यार्थी के लिये सफलता की क्या रेसिपी हो सकती है?

मोदी- सफलता की कोई रेसिपी नहीं होती। काम करते जाना चाहिये, कभी न कभी सफलता खुद आयेगी। एक आध विफलता आये, तो उससे मनोबल को टूटने नहीं देना चाहिये। विफलता को कभी सपनों का कब्रिस्तान नहीं बनने देना चाहिये। विफलता को सपने पूरो करने के लिये सीख लेने की फाउंडेशन बनाना चाहिये। दुनिया में कोई ऐसा नहीं है, जिसे कभी विफलता नहीं मिली हो। दृष्ट‍िकोण बदलने की जरूरत है। किताब- 1913 में किताब लिखी गई थी, "पोलीएना" उसमें हर चीज को सकारात्मक दृष्ट‍िकोण से देखने की विध‍ि लिखी है।

जम्मू-कश्मीर से राबिया नज़ीर ने पूछा- जब आप छात्र थे, तब सबसे ज्यादा आपको क्या अच्छा लगता था, क्लास की पढ़ाई या बाहर की गतिविध‍ियां।

मोदी- मैं पढ़ने में बहुत कमजोर था। ज्यादातर इधर-उधर घूमता रहता था। लेकिन मैं चीजों को बड़ी बारीकी से देखता था। वो सिर्फ क्लास में नहीं बाहर भी दिखती थीं। 1965 की वॉर हम हमारे गांव के पास स्टेशन था। वहां से फौजी जंग पर जा रहे थे। ऐसी चीज को देख लगा कि हम जहां बैठे हैं उससे कहीं बड़ी दुनिया है। लेकिन ये जरूर था क्लास रूम में हमें सेंस ऑफ मिशन मिलता है, बाकी चीजें खोजनी पड़ती हैं। मेरा बाहर ध्यान ज्यादा लगता था।

केवी दिल्ली की श्रेया सिंह ने पूछा- जब भी आप भाषण देते हैं, तब आप लिखी हुई स्पीच नहीं पढ़ते हैं। अच्छी ओरेटरी की मास्टरी आपने कैसे सीखी?

मोदी- अच्छा बोलने के लिये आपको अच्छा सुनना आना चाहिये। आंखों से देखने के अलावा ध्यान से सुनना आना चाहिये। आपका कॉन्फीडेंस अपने आप बढ़ जायेगा। ये चिंता मत कीजिये कि दूसरे क्या कहेंगे। ज्यादा से ज्यादा लोग हंसेंगे। नोट बनाने की आदत होनी चाहिये। मटीरियल तैयार होता जायेगा। दुनिया के गणमान्य लोगों के भाषण उपलब्ध हैं।

दिल्ली की अनामिका दुबे ने पूछा- छात्रों पर बहुत दबाव रहता है, इंजीनियर डॉक्टर बनने का, इसके लिये क्या किया जाये?

मोदी- मेरी जिंदगी ही ऐसी नहीं थी कि मैं इंजीनियर-डॉक्टर बन पाता। मैं अगर क्लर्क बन गया होता तो हमारे गांव के लिये वो उत्सव जैसा होता। मैं माता-पिता से आग्रह करूंगा कि वो अपने बच्चों पर दबाव नहीं डालें। मां-बाप अपनी दुनिया में इतने व्यस्त होते हैं, कि उन्हें पता ही नहीं होता कि बच्चे किस क्लास में हैं। उन्हें अपने बच्चों के साथ समय बितायें और पूछें कि वो क्या चाहते हैं।

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