'मेरी सरकार रहे या जाए....' प्रधानमंत्री मोदी को लेकर पूर्व पीएम देवगौड़ा ने किया बहुत बड़ा दावा
नई दिल्ली, 13 दिसंबर: पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की एक बायोग्राफी प्रकाशित हुई है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर उनके हवाले से एक बड़ा दावा किया गया है। गौरतलब है कि हाल ही में संसद भवन में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। किताब में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने एचडी कुमारस्वामी को 2019 की शुरुआत में बीजेपी के साथ गठबंधन का ऑफर दिया था और पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहने का भरोसा भी दिलाया था। लेकिन, देवगौड़ा का दावा है कि कर्नाटक के पूर्व सीएम ने एक खास वजह से पीएम मोदी का ऑफर ठुकरा दिया।

पीएम मोदी को लेकर एचडी देवगौड़ा का बड़ा दावा
30 नवंबर को जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में अपने दफ्तर के अंदर पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा को सम्मान के साथ स्वागत किया था, उसको लेकर कर्नाटक की राजनीति में नए समीकरण बनने-बिगड़ने की अटकलें शुरू हो गई थीं। तब कयास लगाए जा रहे थे कि 10 दिसंबर को कर्नाटक विधान परिषद की 25 सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर बीजेपी और जेडीएस के बीच कोई नई खिचड़ी पक रही है। दोनों पार्टियां पहले मिलकर प्रदेश में सरकार भी चला चुकी हैं। लेकिन, सारी अटकलें धरी की धरी रह गईं, लेकिन इसी दौरान देवगौड़ा की एक जीवनी प्रकाशित हुई, जिसमें पीएम मोदी और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी को लेकर एक बहुत बड़ा दावा सामने आया है।

जेडीएस सरकार को समर्थन देने की किया था वादा-देवगौड़ा
'फ्यूरर्स इन अ फिल्ड: द अनएक्स्प्लोर्ड लाइफ ऑफ देवगौड़ा' नाम से पूर्व प्रधानमंत्री की जीवनी सौगत श्रीनिवासराजू नाम के एक पत्रकार ने लिखी है। पेंगुइन विंटेज की इस किताब में दावा किया गया है कि 2019 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुमारस्वामी को प्रदेश में सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का बहुत बड़ा ऑफर दिया था। किताब के अनुसार यह ऑफर तब दिया गया था, जब कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीति आयोग की बैठक के लिए नई दिल्ली आए हुए थे। श्रीनिवासराजू ने देवगौड़ा के हवाले से दावा किया है कि पीएम मोदी ने कुमारस्वामी से कहा था कि बीजेपी के साथ आने पर वह पांच साल तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। गौरतलब है कि उसी साल लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के कई विधायकों ने बीजेपी में शामिल होने के लिए विधायकी छोड़ दी और आखिरकार कुमारस्वामी की सरकार गिर गई थी।

'मेरी सरकार रहे या जाए.....'
देवगौड़ा ने अपनी जीवनी के लेखक से पीएम मोदी के उस ऑफर (जिसका किताब में दावा किया गया है) के बारे में कहा है, 'मेरे बेटे ने कहा कि मैं इस उम्र में अपने पिता को तकलीफ नहीं देना चाहता हूं। वे पीड़ित हैं। मेरी सरकार रहे या जाए, ढलती उम्र में मैं अपने पिता की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचा सकता।' गौरतलब है कि 2006 में कुमारस्वामी बीजेपी के समर्थन से सरकार बना चुके हैं, लेकिन बारी-बारी से सीएम फॉर्मूले के तहत जब बीजेपी की बारी आई थी तो वह पीछे हट गए थे। हालांकि, भाजपा के साथ सरकार बनाने को लेकर देवगौड़ा ने सार्वजनिक तौर पर उनसे नाखुशी जताई थी। हालांकि, किताब में पीएम मोदी और देवगौड़ा दोनों को मंजा हुआ राजनेता बताया गया है, जो एक-दूसरे की भावनाओं की सराहना करते हैं।

'दिल्ली की गंदी राजनीति में......'
किताब में देवगौड़ा के बारे में एक और दावा किया गया है कि जब वह बतौर प्रधानमंत्री पहली बार (कुल चार बार गए) जम्मू और कश्मीर के दौरे पर गए थे तो बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने की एसपीजी चीफ की सलाह को ठुकरा दिया था। किताब के मुताबिक उस समय के एसपीजी चीफ श्यामल दत्ता ने जब श्रीनगर एयरपोर्ट पर उतरते समय उनसे सुरक्षा के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट पहन लेने की गुजारिश की तो पूर्व प्रधानमंत्री ने साफ मना कर दिया, 'लेकिन गौड़ा ने अपने माथे की ओर इशारा करके कहा, यहां जो भी लिखा है वही होगा। अगर कुछ होता है तो मेरी बॉडी को होलेनारसिपुर (देवगौड़ा का गृहनगर)भेज देना। दिल्ली की गंदी राजनीति में, वे ठीक से मेरा अंतिम संस्कार भी नहीं करेंगे।'

'सक्षम अफसरों को देवगौड़ा ने दी तरजीह'
देवगौड़ा की जीवनी में लेखक ने उनके कार्यकाल में आईएएस अधिकारियों की नियुक्तियों के तरीके और उनके चुनाव को लेकर भी विस्तार से चर्चा की है। इसके मुताबिक पूर्व पीएम ने हमेशा विश्वसनीय और सक्षम अफसरों को ही तरजीह दी, साथ ही विभिन्न जाति, धर्म और भाषाई बैकग्राउंड में भी तालमेल बिठाने की कोशिश की थी। उन्होंने काम करने का यह तरीका तभी से अपनाया था, जब वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे।












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