हर साल डूबते हैं सरकारी बैंकों के 30 हजार करोड़ रु.
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) अब तो कुछ इस तरह से लगने लगा है कि सरकारी बैंकों से लोन लीजिए और देने का वक्त आए तो भूल जाइये। यकीन मानिए कि हर साल सरकारी बैंकों के डूबे हुए 30 हजार करोड़ से ज्यादा राशि के लोन को सरकार माफ कर रही है। क्या आपको मालूम है कि पिछले 5 वर्षों में सरकारी बैंकों ने 161018 करोड़ राशि बटटे खातें में डाल दी?
हो जाते विकास कार्य
बैंक इसे एनपीए कहता है। वरिष्ठ टीवी पत्रकार रमेश भट्ट कहते हैं कि यह इतनी राशि है कि हम बड़े पैमाने पर विकास कार्य कर सकतें हैं। आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन के मुताबिक इस धनराशि से हम 15 लाख बच्चों को देश के शीर्ष संस्थानों में पढ़ा सकतें है। इनमें ज्यादातर पैसा बड़े उद्योगपतियों का है। [जानिये क्या करें अगर एटीएम से मिले जाली नोट]
30 हजार करोड़
मसलन सालाना सरकार 30 हजार करोड़ से ज्यादा राशि को माफ कर रही है। 2013-14 में यह राशि 34000 करोड़ रूपये थी। जिस देश में 77 फीसदी आबादी 20 रूपये से ज्यादा खर्च करने की हैसियत में नही है वहां हजारों करोड़ रूपये बड़े उद्योगपति को माफ कर दिए जातें है।
बड़ी कंपनियों को बड़ी छूट
इतना ही नही बड़ी- बड़ी कंपनियों को साल में जो छूट दी जाती है वह मिलाकर 6 लाख करोड़ से ज्यादा की है जिसे आर्थिक भाषा में रेवन्यू फोरगौन कहा जाता है। इससे जुड़ा दस्तावेज सरकार हर साल बजट के साथ पेश करती है।
भट्ट कहते हैं कि गौर से सोचिए गरीब की सब्सिडी बोझ है और अमीर का कर्ज एनपीए। दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र में यह क्या हो रहा है। पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व जनरल मैनेजर वी.पी. जैन कहते हैं कि एनपीए बैंकों के सामने बड़ी समस्या है। सरकार को एनपीए को खत्म करने और बैंकों से लोन लेने वालों से उसे वापस लेने के उपाय़ तलाश करने होंगे। उसके बिना तो बात नहीं बनेगी।













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