मुस्लिम IAS-IPS कपल को आप करेंगे सैल्यूट, शहीद सैनिक के लिए किया ऐसा काम
शहीद नायब सूबेदार परमजीत सिंह के 3 बच्चे हैं, जिनमें एक 16 वर्ष की बड़ी बेटी और 12 वर्षीय जुड़वां बेटा और बेटी हैं। यूनुस ने छोटी बेटी को गोद लेने का निर्णय लिया है।
शिमला। जम्मू कश्मीर के पुंछ में पाकिस्तानी सेना के कायराना हमले में शहीद हुए भारतीय जवान परमजीत सिंह के परिवार की मदद के लिए हिमाचल प्रदेश एक मुस्लिम अफसर दंपत्ति सामने आया है। शहीद परमजीत सिंह की बेटी की पढ़ाई से लेकर उसकी शादी तक की जिम्मेदारी कूल्लु के डीएम यूनुस और उनकी पत्नी सोलन की पुलिस कप्तान अंजुम आरा ने उठाने का फैसला किया है।

एक बेटी की परवरिश करेंगे डीएम यूनुस
आपको बता दें कि पिछले दिनों पाकिस्तानी गोलीबारी में भारत के दो जवान शहीद हुए थे। पाक सेना ने बर्बरता दिखाते हुए जवानों के सिर भी काट दिए थे। कुल्लू के डीएम यूनुस ने जवानों की शहादत की खबर सुनकर उनके परिवार की मदद करने का फैसला लिया। डीएम ने शहीद परमजीत सिंह की पत्नी परमजीत कौर, शहीद के भाई और अन्य परिजनों से बात की। यूनुस ने परिवार के सामने प्रस्ताव रखा कि वो उनकी एक बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी उठाना चाहते हैं। शहीद की पत्नी परमजीत कौर ने डीएम यूनुस के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है।

पूर्व सैनिकों ने की फैसले की तारीफ
पूर्व नौसैनिक कल्याण संगठन व इंडियन एक्स सर्विसमैन लीग के वाइस चेयरमैन राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि वह इस बात से बेहद प्रभावित हैं कि यूनुस ने एक शहीद के परिवार की बेटी को गोद लेकर समाज को उस राह पर चलने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक देशवासी को देश के लिए लड़ने वाले सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति इस प्रकार का रवैया रखना चाहिए।

'शहीदों की वजह से ही हम सुरक्षित हैं'
शहीद नायब सूबेदार परमजीत सिंह की बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी लेने के मामले में जब कुल्लू के डीएम यूनुस से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हम दोनों पति पत्नी ने शहीद परिवार की मदद करने का फैसला लिया है। डीएम यूनुस ने बताया कि वे देश की सीमा पर पाकिस्तान की बर्बरता की घटना से बेहद दुखी हैं। उन्होंने कहा कि जिन सैनिकों की वजह से देश का प्रत्येक नागरिक सुरक्षित है, उन सैनिकों के परिजनों का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है।

कौन-कौन हैं शहीद परमजीत के परिवार में
शहीद नायब सूबेदार परमजीत सिंह के 3 बच्चे हैं, जिनमें एक 16 वर्ष की बड़ी बेटी और 12 वर्षीय जुड़वां बेटा और बेटी हैं। यूनुस ने छोटी बेटी को गोद लेने का निर्णय लिया है। हालांकि यह बेटी अपनी मां और भाई-बहन के साथ ही रहेगी, लेकिन उसकी परवरिश का सारी जिम्मेदारी यूनुस उठाएंगे। इसको लेकर परिवार ने भी अपनी सहमति दे दी है। यूनुस हर माह इस बेटी के खाते में राशि भेजेंगे। यही नहीं, पढ़ाई से लेकर अन्य तमाम खर्चों की जिम्मेदारी भी वह ही उठाएंगे। ये भी पढ़ें- पाकिस्तान से लिया जाएगा बदला, सेना कर रही एक और सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी
{promotion-urls}












Click it and Unblock the Notifications