ड्रग्स केस में शाहरुख खान का बेटा गिरफ्तार, जानिए क्या है NDPS एक्ट और कितनी होती है सजा ?
मुंबई, 04 अक्टूबर: नारकोटिक्स ब्यूरो (एनसीबी) ने 2 अक्टूबर की रात को मुंबई तट पर क्रूज पर एक हाई प्रोफाइल ड्रग्स पार्टी पर कार्रवाई करते हुए बॉलीवुड स्टार शाहरुख खाने के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया है। आर्यन के साथ दो और लोग अरबाज सेठ मर्चेंट और मुनमुन धमेचा भी एनसीबी की गिरफ्त में हैं। मुंबई में क्रूज पर चल रही रेव पार्टी में ड्रग्स लेने, रखने और खरीदने-बेचने के आरोप पर एनसीबी ने इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इन सब के बीच आपको कड़े एनडीपीएस एक्ट के बारे में जानकारी होनी जरूरी है। ऐसे में जानिए ड्रग कानून क्या है और इस केस में कितनी सजा हो सकती है?

सुपरस्टार के बेटे पर ड्रग्स लेने का आरोप
बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान समेत एनसीबी के गिरफ्त में तीन आरोपी है। जानकारी के मुताबिक आर्यन खान पर भी ड्रग्स लेने का संगीन आरोप है। इधर, एनसीबी की रेड में 13 ग्राम कोकीन, 21 ग्राम चरस, 22 नशे की गोलियां और 5 ग्राम एमडी के साथ सवा लाख से ज्यादा की नकदी भी जब्त की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत 72,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए है, यानी साल भर में हर घंटे 8 से अधिक मामले दर्ज किए गए है। वहीं एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में नशे का सबसे ज्यादा चलन है, हाल ही में एक्टर सुशांत सिंह की मौत के बाद अचानक इंडस्ट्री में ड्रग्स को लेकर एनबीसी के निशाने पर कई बॉलीवुड एक्टर और एक्ट्रेस आए थे। वहीं अब सुपरस्टार के बेटे ने एक बार फिर इंडस्ट्री के काले सच को सबके सामने ला दिया।

NDPS एक्ट क्या है ?
सबसे पहले नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट की बात करें तो नशीले पदार्थों के सेवन करने, बनाने, खरीदने और बेचने के खिलाफ देश में जो कानून है, उसे एनडीपीएस एक्ट, 1985 कहा जाता है। इस एक्ट के तहत दो तरह के नशीले पदार्थ आते हैं। एक नारकोटिक और दूसरा साइकोट्रोपिक। कुछ नशीले पदार्थों का उत्पादन मेडिकल और अन्य कामों में आवश्यक होता है, लेकिन उस पर पैनी नजर रखनी जरूरी होता है, इसी को काबू में करने के लिए एनडीपीएस एक्ट बनाया गया है।

जानिए कौन-कौन से होते हैं ड्रग्स
वहीं जो हम दो तरह के नशीले पदार्थ नारकोटिक और साइकोट्रोपिक की बात कर रहे हैं। उनमें नींद लाने वाले ड्रग्स, जो नैचुरल या फिर प्राकृतिक चीजों से बनते हैं। जिनमें चरस, गांजा, अफीम, हेरोइन, कोकेन, मॉर्फीन नारकोटिक ड्रग्स होते हैं। वहीं साइकोट्रोपिक यानी दिमाग पर असर डालने वाली ड्रग्स, जो केमिकल से बनती है। उनमें एलएसडी, एमएमडीए, अल्प्राजोलम है, जो दो-तीन तरह के केमिकल से तैयार होती है। जानकारी के मुताबिक शिप पर एनसीबी की छापेमारी में दोनों तरह के ड्रग्स बरामद हुए हैं।
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एनसीबी के पास विशेष अधिकार
वहीं नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की कार्यशैली की बात करें तो ये नशीले पदार्थों से जुड़े केस की जांच करने वाली देश की सबसे बड़ी एजेंसी है, एनसीबी ड्रग्स के मामले में देश में कहीं पर भी जांच कर सकती है। इसके अलावा बिना वारंट तलाशी और गिरफ्तारी का भी एजेंसी के पास अधिकार है। एनडीपीएस एक्ट की धारा 42 के तहत इनको ये अधिकार प्राप्त है।

ड्रग्स के मामले में सजा का प्रावधान
एनडीपीएस एक्ट में बैन नशीले पदार्थों की मात्रा के आधार पर तीन तरह की सजा का प्रावधान है।
- ड्रग्स कम मात्रा में लिया है तो 1 साल कैद या 10 हजार रुपए तक का जुर्माना। या फिर दोनों भी हो सकते हैं। इसमें केस में जमानत मिल जाती है।
- खरीदने और बेचने के मामले में 10 से 20 साल तक की सजा और एक से दो लाख रुपए तक का जुर्माना। इस केस में बेल नहीं मिलती।
- वहीं कम मात्रा और खरीदने-बेचने के बीच की मात्रा में 10 साल तक की कैद या 1 लाख रुपए तक का जुर्माना। या फिर दोनों भी सकते हैं। इस केस में बेल मिलना या नहीं मिलना ड्रग्स और पुलिस की धाराओं पर निर्भर है।












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