कोरोना टेस्टिंग के मामले में भारत ने तोड़ा रिकॉर्ड, रोजाना हो रही एक लाख से ज्यादा जांच
नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस के मामले 1.19 लाख के पार पहुंच गए हैं। इसके साथ ही देश में अब तक 3,600 लोगों की जान इस वायरस की वजह से गई है। कोरोना से लड़ाई के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और ICMR पूरी तरीके से तैयार हो चुका है। जिस वजह से अब देश में एक लाख से ज्यादा टेस्ट रोजाना किए जा रहे हैं। इस दौरान प्राइवेट लैब्स भी टेस्टिंग में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर भारत में कोरोना टेस्ट किट का निर्माण शुरू कर दिया गया है। जल्द ही रोजाना पांच लाख किट का उत्पादन किया जा सकेगा।

ICMR के वैज्ञानिक डॉ. गंगाखेडकर के मुताबिक मंगलवार से देश में रोजाना एक लाख से ज्यादा टेस्ट हो रहे हैं। जिस वजह से शुक्रवार दोपहर एक बजे तक देश में 27,55,714 टेस्ट हुए हैं। इस दौरान प्राइवेट लैब्स भी कोरोना से लड़ाई में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जहां अब तक 18287 टेस्ट किए गए हैं। लोगों की जेब पर भार ना पड़े, इस वजह से सरकार की कोशिश कोरोना की ज्याद से ज्यादा जांच ICMR लैब में करवाने की है। इतनी बड़ी संख्या में जांच होने की वजह से ही रोजाना के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इससे पहले अप्रैल में रोजना सिर्फ 20-40 हजार टेस्ट ही हो पाते थे। जिसको लेकर सरकार विपक्षी पार्टियों के निशाने पर रहती थी।
वैक्सीन पर भी काम जारी
वहीं एम्पावर्ड ग्रुप 1 के चेयरमैन डॉ. वीके पॉल ने बताया कि भारत में कोरोना डायग्नोस्टिक किट का निर्माण शुरू हो गया है। अगले 6-8 हफ्ते में हम रोजाना पांच लाख किट का उत्पादन करने लगेंगे। इसके अलावा 5 कंपनियां और 4 से 6 वैज्ञानिकों की टीम कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत में समय से लॉकडाउन नहीं लागू होता तो आज भारत की स्थिति काफी बुरी होती। कई मॉडल से ये बात सामने आ रही है कि देश में कोरोना वायरस से 37-78 हजार मौतें हो सकती थीं, साथ ही 14-29 लाख मामले भी सामने आ सकते थे। सरकार ने सही वक्त पर लॉकडाउन लागू किया, जिस वजह से मामले इतने ज्यादा नहीं बढ़े। उन्होंने कहा कि जब देश में लॉकडाउन शुरू किया गया तो कोरोना वायरस के मामलों का डबलिंग रेट 3.4 दिन था, जो आज 13.3 दिन है। वहीं कोरोना की मृत्युदर में भी पहले से कमी आई है।












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