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Mulayam Singh Yadav: यारों के यार मुलायम सिंह यादव, जिन्‍होंने दुश्‍मनों को भी बनाया अपना

Mulayam Singh Yadav: यारों के यार मुलायम सिंह यादव, जिन्‍होंने दुश्‍मनों को भी बनाया अपना

Mulayam Singh Yadav:उत्‍तर प्रदेश के तीन बार मुख्‍यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव का 81 साल की उम्र में 10 अक्‍टूबर निधन हो गया। समाजवाद की नींव रखने वाले मुलायम सिंह यादव का जाना उत्‍तर भारत की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है। सात बार सांसद और एक बार रक्षा मंत्री रहे मुलायम सिंह यादव राजनीति के वो धुरंधर नेता थे जो "यारों के यार थे" और दिल से इतने मुलायम थे कि उन्‍होंने राजनीति में अपने कट्टर दुश्‍मनों को भी उनकी मुसीबत के समय अपने गला लगाया और उनको ऊंचे मुकाम पर पहुंचाया।

दर्शन सिंह

दर्शन सिंह

दर्शन सिंह जो मुलायम सिंह के जिगरी दोस्‍त हुआ करते थे, जब दर्शन सिंह की महात्‍वाकांक्षा जगी तब वो जिगरी दोस्‍त राजनीतिक दुश्‍मन बन गया था। 1989 के यूपी विधानसभा चुनाव में जसवंतनगर सीट से मुलायम सिंह यादव के सामने दर्शन सिंह कांग्रेस के टिकट पर खड़े हुए और हार गए। नौबत ये आ हो गई थी 1991 में चुनाव के समय इटावा में दर्शन सिंह की मुलायम सिंह से दुश्‍मनी के चलते गोलियां भी चलवाई। इसके बावजूद 2006 में मुलायम सिंह ने अपनी दिल मुलायम कर अपने राजनीतिक दुश्‍मन को जिगरी दोस्‍त बना लिया और सपा की सदस्‍यता ग्रहण करवा कर 2012 में राज्‍यसभा भेजा।

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    बलराम सिंह यादव

    बलराम सिंह यादव

    बलराम सिंह यादव जो मुलायम सिंह यादव के धुर विरोधी थे। कांग्रेस में रहते हुए 1984 में सांसद बने लेकिन वो लोकसभा नहीं पहुंचे । कांग्रेस के उस प्रभावशाली नेता बलराम सिंह के बल को भी मुलायम सिंह की मुलायमियत ने तोड़ दिया था। रानजीतिक करियर बचाने के लिए जब बलराम सिंह सपा सुप्रीमो के आगे घुटने टेके तो उन्‍हें भी मुलायम सिंह ने गले लगाया था। इतना ही नहीं 1989 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़वा कर सांसद बनाया और संसद पहुंचाया था। हालांकि जून 2016 में तत्‍कालीन तत्‍कालीन उत्‍तर प्रदेश के सीएम अखिलेश यादव ने बलराम सिंह को मुख्तार अंसारी की पार्टी 'कौमी एकता दल' का सपा में विलय करने से नाराज होकर यूपी कैबिनेट से बाहर कर दिया था। तब मुलायम सिंह यादव अपने ही बेटे से इस बात पर गुस्‍सा हुए थे। कैबिनेट से निकाले जाने के बावजूद बलराम सिंह यादव ने तब मुलायम सिंह यादव के लिए कहा था मेरे लिए पिता तुल्य है इसलिए मैं पार्टी में रहूं ना रहूं लेकिन मेरे दिल की भावनाएं कभी नहीं बदलेगी।

    अमर सिंह

    अमर सिंह

    अमर सिंह जो मुलायम सिंह के जिगरी दोस्‍त थे उनसे भी उनकी खटपट हो गई थी और अमर सिंह ने अपनी अलग लोक मंच पार्टी बना ली थी।
    दोनों की दोस्‍ती की शुरूआत 1988 में हुई थी 1996 तक वो मुलायम के राजनीति में दाहिने हाथ बन गए थे लेकिन रानजीति कारणों से दोनों की राहें अलग हो गई थी इसके बावजूद उनके बावजूद मुलायम सिंह ने कुछ समय बाद अमर सिंह को मना लिया था और अपने साथ ले आए थे।

    बेनी प्रसाद वर्मा, रेवती रमन

    बेनी प्रसाद वर्मा, रेवती रमन

    बेनी प्रसाद वर्मा ने भी मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी से अलग होकर समाजवादी क्रांन्ति बना ली थी लेकिन उनको भी मनाकर अपने साथ ले आए। रेवती रमन सिंह जो नाराज होकर अजीत सिंह के साथ चले गए थे उनके बाद में अपने साथ ले आए।

    आजम खान

    आजम खान

    आजम खान जिनकी अखिलेश यादव से खटपट हो गई, इसके बावजूद मुलायम सिंह यादव के वो करीबी बने रहे। आजम खान ने 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ा और सीतापुर जेल में सलाखों के पीछे से 10वीं बार रामपुर सीट जीती। अप्रैल 2022 में ये खबर आई कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे आजम खान सपा छोड़कर अपनी अलग पार्टी बना सकते हैं लेकिन वो मुलायम सिंह यादव ही थे जिनके स्‍नेह और सम्‍मान में वो अभी भी सपा में बने हुए हैं।

     मुलायम सिंह यादव सभी से अपनी दोस्‍ती निभाई

    मुलायम सिंह यादव सभी से अपनी दोस्‍ती निभाई

    वरिष्‍ठ पत्रकार योगेश श्रीवास्‍वत कहते हैं मुलायम सिंह यादव सभी से अपनी दोस्‍ती निभाई। इतना बड़ा मुकाम हासिल करने के बावजूद उनके अंदर अख्‍खड़पन बिलकुल नहीं था। उन्‍होंने अपने प्रबल प्रतिद्वंदी और दुश्‍मनों को भी माफ किया और उनकी मुसीबत की घड़ी में खड़े रहे। मुलायम सिंह यादव की सबसे बड़ी ताकत ये है कि उन्‍होंने अकेले दम पर उन्‍होंने समाजवादी पार्टी को खड़ा किया। अपने पसीने से सपा को सींचा और एक समाजवादियों की एक बड़ी पौध तैयार की।

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