मुशर्ऱफ मियां,1971 की जंग की हार को मत भूलना

नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्ऱफ कह रहे हैं कि करगिल की जंग में पाकिस्तान की आर्मी ने भारत को गले से पकड़ लिया था। जब भारत-पाकिस्तान के संबंध सामान्य नहीं हैं तब मुशर्ऱफ का इस तरह का बयान शर्मनाक है।

Musharraf should not forget the debacle of 1971 war. He was the architect of Kargil war

उनसे उम्मीद की जाती है कि वे दोनों देशों के संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कोई पहले करेंगे। उन्हें 1971 की जंग को भी भूलना नहीं चाहिए जिसमें पाकिस्तान को धूल में मिला दिया गया था।

अटल की पहल

पाकिस्तान मामलों की विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह ने एक बार लिखा था कि अगर अटल बिहारी वाजपेयी ने दोनों मुल्कों के बीच अमन की बयार बहाने की कोशिशें की तो इसे विफल करने में जनरल परवेज मुशर्रफ और उनके कारगिल के दुस्साहस को ही जिम्मेदार माना जा सकता है।

घटिया बयानबाजी

बहरहाल, जब पाकिस्तानी अवाम जम्हूरियत और अपने सियासी रहनुमाओं से बहुत निराश हो चुका है, तब मुशर्ऱफ सरीखे नेता घटिया बयानबाजी कर रहे हैं। पाकिस्तान बेरोजगार जेहादियों का गढ़ बन चुका है।

अमन की बयार

भारत और पाकिस्तान दोनों के हित में है कि ये अमन की बहाली को लेकर गंभीरता से प्रयास करें। हालांकि यह कोई बहुत आसान नहीं है क्योंकि सरहद के उस पार सेना के आला अफसर और मुल्लाओं के स्वार्थ इस बात में हैं कि अमन नहीं हो।

परमाणु बम

जानकारों ने बताया कि इनमें से कुछ तो भारत पर हमला करने की चाहत रखते होंगे। यह बात भी नहीं है कि हमारी तरफ सब शांति के दूत ही हैं। इधर भी इस तरह के अफसरों की कोई कमी नहीं है, जिनका पाकिस्तान को लेकर रुख बहुत सख्त है।

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