अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के लिए सामने आए 8 संभावित सदस्यों के नाम, जानिए कौन हैं ?
नई दिल्ली- ये बात पहले से ही सामने आ चुकी है कि अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों के नाम सरकार ने लगभग तय कर लिया है और मकर संक्रांति के बाद किसी भी दिन उन नामों की घोषणा की जा सकती है। माना जा रहा है कि इसके लिए केंद्र सरकार ने करीब दर्जन भर नाम तय किए हैं, जिसमें से 8 संभावित सदस्यों का नाम सामने आ रहा है। जानकारी के मुताबिक सरकार प्रयागराज में वीएचपी और साधु-संतों की होने वाली बैठक से पहले ही इन नामों को सार्वजनिक कर सकती है, जिनमें केंद्र और राज्य सरकार के संभावित अधिकारियों के नाम अभी सामने आने बाकी हैं। हम यहां जिन 8 नामों की चर्चा कर रहे हैं, वे सारे के सारे साधु-संत या मंदिर आंदोलन से जुड़े लोग या उन संस्थाओं के प्रतिनिधि हैं।

साधु-संतों की बैठक से पहले घोषणा होने की संभावना
20-21 जनवरी को प्रयागराज में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और प्रमुख साधु-संतों की एक बड़ी बैठक होने वाली है। माना जा रहा है कि इस बैठक में संतों की ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अपील की जाएगी कि वे ही अयोध्या में रामनवमी के दिन भव्य राम मंदिर की आधारशिला रखें। गौरतलब है कि इस तरह की मांग अयोध्या के संतों की ओर से पहले उठ भी की जा चुकी है। इस साल 2 अप्रैल को रामनवमी है और माना जा रहा है कि उसी दिन से राम मंदिर के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। इसीलिए माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के बाद किसी भी दिन मोदी सरकार मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले ट्रस्ट के सदस्यों के नामों की औपचारिक ऐलान कर देगी। खबरों के मुताबिक इसके लिए सरकार ने करीब दर्जन भर नाम तय कर लिए हैं, जिनमें से 8 संभावित नाम सामने भी आ रहे हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट के 8 संभावित सदस्य
अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों के लिए जिन संभावित लोगों का नाम सामने आया है, उनमें से पहला नाम राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख महंत स्वामी नृत्य गोपाल दास का है। हाल ही में जिस तरह से नृत्य गोपाल दास की सिक्योरिटी बढ़ाई गई है, उससे भी संकेत मिलते हैं कि ट्रस्ट में उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इनके अलावा दिगंबर अखाड़ा के प्रमुख महंत स्वामी सुरेश दास के नाम की भी चर्चा है, जो सुप्रीम कोर्ट में दायर केस में एक पार्टी थे। इस प्रक्रिया से जुड़े लोगों की मानें तो इनके अलावा निर्मोही अखाड़ा के सरपंच स्वामी रामचंद्राचार्य या इसके अयोध्या प्रमुख महंत स्वामी दिनेंद्र दास का नाम भी हो सकता है। इन नामों के अलावा जिन्हें इस हाई प्रोफाइल ट्रस्ट में जगह मिलने की संभावना है उसमें जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, मणिरामदास चवनी के प्रमुख महंत स्वामी कमलनयन दास, रामलला विराजमान के परम सखा त्रिलोखी नाथ पांडे, विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय के अलावा कुछ और अखाड़ाओं के प्रमुखों के नाम भी शामिल हैं। चंपत राय ट्रस्ट को लेकर सरकार और संतों के बीच मध्यस्थ की भूमिका भी निभा चुके हैं। इस कार्रवाई से जुड़े एक शख्स ने नाम नहीं बताने की शर्त पर संकेत दिया है कि इस ट्रस्ट में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े एक पूर्व नौकरशाही का नाम भी शामिल किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट बनाने को कहा है
गौरतलब है कि 9 नवंबर, 2019 को अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम जन्मभूमि की 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन का मालिकाना हक राम लला को देकर वहां राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया था। इस फैसले से अयोध्या में राम जन्मभूमि को लेकर सदियों से चले आ रहे विवाद पूरी तरह से निपट चुका है। इसी फैसले में अदालत ने केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण और उसके संचालन के लिए एक ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया था। इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाना सुनिश्चित किया गया था। ट्रस्ट बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तीन महीनों का वक्त दिया है, जिसकी मियाद 9 फरवरी को पूरी हो रही है।

मंदिर के लिए चंदा भी जुटाया जाएगा
इससे पहले ये जानकारी भी मिल चुकी है कि राम मंदिर ट्रस्ट अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के लिए आम जनता से भी दान देने की अपील कर सकता है। माना जा रहा है कि इसके लिए प्रति परिवार कम से कम 11 रुपये चंदा देने की मांग की जा सकती है और इस संबंध में बीजेपी के नेताओं की ओर से जनता से खास अपील भी किए जाने की बात कही जा रही है। गौरतलब है कि झारखंड में चुनाव प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर निर्माण के लिए हर परिवार से 11 रुपये बतौर चंदा दान देने की अपील की थी। उत्तर प्रदेश के एक अधिकारी ने बताया था कि इसी तरह की अपील पूरे देश में भी की जा सकती है।

मस्जिद के लिए जमीन की भी होगी घोषणा
माना जा रहा है कि केंद्र सरकार अयोध्या के लिए राम मंदिर ट्रस्ट और मस्जिद के लिए जमीन का ऐलान भी एक साथ ही करेगी। जानकारी के मुताबिक सरकार मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन राम मंदिर परिसर में अधिग्रहित 67 एकड़ भूमि से बाहर देना चाहती है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार ने 3-4 जमीन की लिस्ट केंद्र सरकार को सौंपी है, जो अयोध्या में मौजूद '14 कोसी' परिक्रमा के दायरे के बाहर शहर से गुजरने वाले हाइवे पर है।
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