आजमगढ़ की ईंट-ईंट पर कायम है मुलायम का जलवा!

चुनाव प्रचार का अंतिम दिन था। मुबारकपुर के बस स्टेशन चौराहे पर सैकड़ों की संख्या में लग्जरी कारें, मेटाडोर जैसे वाहन खड़े थे। सभी पर सपा का झंडा लगा है। मुलायम की जहानागंज में होने वाली सभा में शामिल होने के लिए तैयारी में। यहीं बुनकर नेता इफ्तिखार अहमद मिलते हैं, हालांकि कुछ दिन पहले वे कुछ और बोल रहे थे।
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सबब जानना चाहा तो बोले, पिछले 2 महीने से 18-20 घंटे बिजली आ रही है। पावरलूम जम कर चल रहे हैं। एक औसत बुनकर की आमदनी 150 रुपये रोजाना कस्बे में एक ट्रेड सेंटर बन जाने पर स्थानीय बुनकर बिचौलियों के बजाय सीधे कारोबारियों का अपना उत्पाद बिकने लगा है।
चुनाव बाद कस्बे में एक बस स्टेशन बनाने का आश्वासन भी मिल चुका है। मुसलमानों का मन पसीजा है, और मुजफ्फरनगर दंगे की टीस के बावजूद मुलायम की रैली में यह समुदाय जा रहा है।
जहानागंज रैली में आए बुनकर याकूब कहते हैं कि यह सच है कि पिछले 15 दिनों में काफी कुछ बदला है। मुलायम का मुसलमानों में दखल बढ़ा है। मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर नाराजगी है पर नरेंद्र मोदी का सवाल मुजफ्फरनगर से बड़ा हो रहा है।
फिर भी बसपा के शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को पूरी तौर से खारिज नहीं किया जा सकता। विधानसभा चुनाव में सपा की हवा में अपनी सीट बचाई थी। एक साल से अधिक समय से क्षेत्र में सक्रिय भी हैं। दलितों का एकमुश्त समर्थन उनको दौड़ से बाहर नहीं रखेगा। आजमगढ़ शहर के दीन दयाल चौराहे पर सगड़ी क्षेत्र के यादव-मुस्लिम बहुल गांव जयराजपुर के किसान रामसमुझ यादव को मुलायम और उनकी सत्ता पर पूरा भरोसा है।
इलाके में किसका ज्यादा जोर है, के सवाल पर बताते हैं कि भाजपा प्रत्याशी रमाकांत दमदार नेता हैं, पर उन्होंने कोई काम नहीं किया। मुलायम के आने से माहौल बदला है। उनसे बड़ा यादव नेता कौन है? बिरादरी के भी हैं, विकास भी होगा।
जिले में विकास की एक ईंट किसी और ने लगाई है क्या? हां, मुलायम की जगह हवलदार या बलराम यादव होते तो रमाकांत भारी पड़ते। अतीत गवाह है कि मुलायम की सियासी ताकत यादव और मुसलमानों ने ही बढ़ाई है, पर विसंगति यह है कि आजमगढ़ में इन्हीं दोनों जातियों की तरफ से उन्हें चुनौती भी मिल रही थी।
पर बुनकर इफ्तिखार व जयराजपुर के रामसमुझ यादव की बातों से लगता है कि चुनाव का अंतिम दौर आते आते दोनों बिरादरियों का मिजाज कुछ बदला है। पर कितना बदला है ये तो चुनाव का नतीजा ही बता सकता है।
दरअसल, क्षेत्र में साढ़े तीन लाख यादव और ढाई लाख मुस्लिम मतदाता हैं। इन्हीं दोनों जातियों का झुकाव नतीजा तय करता है। सपा ने भी इन्हीं दोनों बिरादरियों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया है।
सपा नेता अपने प्रचार अभियान के दौरान यादव बहुल इलाके में मुलायम को बड़ा यादव नेता बता रहे हैं वहीं मुस्लिम इलाकों में अयोध्या विवाद में अपनी सरकार गंवाने वाली उनकी भूमिका तक की याद दिला रहे हैं।
पर, अपनी लकीर बड़ी करने के लिए विकास के मुद्दे की छौंक भी लगाई। ट्रांसफार्मर रिपेयरिंग के बड़े कारोबारी शिव कुमार रूंगटा कहते हैं कि आजमगढ़ से मुलायम की उम्मीदवारी की घोषणा के पहले जिले में बमुश्किल 10-12 घंटे बिजली आती थी पर अब 20-22 घंटे बिजली आ रही है। गौरतलब होगा यह देखना कि क्या पूर्वांचल समाजवादी पार्टी को वोट लगातार बिजली आपूर्ति के दम पर देता है या विकास की नई परिभाषाओं की उम्मीद में सपा का सपना टूटता है।












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