नरेंद्र मोदी सरकार ने दी मंजूरी- पुराना ओबीसी आयोग होगा खत्म, अब संसद देगी आरक्षण
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पिछ्ड़े वर्गों की आरक्षण की मांग को देखते हुए नया राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने जा रही है।
नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पिछ्ड़े वर्गों की आरक्षण की मांग को देखते हुए नया राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने जा रही है। बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक मे यह निर्णय लिया गया। नया पिछड़ा वर्ग आयोग वर्तमान में मौजूद पुराने पिछड़े वर्ग आयोग की जगह लेगा। साथ ही नए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा भी दिया जाएगा। ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए हुई संसदीय समिति ने नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। अब इस मांग को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मान लिया है।

बताया जा रहा है कि नए आयोग का नाम नेशनल कमीशन फॉर सोशल एंड एजुकेशनली बैकवर्ड क्लासेज (एनएसईबीसी) रखा जाएगा। इस आयोग की सिफारिश के बाद संसद की तरफ से पिछड़ा वर्ग में नई जातियों के नाम जोड़े जाने या हटाए जाने पर फैसला करेगी।
नेशनल कमीशन फॉर सोशल एंड एजुकेशनल बैकवड क्लासेज के गठन के लिए संविधान संशोधन प्रस्ताव पेश किया जाएगा। अभी अन्य पिछड़ा वर्ग में जातियों के नाम जोड़ने या हटाने का काम सरकार के स्तर पर ही होता है। नया आयोग सामाजिक और शैक्षणिक आधार पर पिछड़ों को परिभाषित करेगा। देश के अलग-अलग राज्यों में कई जातियां आरक्षण की मांग करती आ रही है।
आपको बताते चले कि हरियाणा में जाट आंदोलन नए आयोग का गठित किए जाने के फैसले के पीछे बड़ी वजह कहा जा रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम 1993 को रद्द करने का फैसला किया जा चुका है। इसके रद्द होते ही वर्तमान में मौजूद ओबीसी आयोग भंग हो जाएगा। इसकी जगह संविधान संशोधन कर अनुच्छेद 338बी को जोड़ा जाएगा। नए आयोग में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन सदस्यों को नियुक्त किया जाएगा।
यूपीए सरकार ने जाटों को ओबीसी में शामिल कर लिया था पर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताते हुए फैसले को पलट दिया था। कोर्ट ने कहा था कि केवल जाति के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। गुजरात में पाटीदार, राजस्थान में गुर्जर भी आरक्षण की मांग को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं।












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