ना पंजा ही लहरा पाए न कमल ही ख‍िला पाए मुख्तार अंसारी

mukhtar ansari
लखनऊ। कानून के हाथ लंबे ही नहीं मजबूत और निष्पक्ष भी होते हैं, फिर चाहे वह खुद को 'वीआईपी' कहने वाला चुनाव उम्मीदवार ही क्यों न हो, न्याय की जमीन सभी के लिए बराबर ही होती है। घोसी संसदीय क्षेत्र से कौमी एकता दल के प्रत्याशी मुख्तार अंसारी को जिला कारागार लखनऊ से वापस आगरा जेल भेज दिया गया। मुख्तार को रविवार रात करीब नौ बजे आगरा जेल में दाखिल किया गया।

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चुनाव प्रचार के लिए मुख्तार को कोर्ट से दस दिनों का पैरोल मिला था लेकिन उन्हें नौ दिन बाद शनिवार सुबह आगरा जिले से रिहा किया गया। लेकिन वह प्रचार के लिए निर्धारित समय तक लखनऊ के पास ही पहुंच पाए। इसलिए रविवार रात उन्हें लखनऊ की जेल में रखा गया और रविवार प्रात: उन्हें वहां से आगरा के लिए भेज दिया गया। इस प्रकार से वह कोर्ट के पैरोल के बावजूद चुनाव प्रचार के वास्ते घोसी क्षेत्र में नहीं पहुंच पाए।

कोर्ट जा सकता है कौमी एकता दल -

मुख्तार अंसारी के कस्टडी पैरोल के बावजूद क्षेत्र में नहीं आ पाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसे सपा सरकार की साजिश बताते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तारिक अनवर ने आरोप लगाया है कि शासन के इशारे पर पुलिस प्रशासन मुख्तार अंसारी को 15 घंटे तक टहलाता रहा। कौमी एकता दल प्रदेश सरकार की इस साजिश के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। फिलहाल काशी में मतदान जारी है, जिसमें प्रमुख तौर पर तीन दिग्गजों की किस्मत दांव पर लगी है।

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