देखें तस्‍वीरें-घर पहुंचा शहीद परमजीत का पार्थिव शरीर, परिजनों ने शव लेने से किया इंकार

अमृतसर के नजदीक तरनतारण में नायब सूबेदार परमजीत सिंह का घर है। सोमवार सुबह से ही उनके घर पर लोगों की भारी भीड़ जुटी है।

नई दिल्‍ली। जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सोमवार को पाकिस्तानी हमले में शहीद हुए परमजीत सिंह का शव उनके पैतृक गांव तरनतारण (पंजाब) पहुंच गया है। सेना के हेलीकॉप्‍टर से उनका पार्थिव शरीर तरनतारण लाया गया फिर राजकीय सम्‍मान के साथ गाड़ी में रखकर उनके घर भेजा गया। परमजीत की शहादत पर पूरा गांव शोक में है, वहीं परिजनों का कहना है कि अगर शरीर क्षत-विक्षत हुआ तो अंतिम संस्कार तब तक नहीं करेंगे जब तक खुद पीएम मोदी या सीएम अमरिंदर सिंह उनसे मिलने न आएं।

 हेलीकॉप्‍टर से आया परमजीत का पार्थिव शरीर

हेलीकॉप्‍टर से आया परमजीत का पार्थिव शरीर

अमृतसर के नजदीक तरनतारण में नायब सूबेदार परमजीत सिंह का घर है। सोमवार सुबह से ही उनके घर पर लोगों की भारी भीड़ जुटी है। जिला प्रशासन ने हेलिकोप्टर से शहीद का पार्थिव लाने के लिए उनके गांव में एक हैलीपैड का निर्माण कराया।

 क्‍या कहना है परमीजत के भाई का

क्‍या कहना है परमीजत के भाई का

परमजीत सिंह के भाई ने पार्थिव शरीर लेने से इनकार कर दिया है। तरनतारण में शहीद के भाई रंजीत सिंह ने कहा, उन्हें अपने भाई का क्षत-विक्षत शव नहीं चाहिए। रंजीत सिंह ने कहा, मेरे भाई के लिए न्याय दो। मुझे भाई का पूरा शरीर चाहिए।

शहादत पर गर्व लेकिन सरकार से नाराजगी

शहादत पर गर्व लेकिन सरकार से नाराजगी

शहीद परमजीत सिंह के गांववालों को अपने इस लाडले के शहादत पर गर्व है लेकिन गुस्सा इस बात का है कि सरकार पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब क्यों नहीं दे रही है?

 परमजीत सिंह की बेटी ने क्‍या कहा

परमजीत सिंह की बेटी ने क्‍या कहा

शहीद परमजीत सिंह की बेटी ने कहा है 'मेरे पिता ने देश के लिए शहादत दी है, मुझे उनपर गर्व है।

परमजीत का ख्‍वाब रह गया अधूरा

परमजीत का ख्‍वाब रह गया अधूरा

एक बेटा और दो बेटियों के पिता परमजीत सिंह साल 1995 में देश की सेवा की खातिर सेना में भर्ती हुए थे। सेना की नौकरी के साथ साथ वो अपने परिवार का पूरा ध्यान रखते थे। अपने बच्चों के लिए उन्होंने बड़े बड़े ख्वाब देखे थे लेकिन अफसोस उनका वो ख्वाब अधूरा रह गया है।

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