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MUDA घोटाले में लोकायुक्त पुलिस की जांच को BJP क्यों बता रही है मैच फिक्सिंग?

MUDA Scam News: मैसूर अर्बन डेवेलपमेंट अथॉरिटी (MUDA Scam) घोटाले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की लोकायुक्त पुलिस के सामने बुधवार को पेशी हो चुकी है। लेकिन, बीजेपी इसको लेकर सवाल उठा रही है और पूरी जांच को ही 'स्क्रिप्टेड' बता रही है। पार्टी दावा कर रही है कि पूरा 'मैच फिक्स' है।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता बीएस येदियुरप्पा ने भी इस मामले में लोकायुक्त जांच को मात्र दिखावा बताया है और दावा किया है कि इसका कोई नतीजा नहीं निकलने जा रहा है।

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यह सिर्फ दिखावा है- येदियुरप्पा
2011 में येदियुरप्पा की मुख्यमंत्री पद की कुर्सी लोकायुक्त जांच की वजह से ही जा चुकी है। अब सिद्दारमैया की लोकायुक्त पुलिस के सामने बड़ी ही आसानी से उपस्थिति पर उन्होंने कहा, 'सिद्दारमैया खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए बेचैन हैं। यह सिर्फ दिखावा है। हम सब जानते हैं कि क्या होगा, लोकायुक्त उनके खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं लेगा। अगर उन्हें सच में लगता है कि बेकसूर हैं तो उन्हें इस केस को सीबीआई को सौंप देना चाहिए।'

सिद्दारमैया को कैसे पता चला कि कितनी देर होगी पूछताछ?
दरअसल, बीजेपी के नेता यह सवाल उठा रहे हैं कि सिद्दारमैया को कैसे पता था कि उनसे सिर्फ दो ही घंटे पूछताछ होगी? क्योंकि, उनकी यात्रा शेड्यूल के मुताबिक वह उपचुनाव में प्रचार करने के लिए चन्नापटना जाने से पहले सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक लोकायुक्त कार्यालय में रहने वाले थे।

बीजेपी नेता आर अशोका ने पूछा, 'क्या यह पूर्व-नियोजित था? हमने प्रवर्तन निदेशालय की जांच देखी है, जो 48 से 60 घंटों तक चलती है। सिद्दारमैया को कैसे पता था कि उनका दो घंटे में हो जाएगा?' वहीं चलवाडी नारायणस्वामी का कहना है कि 'कार्यकर्ता अपने बॉस से सवाल कैसे पूछ सकता है? यह सब सरकार-प्रायोजित है।'

अशोका को जांच की निष्पक्षता पर इस वजह से भी संदेह है कि उनका कहना है कि आमतौर पर पुलिस मुख्य आरोपी से पूछताछ करने से पहले तीसरे और चौथे नंबर के आरोपी से सवाल करती है। इस घोटाले को लेकर बीजेपी लगातार प्रदर्शन भी कर रही है और सीएम से इस्तीफा भी मांग रही है।

मैंने कुछ भी गलत नही किया है- सिद्दारमैया
वहीं येदियुरप्पा की ओर से सीबीआई जांच की मांग को सिद्दारमैया ने एक बार फिर से खारिज कर दिया है। उनकी दलील है कि 'लोकायुक्त एक स्वतंत्र एजेंसी है और मैंने कुछ भी गलत नही किया है।' मुख्यमंत्री के बचाव में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार उतरे हुए हैं।

सीएम ने कानून का सम्मान किया- डीके शिवकुमार
उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि सीएम चाहते तो पेशी से छूट मांग सकते थे लेकिन, 'मुख्यमंत्री के रूप में सिद्दारमैया ने कानून का सम्मान किया और लोकायुक्त पुलिस के सामने उपस्थित हुए।' 'किसी भी अधिकार का दुरुपयोग नहीं किया गया है।'

लोकायुक्त चाहे तो फिर बुला सकती है- सिद्दारमैया के कानूनी सलाहकार
इस विवाद के बीच सिद्दारमैया के कानूनी सलाहकार और कांग्रेस विधायक एएस पोन्नान्ना ने यह दलील दी है कि लोकायुक्त पुलिस को अगर जांच के दौरान आवश्यकता होगी तो वह सीएम को फिर से पुछताछ के लिए बुला सकती है।

उन्होंने कहा, 'यह जांच अधिकारी के विवेक पर है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि उनके सामने जो भी सवाल रखे गए, उन सबका जवाब दे दिया। अगर कुछ बचता है या आगे की जांच में उन्हें कोई जानकारी मिलती है और अगर उन्हें लगता है कि वह बयान दर्ज करेंगे, वे फिर से उन्हें (सीएम को) बुला सकते हैं।'

क्या है मूडा घोटाला?
बुधवार को सीएम सिद्दारमैया से मैसूर में लोकायुक्त एसपी टीजे उदेश की अगुवाई वाली एक टीम ने पूछताछ की थी। यह कथित घोटाला मैसूर के प्राइम लोकेशन पर सीएम की पत्नी को कौड़ियों के मोल वाली जमीन के बदले बेशकीमती प्लॉट्स आवंटित किए जाने का है।

विपक्षी बीजेपी इसे हजारों करोड़ रुपए का घोटाला बता रही है। हालांकि, कानूनी शिकंजा कसने की शुरुआत होते ही सिद्दारमैया की पत्नी आवंटित किए गए सभी प्लॉट्स मूडा को सरेंडर कर चुकी हैं।

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