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Mumbai 26/11:नर्स अंजली ने साझा की उस रात की याद, क्या हुआ जब अजमल कसाब की पहचान के लिए उसके सामने पहुंची

anjali

Mumbai 26/11: मुंबई हमले की पीड़िता अंजली विजय कुल्थे ने अजमल कसाब को लेकर अपने अनुभव को साझा करते हुए बयां किया कि अजमल कसाब पर किस कदर हैवानियत सवार थी। आतंकियों ने 26/11 को मुंबई स्थित कामा एंड एल्बलेस अस्पताल को भी अपना निशाना बनाया था। इस अस्पताल में नर्स के तौर पर अंजली नाइट ड्यूटी कर रही थीं। उन्होंने अस्पताल में 20 गर्भवती महिलाओं की जान आतंकियों से बचाई थी। दरअसल विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन में पाकिस्तान की जमकर लताड़ लगाते हुए नर्स अंजली का जिक्र किया था, उसके बाद एक बार फिर से अंजली ने उस भयावह रात की याद को साझा किया है।

कसाब के चेहरे पर नहीं था अफसोस

अंजली ने बताया कि मुझे अजमल कसाब की पहचान के लिए बुलाया गया था। जब मैं वहां पहुंची तो वह मुझपर हंसा और कहा कि मैं सही हूं, मैंने उसे सही पहचाना कि मैं ही अजमल कसाब हूं। अंजली ने कहा कि उसने इतने लोगों को मारा था, लेकिन इसके बावजूद इसके चेहरे पर कोई अफसोस नहीं था। मैं दुखी और गुस्सा थी यह देखकर। बता दें कि अजमल कसाब के खिलाफ भारत में पूरा ट्रायल चला और ट्रायल पूरा होने के बाद उसे फांसी की सजा दी गई थी।

आतंकी दीवार फांदकर अस्पताल में घुसे थे
उस रात की याद को साझा करते हुए अंजली ने कहा उस रात मेरी रात 8 बजे नवजात शिशु वार्ड में मेरी ड्यूटी थी। उस रात हमारे अधिकारियों ने बताया कि सीएसटी स्टेशन पर फायरिंग हो रही है, हमे लोगों के लिए आपातकाल की तैयारी रखनी है। रात 10.30 बजे मैंने देखा कि आतंकी दीवार फांदकर अस्पताल के अंदर आ गए थे। उन्होंने एक नर्स को गोली मार दी थी। मैंने उसे कैजुएलिटी में शिफ्ट किया। ऑन ड्यूटी अधिकारी ने मुझे बताया कि हमपर हमला हुआ है।

दोनों वॉचमैन को मार दी थी गोली

मैं जैसे ही अपने वार्ड की ओर जा रही थी मैंने देखा कि मुख्य द्वार पर दोनों वॉचमैन को गोली मार दी गई थी, यह देखर मैं काफी डर गई थी। जिसके बाद मैं भागकर अपने वार्ड की तरफ गई, मुख्य दरवाजे को बंद कर दिया। सभी मेरे मरीजों को मैंने वार्ड में शिफ्ट किया। तकरीबन 20 गर्भवती महिलाएं थीं। वह काफी डरी हुई थीं। मैंने उन्हें विश्वास दिलाया, सारी लाइट बंद कर दी, ताकि आतंकियों को वह नजर नहीं आए। मैं अपनी सभी मरीजों की जान को बचाना चाहती थी।

पुलिस के आने पर खोला दरवाजा

अंजली ने बताया कि इस तरह की घटना में उच्च रक्तचाप का डर बना रहता है। महिलाओं को ऐसे में प्रसव वेदना शुरू हो सकती है। लिहाजा यह काफी गंभीर समस्या हो सकती है। एक मरीज थी उसे लीवर पेन शुरू हो गया। मैंने जब डॉक्टर को मदद के लिए फोन किया तो उन्होंने मना कर दिया, क्योंकि उस वक्त गोलियां चल रही थी। मैंने उस महिला को दूसरी मंजिल पर शिफ्ट कर दिया। सुबह 7.30 बजे तक हम उस वार्ड में थे, सुबह जब पुलिस आई तब हमने वो गेट खोला। उस रात जिस तरह से गोलियां चल रही थीं, ग्रेनेड फेंके जा रहे थे, कल की सुबह देख पाएंगे, इसका विश्वास नहीं था।

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