केरल: प्रवासी मजदूरों के बच्चों ने 10वीं में किया कमाल, खुशी से झूमा परिवार, प्रेरित करने वाली है कहानी
Motivational Story: देशभर में इन दिनों बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट आ रहे हैं। आज हम आपको प्रवासी मजदूरों के बच्चों की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने 10वीं के परीक्षा में कमाल कर दिखाया है। इनके परीक्षा में आए शानदार नंबर और अभाव में रहने वाले लाखों के छात्रों के लिए प्रेरणा है।
केरल के एर्नाकुलम जिले के रहने वाले प्रवासी मजदूर प्रदीप मोहिते पिछले सप्ताह जारी अपने बेटे शिवराज मोहिते के10वीं कक्षा के नतीजों को देखकर बहुत खुश हैं। शिवराज मोहिते केरल के एर्नाकुलम जिले के एक मलयालम मीडियम स्कूल सेंट जॉर्ज हाई स्कूल में पढ़ते हैं और सभी विषयों A+ स्कोर किया है।

सिर्फ शिवराज ही नहीं, सेंट जॉर्ज हाई स्कूल में पढ़ने वाले प्रवासी श्रमिकों के कई बच्चों ने 10वीं में बेहतर स्कोर किया है। ये सभी बच्चे एर्नाकुलम जिले की रोशनी योजना के तहत शिक्षा पा रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य भाषा की बाधा को दूर करने और मलयालम, अंग्रेजी और हिंदी सीखने में मदद करना है। इस योजना के तहत 85 छात्र, जिन्होंने 10वीं बोर्ड की परीक्षा दी थी, सब अच्छे नंबरों से पास हुए हैं। उनमें से दो ने सभी विषयों में A+ स्कोर किया है। उनमें से कम से कम 43 ने मलयालम में A या A+ स्कोर किया है।
कपड़ा दुकान में काम करते हैं प्रदीप मोहिते, बेटे को 10वीं में A+ स्कोर
कोच्चि के पास त्रिपुनिथुरा में एक कपड़ा दुकान में सेल्समैन के रूप में काम करने वाले प्रदीप दो दशक पहले महाराष्ट्र के सांगली जिले के सोहाली गांव से आकर कमाने खाने के लिए केरल में बस गए थे। बाद में शादी के बाद वह अपनी पत्नी अर्चना को भी केरल ले आए। बेटा शिवराज के अलावा, दंपति की एक बड़ी बेटी कोमल है, जो 12वीं कक्षा की छात्रा है।
प्रदीप ने कहा, ' सालों से हम एक छोटे से किराए के घर में रह रहे हैं, दो कमरा और एक रसोईघर, जिसका किराया 5,000 रुपये प्रति माह है। मेरा वेतन सिर्फ 12,000 रुपये है। केरल में मेरा संघर्ष अपने बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा बेटा 10वीं के रिजल्ट में इतना अच्छा नंबर लाएगा।'
प्रदीप ने कहा, "हमें अपने राज्य में ऐसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुफ्त में नहीं मिलेगी। मैं किसान परिवार से आता हूं। मैं स्कूल नहीं जा पाया था, हमारे परिवार की स्थिति ठीक नहीं थी। लेकिन मैं ये ह सुनिश्चित करना चाहता था कि मेरे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले।"
UP के मजदूर के बच्चों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया
उत्तर प्रदेश के एक प्रवासी श्रमिक की बेटी सुष्मिता राज ने भी 10वीं कक्षा के सभी विषयों में A+ स्कोर हासिल किया। सुष्मिता जो डॉक्टर बनना चाहती है, उसने कहा, "मेरे गांव बरैनी (यूपी के मिर्जापुर जिले में) में केवल कुछ लड़कियां ही 10वीं और 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई करती हैं। लेकिन केरल में, आप 10वीं कक्षा पूरी करने के बाद बेकार नहीं बैठ सकते। यहां, हर लड़की अपनी शिक्षा जारी रख रही है। जब हर कोई उच्च शिक्षा के लिए जाता है, तो कोई घर पर नहीं बैठ सकता।''
सुष्मिता एर्नाकुलम के बिनानीपुरम में सरकारी हाई स्कूल की छात्रा हैं। सुष्मिता के पिता हेडलोड वर्कर हैं और मां आटा मिल में दिहाड़ी मजदूरी का काम करती हैं। सुष्मिता के पिता राज कुमार एक स्कूल ड्रॉपआउट हैं और सरिता अनपढ़ हैं।
दंपति की सबसे बड़ी बेटी अब इंजीनियरिंग की छात्रा है, और उनके दो बेटों में से एक 12वीं कक्षा में है और दूसरा हाई स्कूल में है। राज कुमार का कहना है कि, '"मेरे पास बैंक में एक भी पैसा नहीं है। मेरी एकमात्र संपत्ति मेरे बच्चे हैं। यूपी में मेरे भाइयों के परिवारों में, कोई भी लड़की स्कूल के बाद पढ़ाई नहीं कर रही है, लेकिन मैंने केरल से बहुत कुछ सीखा है। मेरी बेटी ने 10वीं कक्षा में अच्छे नतीजे हासिल किए हैं, गांव के सभी लोगों ने उसे बधाई दी।''












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