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'ऐसा लग रहा था कोई मुझे ढंककर तूफान से बचा रहा', अन्नापूर्णा पर चमत्कारी रूप से बची पर्वतारोही की आपबीती

Mountaineer Baljit Kaur अन्नापूर्णा चोटी पर फंस गई थीं। वहां से उनको रेस्कूय किया गया। अब उन्होंने ठीक होकर आपबीती सुनाई है।

 Baljeet Kaur

हिमाचल प्रदेश की पर्वतारोही बलजीत कौर पिछले महीने माउंट अन्नापूर्णा को फतह करने नेपाल गई थीं। वो चोटी पर तिरंगा लहराकर वापस लौटीं, तो लापता हो गईं, लेकिन फिर 48 घंटे बाद बर्फ के बीच उनको जिंदा खोज निकाला गया। अब वो स्वस्थ होकर लौट आई हैं, साथ ही उन्होंने अपने अनुभव को साझा किया। उनका उस मुश्किल हालात से जिंदा लौटना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

बलजीत 18 अप्रैल को अन्नापूर्णा पर्वत पर थीं, जिसकी ऊंचाई 7000 मीटर है। वहां का तापमान माइनस 40 डिग्री सेल्सियस था। उन्होंने एक कंपनी के साथ रजिस्ट्रेशन करवाया था। उनकी मदद के लिए शेरपा भी थे, लेकिन वो ज्यादा अनुभवी नहीं थे। अभियान जब शुरू हुआ तो शेरपा ने उसे और एक ट्रेनी को आगे जाने को कहा, उसने खुद बाद में आने की बात कही।

जब वो 7000 फीट की ऊंचाई पर पहुंचीं तो एक दूसरा शेरपा आया, वो बहुत थका हुआ था। उन्होंने मिशन कैंसिल करने को बोला लेकिन वो तैयार नहीं था, क्योंकि उसे ट्रेनी से शेरपा बनने के लिए इस साल का अभियान पूरा करना था। उन्होंने किसी तरह से चोटी को फतह किया, लेकिन फिर उनकी तबीयत खराब होने लगी।

वो माउंटेन सिकनेस (AMS) का शिकार हो रही थीं। उसके बाद उनके साथ कई रहस्यमयी चीजें हुईं। बलजीत के मुताबिक वो उन्होंने जब चोटी फतह की तो उनको लगा एक महिला उनको बधाई दे रही और वो नेपाली झंडे के बदले उनसे पैसे मांग रही। उनको ऐसा लगा कि जैसे कुछ शेरपा वहां हों और उनको तेजी से आगे बढ़ने के लिए कह रहे।

 Baljeet Kaur

उनको ऐसा भी लग रहा था वहां पर पंजाबी गाने बज रहे थे। उनकी आंखें बंद हो रही थीं, लेकिन उन्होंने उसको खोलने की कोशिश जारी रखी। उन्होंने उसके लिए खुद को थप्पड़ भी मारा। वहां पर बर्फीले तूफान आ रहे थे, लेकिन उनको ऐसा लगा जैसे किसी ने उनको पीछे से कवर किया हो। उनको तूफान की आवाज सुनाई दे रही थी, लेकिन ठंड नहीं लग रही थी।

वो हर 15-20 मिनट में कुछ अजीब सी कल्पनाएं करतीं और फिर होश में आ जातीं। वो एक बार फिसलीं और करीब 20 मीटर नीचे गईं। हालांकि सेफ्टी वाली रस्सी की वजह से वो बच गईं। वहां पर भी उनकी कल्पनाएं नहीं रुकीं। उनके मन में रस्खी खोलने के ख्याल आ रहे थे, ताकि वो खुले आसमान में उड़ सकें, हालांकि उन्होंने खुद को काबू में किया।

48 घंटे तक वो जिंदगी-मौत से संघर्ष करती रहीं। कई बार उनको लगा कि वो नहीं बचेंगी, लेकिन अचानक उनकी नजर मोबाइल पर गई। उन्होंने उससे एक मैसेज भेजा और बाद में उनको रेस्क्यू कर लिया गया, लेकिन इतने मुश्किल हालात में उनका बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

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