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कोरोना काल में 250% से ज्यादा बढ़ गए N95 मास्क के दाम

नई दिल्ली- देश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते जा रहे हैं और बुधवार को यह आंकड़ा बढ़कर 2,76,583 तक पहुंच चुका है। जाहिर है कि यह संकट लगातार बढ़ता जा रहा है और ऐसे में बचाव के लिए देश के पास सिर्फ यही उपाय है कि कैसे संक्रमण से बचकर रहा जाए। लेकिन, इस संकट की घड़ी में भी कुछ कंपनियां मोटा मुनाफा कमाने में लगी हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना संकट के दौरान के सिर्फ 4 महीनों में ही एन95 मास्क की कीमतों में 250 फीसदी से भी ज्यादा इजाफा हो गया है। सबसे बड़ी बात है कि सरकार को भी पहले से कहीं ज्यादा दाम पर यह मास्क खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे सरकारी खजाने का बिल करोड़ो रुपया बढ़ गया है।

एन95 मास्क की कीमतों में कई गुना उछाल

एन95 मास्क की कीमतों में कई गुना उछाल

नोवल कोरोना वायरस को रोकने के लिए एन95 मास्क को सबसे ज्यादा कारगर माना जाता है। लेकिन, इस संकट की घड़ी में इस मास्क की कीमतों में जितना ज्यादा उछाल आया है, उसपर यकीन करना मुश्किल है। आपको बता दें कि पिछले साल सितंबर तक सरकार एक एन95 मास्क सिर्फ 12.25 रुपये में खरीदती थी, इसमें टैक्स भी शामिल होता था। अगले कुछ महीनों में प्रदूषण बढ़ने से इस मास्क की बिक्र बढ़ी और इस साल जनवरी तक इसकी कीमत बढ़कर 17.33 रुपये हो गई। चीन में कोरोना वायरस का कोहराम शुरू हुआ और यूरोप में त्राहिमाम होने लगा तो 31 मार्च, 2020 तक इसकी कीमत 42 रुपये तक पहुंच गई। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक 15 मई के आसपास इसकी कीमत बढ़कर 63 रुपये हो चुकी थी।

मोटा मुनाफा कमा रही हैं कंपनियां!

मोटा मुनाफा कमा रही हैं कंपनियां!

इसके ठीक उलट प्राइस रेगुलेटर नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी 3 जून को एन95 मास्क की एमआरपी की एक लिस्ट लेकर आई, जिसमें घरेलू कारोबारियों के लिए इस मास्क की कीमत घटाकर 95 रुपये से लेकर 165 रुपये के बीच तय कर दी। जबकि, सच्चाई ये है कि सरकारी संस्था ने इस मास्क की जो घटा हुआ अधिकतम खुदरा मूल्य तय किया वह, जनवरी के दाम की तुलना में 450 से 850 % ज्यादा थी। एमआरपी की वह लिस्ट चार निर्माता कंपनियों के लिए थी, जिसमें मैगनम और विनस सेफ्टी भी शामिल हैं, जो इस मास्क की भारत की दो सबसे बड़ी निर्माता कंपनियां है। इस बीच एनपीपीए का दावा है कि 21 मई को उसकी ओर से जारी मेमोरेंडम के बाद कीमतें कम हो गई हैं। दावे के मुताबिक इस मेमोरेंडम में गैर-सरकारी खरीद में कीमतों में समानता बनाए रखने और उसे उचित दाम पर उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई थी।

सरकारी खजाने पर बढ़ा बोझ

सरकारी खजाने पर बढ़ा बोझ

एनपीपीए कहना है कि उसकी दखल के बाद कीमतें 47% कम हो गई हैं, लेकिन असलियत ये है कि सिर्फ एक ही एन95 मास्क की कीमत में 47% की कमी आई है। जबकि, ज्यादातर के दाम 23 से 41% तक ही कम हुए हैं। केंद्र सरकार ने अपनी खरीद एजेंसी HLL Lifecare के माध्यम से अबतक 1.15 करोड़ एन95 मास्क खरीदे हैं और उनमें से ज्यादतर विनस सेफ्टी से लिए गए हैं और करीब 1 करोड़ मास्क की डिलीवरी और होनी है। HLL Lifecare फिलहाल ये मास्क 60 रुपये टैक्स अतिरक्त के हिसाब से खरीद रहा है, यानि सरकार को करीब 20 रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। अगर 2.15 करोड़ मास्क के हिसाब से देखें तो खजाने पर करीब 43 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

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