अब एकता कपूर पर बरसे 'महाभारत के भीष्म', कहा- उन्होंने द्रौपदी के कंधे पर टैटू डालकर...

सोनाक्षी सिन्हा पर तंज कसने के बाद अब मुकेश खन्ना ने एकता कपूर पर महाभारत की हत्या करने का आरोप लगाया है...

नई दिल्ली। देश में लगातार सामने आ रहे कोरोना वायरस के मामलों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि 21 दिनों का लॉकडाउन आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि इस मामले पर आधिकारिक तौर पर अभी कुछ भी नहीं कहा गया है। लॉकडाउन को देखते हुए सरकार ने दूरदर्शन पर कई पुराने और लोकप्रिय धारावाहिकों का फिर से प्रसारण शुरू किया है, जिनमें रामायण और महाभारत को लेकर काफी चर्चा हो रही है। महाभारत में भीष्म पितामह का किरदार निभाने वाले अभिनेता मुकेश खन्ना भी अपने बयानों को लेकर इन दिनों सुर्खियों में छाए हुए हैं। अब मुकेश खन्ना ने मशहूर टीवी प्रोड्यूसर एकता कपूर को लेकर बयान दिया है।

'एकता कपूर ने महाभारत की हत्या कर दी'

'एकता कपूर ने महाभारत की हत्या कर दी'

मुंबई मिरर की खबर के मुताबिक, 'भीष्म पितामह' के बाद 'शक्तिमान' के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले मुकेश खन्ना ने कहा है कि एकता कपूर ने अपने सीरियल 'कहानी हमारे महाभारत की' के जरिए 'महाभारत की हत्या' कर दी। मुकेश खन्ना ने कहा, 'शक्तिमान का नया वर्जन उस तरह से नहीं हो सकता जिस तरह से द्रौपदी के कंधे पर टैटू डालकर एकता कपूर ने 2008 में महाभारत बना दिया। उन्होंने कहा कि वो मॉडर्न लोगों के लिए महाभारत बना रही हैं। संस्कृति कभी मॉडर्न नहीं हो सकती पुत्री। जिस दिन संस्कृति को मॉडर्न करोगे, खत्म हो जाएगी।'

'रामायण और महाभारत हमारे इतिहास हैं'

'रामायण और महाभारत हमारे इतिहास हैं'

इंटरव्यू के दौरान मुकेश खन्ना ने कहा, 'अगर कोई सीरियल 'क्योंकि ग्रीक भी कभी हिंदुस्तानी थे' नाम से बनेगा तो मैं एकता कपूर की महाभारत को जरूर स्वीकार करूंगा। एक महाकाव्य का वध करने का अधिकार इन्हें किसने दिया? उन्होंने देवव्रत की भीष्म प्रतिज्ञा के वास्तविक संस्करण को कुछ और ही बना डाला। शो में बाकी चीजों के साथ-साथ उन्होंने सत्यवती की छवि तक बदल डाली। उन्होंने महाभारत को लिखने वाले वेद व्यास से ज्यादा चालाक बनने की कोशिश की, जिसपर मुझे आपत्ति है। मैं यह बात कहना चाहता हूं कि रामायण और महाभारत केवल पौराणिक कथाएं नहीं हैं, वे हमारे इतिहास हैं।'

मुकेश खन्ना ने सोनाक्षी पर कसा तंज

मुकेश खन्ना ने सोनाक्षी पर कसा तंज

गौरतलब है कि एकता कपूर ने साल 2008 में 'कहानी हमारे महाभारत की' सीरियल लॉन्च किया था। हाल ही में मुकेश खन्ना उस वक्त सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने फिल्म अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा पर कटाक्ष किया था। दरअसल चर्चित टीवी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में सोनाक्षी सिन्हा रामायण से जुड़े इस सवाल का जवाब नहीं दे पाईं थी कि हनुमान जी संजीवनी बूटी किसके लिए लाए थे? उस समय सोनाक्षी को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया गया था। हालांकि बाद में सोनाक्षी सिन्हा ने उन्हें ट्रोल करने वाले लोगों को करारा जवाब दिया था।

'रामायण से सोनाक्षी सिन्हा जैसे लोगों को भी मदद मिलेगी'

'रामायण से सोनाक्षी सिन्हा जैसे लोगों को भी मदद मिलेगी'

वहीं, इस मामले को लेकर मुकेश खन्ना ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में सोनाक्षी पर तंज कसते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि रामायण की टीवी पर वापसी से ऐसे बहुत सारे लोगों को फायदा होगा, जो शुरुआत में इस सीरियल को नहीं देख पाए। इस सीरियल से सोनाक्षी सिन्हा जैसे लोगों को भी मदद मिलेगी, जिन्हें हमारी पौराणिक गाथाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनके जैसे लोग ये भी नहीं जानते कि हनुमान जी किसके लिए संजीवनी बूटी लेकर आए थे।'

महाभारत के कृष्ण ने किया पलटवार

महाभारत के कृष्ण ने किया पलटवार

वहीं, मुकेश खन्ना के इस तंज पर महाभारत के कृष्ण यानी नीतीश भारद्वाज ने सोनाक्षी सिन्हा का पक्ष लिया। नीतीश भारद्वाज ने कहा, 'मैं अपने दोस्त मुकेश खन्ना से कहना चाहता हूं कि हो सकता है कि पूरी नई पीढ़ी को ही भारतीय संस्कृति, विरासत और उसके साहित्य के बारे में मालूम ना हो। इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। 1992 के बाद भारत के आर्थिक परिवेश में बहुत बड़ा बदलाव हुआ और फिर उसके बाद सभी के बीच अपने करियर में आगे बढ़ने, खुद को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने की दौड़ शुरू हो गई। अगर हमें किसी की गलती निकालनी है, जोकि मुझे नहीं लगता वाजिब है, तो फिर पिछली पीढ़ी के माता-पिताओं की गलती निकालिए जो अपने बच्चों को हमारी संस्कृति और विरासत से वाकिफ कराने में विफल रहे।'

'नई पीढ़ी को हमारी विरासत और संस्कृति की कम जानकारी'

'नई पीढ़ी को हमारी विरासत और संस्कृति की कम जानकारी'

नीतीश भारद्वाज ने आगे कहा, 'यह हमारी कम दूरदर्शी शैक्षिक प्रणाली के कारण भी है, जिसे अंग्रेजों ने लागू किया था। इसके कारण सांस्कृतिक और मूल्य आधारित शिक्षा के लिए हमारे नियमित पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए कोई स्कोप ही नहीं बचता। माता-पिता के ऊपर बच्चों को स्कूल के बाद ट्यूशन भेजने का इतना ज्यादा प्रैशर होता है कि जो एक्स्ट्रा टाइम बचता है उसमें भी धार्मिक मूल्यों और ग्रंथों की जानकारी बच्चों को नहीं दी जा सकती। इस शिक्षा प्रणाली को बदलने या संशोधित करने में विफलता 1947 के बाद की अधिकांश सरकारों की विफलता रही है। सिस्टम से संबंधित कई ऐसी खामिया हैं, जिनकी वजह है यह स्थिति आई है और नई पीढ़ी को हमारी विरासत और संस्कृति की कम जानकारी है।'

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