बड़ा खुलासा- नेताजी ने लिया था 1948 के चीन-भारत युद्ध में हिस्सा

लखनऊ। पश्चिम बंगाल सरकार के नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी खुफिया फाइलों के सार्वजनिक किये जाने के बाद कई ऐसे दस्तावेज सामने आये हैं जो बताते हैं कि 1945 के बाद भी नेताजी जिंदा था, यही नहीं एक और बड़ा दस्तावेज भी सामने आया है।

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नेताजी से जुड़े दस्तावेजों से इस बात के भी संकेत मिले हैं कि नेताजी 1948 के चीन युद्ध में भी शामिल थे। नेताजी की जीवन पर किताब लिखने वाले लेखक अनुज धर का दावा है कि जो दस्तावेज सामने आये हैं उसमें नेताजी के चीन के युद्ध के दौरान जिंदा होने के संकेत मौजूद हैं।

अनुज धर ने वनइंडिया से बातचीत के दौरान कई ऐसी बातों का खुलासा किया जो नेताजी की रहस्यमयी मौत से पर्दा उठा सकते हैं।

पश्चिम बंगाल सरकार ने जो दस्तावेज सार्वजनिक किये हैं उसके बारे में आपका क्या मत है?

ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी प्रदेश की सरकार ने कहा है कि नेताजी 1945 के बाद जिंदा थे। जोकि अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। वहीं इन दस्तावेजों में एक और बात सामने आयी है वह यहा है कि नेताजी के बारे में चीन युद्ध के पहलू की भी जांच होनी चाहिए।

मैंने शुरुआत से ही यह दावा किया था कि नेताजी चीन के युद्ध में शामिल थे लेकिन 1945 में नेताजी की मौत की खबर की वजह से मेरे इस दावे को खारिज किया गया। ऐसे में हमें फैजाबाद मे नेताजी के होने की खबर खोजबीन की जरूरत है।

क्या पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले से केंद्र सरकार पर दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का दबााव बनेगा?

इस देश में सिर्फ जनता का दबाव ही काम आता है। देश की सरकार सिर्फ जनता के दबाव को समझती है। निसंदेह इस फैसले के बाद केंद्र सरकार पर दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का दबाव बनेगा।

नेताजी के परिवार की जासूसी के बारे में क्या कहना है आपका?

मेरा मानना है कि सरकार को नेहरू जयंती को मनाने पर रोक लगा देनी चाहिए। यही नहीं सरकार को नेहरू के नाम से NTRO का नाम भी बदल देना चाहिए। नेताजी के परिवार की जासूसी के पीछे मास्टर माइंड नेहरू ही थे। यही नहीं मैं दावे के साथ कह सकता हू कि फाइलों में इस बात की पुष्टि होती है कि नेहरू ने बोस परिवार की जासूसी करवायी थी।

क्या नेताजी की जासूसी कम्युनिस्ट विचारधारा की होने की वजह से हुई थी?

नेताजी कम्युनिस्ट नहीं थे। वह मां काली के भक्त थे, वो रूस के समर्थक थे नाकि कम्युनिस्ट विचारधारा के समर्थक।

आपकी क्या योजना है जिससे केंद्र सरकार दस्तावेजों को सार्वजनिक करे?

हम सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास जारी रखेंगे। हम इस मामले में जनता की राय बनाने की कोशिश में जुटे रहेंगे। मैं ममता सरकार से आग्रह करुंगा कि संसद के अगले सत्र में वह अपने सांसदों से केंद्र से नेताजी की फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग करे।

केंद्र सरकार के पास कितनी फाइलें है, क्या आप इस बात की जानकारी दे सकते हैं?

केंद्र सरकार के पास दो तरह की फाइलें हैं, एक जिसके बारे में हम जानते हैं जबकि दूसरी वो फाइलें जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं। मैं आपको उन फाइलों के बारे में बता सकते हैं जिसे हम जानते हैं। इन फाइलों की संख्या 41 है जोकि प्रधानमंत्री कार्यालय के पास हैं। जबकि 27 फाइले विदेश मंत्रालय के पास हैं। 77 खुफिया विभाग और गृह मंत्रालय के पास हैं, जिसमें कुल 60 हजार पेज हैं। वहीं कुछ रिकॉर्ड ओडीशा सरकार के पास भी है। हालांकि अहम फाइलें पीएमओ और गृह मंत्रालय के पास हैं।

जब आप पीएम मोदी से बोस के परिवार के साथ मिलने जायेंगे तो पीएम को क्या प्रस्ताव देंगे?

हम प्रधानमंत्री से 14 अक्तूबर को मिल रहे हैं। हम उनसे फाइलों को सार्वजनिक किये जाने की अपील करेंगे। साथ ही यह भी गुजारिश करेंगे कि यूके और रूस की सरकार से भी संपर्क साधकर उनसे जुड़ी फाइलों को वापस भारत लाया जाए। हम कोशिश करेंगे कि नेताजी से जुड़े हर दस्तावेज को लोगों के सामने आना चाहिए।

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