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प्रीडेटर ड्रोन समुद्री सीमाओं का नया प्रहरी, एक बार में पूरे हिंद महासागर पर नजर, जानिए खासियत

MQ-9B Predator Drone: वर्ल्ड का सबसे घातक 'प्रीडेटर ड्रोन' भारत की सीमाओं पर कड़ी नजर रखने में मदद कर रहा है। जो कि समुद्री सीमाओं की कड़ी निगरानी में बेहद अहम साबित हो रहे हैं। प्रीडेटर ड्रोन ने चेन्नई के नेवी एयर बेस आईएनएस राजली से हिंद महासागर एरिया में 13,000 घंटे से ज्यादा के मिशन के दौरान उड़ान भरी है।

दरअसल, दो प्रीडेटर ड्रोन नौसेना के पास हैं, जो नवंबर 2020 में समुद्री निगरानी के लिए अमेरिका से लिए थे। नौसेना ने इन ड्रोन आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत अमेरिकी फर्म जनरल एटॉमिक्स से लीज पर लिया है। मालूम हो कि भारत ने 31 प्रीडेटर ड्रोन को लेकर अमेरिका से डील की है।

Predator Drone

देश के समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिहाज से इन ड्रोन्स को बहुत जरूरी माना जा रहा है। नौसेना की ड्रोन यूनिट के सेकंड इन कमांड लेफ्टिनेंट कमांडर लोकेश पांडे ने एएनआई को बताया कि यह एयरक्रॉप्ट एक बार में 4000-8000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करने की क्षमता है। इस तरह से यह एक बार में 30 घंटे से अधिक समय तक काम कर सकता है, जो पूरे हिंद महासागर क्षेत्र को एक बार में कवर कर सकता है।

वहीं 15 और एडवांस्ड प्रीडेटर एमक्यू-9बी ड्रोन के बारे में पूछे जाने पर देश में प्रीडेटर ड्रोन के पहले मिशन कमांडर लेफ्टिनेंट कमांडर वर्षा ने कहा कि जिन नए ड्रोनों की योजना बनाई जा रही है, वे घातक हथियारों से लैस होंगे। हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों, बमों और पनडुब्बी का पता लगाने वाली किटों सहित हथियारों के साथ सोनोबॉयस लगे हुए हैं, जो छिपे हुए दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने में मदद कर सकते हैं।

लेफ्टिनेंट कमांडर वर्षा ने बताया कि प्रीडेटर ड्रोन अमेरिकी हेलफायर मिसाइलों, बमों और हाई-लेवल सेंसर से लैस हो सकते हैं। जिनका इस्तेमाल दुश्मन के ठिकानों पर लंबी दूरी से हमले करने के लिए किया जा सकता है।

लद्दाख जैसी जगहों पर ड्रोन की तैनाती के बारे में पूछे जाने पर लेफ्टिनेंट कमांडर लोकेश ने कहा कि मानवरहित विमान ऊंचे पहाड़ी इलाकों से जमीन पर युद्ध के मैदान की स्थिति का सीधा लाइव फीड दिल्ली में मुख्यालय में बैठे शीर्ष कमांडरों को प्रदान कर सकता है।

आपको बता दें कि अमेरिकी सेना ने अल-कायदा के अयमान अल-जवाहिरी और अन्य आतंकवादियों के खिलाफ अनगिनत हमले करने के लिए इन्हीं ड्रोन का इस्तेमाल किया है। मालूम हो कि इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान भारत द्वारा घोषित सौदे के हिस्से के रूप में भारतीय सशस्त्र बलों को इनमें से कुल 31 ड्रोन मिल रहे हैं।

गौरतलब है कि 31 ड्रोनों की डिल 3.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर में की जा रही है, लेकिन भारतीय पक्ष को प्रस्तावित कीमत पर रियायत मिलने की उम्मीद है। नौसेना को 31 में से 15 ड्रोन मिलेंगे, जबकि थल सेना और वायु सेना को 8-8 ड्रोन मिलेंगे।

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