कर्नाटक: मंकी वायरस ने ली 3 की जान, 15 लोगों में पाया गया वायरस

नई दिल्ली। कर्नाटक के शिमोगा जिले में 15 लोग मंकी फीवर के शिकार पाए गए हैं। इन सभी लोगों के टेस्ट में मंकी फीवर पाया गया। इस बीमारी के चलते शहर के लोगों में जबरदस्त खौफ का माहौल है। दिसंबर से लेकर अबतक इस बीमारी की वजह से 3 लोगों की मौत हो चुकी है। कैसनूर फॉरेस्ट डिजीज को मंकी फीवर के नाम से भी जाना जाता है। अभी तक इस बीमारी ने कुल 15 लोगों को अपना शिकार बनाया है, जिनके टेस्ट सकारात्मक पाए गए हैं।

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प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मंकी फीवर का टीकाकरण किया जा रहा है, यह टीकाकरण अभियान मुख्य रूप से अरालगुडू ग्राम पंचायत में दिसंबर 2018 से चल रहा है, अभी तक इस बीमारी की वजह से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इलाके में एक बंदर की मौत के बाद यह बीमारी सामने आई थी, जिसके तुरंत बाद ही पांच किलोमीटर के दायरे में टीकारण अभियान शुरू कर दिया गया है। यही नहीं प्रशासन की ओर से इलाके में जो भी लोग बीमार हुए हैं उनपर नजर रखी जा रही है।

जिला प्रशासन की ओर से लोगों को निर्देश जारी किया गया है कि अगर कहीं किसी बंदर की मौत होती है तो उसके 50 मीटर तक कोई नहीं जाए। आपको बता दें कि मंकी फीवर मुख्य रूप से हनुमान लंगूर और बंदरों की एक और प्रजाति मकाका रैडियाटा से फैलता है। इनके काटने से यह बीमारी अन्य लोगों में फैलती है। यह वायरस सबसे पहले 1957 में कर्नाटक कैसनूर जंगल इलाके में पाया गया था। इसकी वजह से सैकड़ों बंदरों की मौत हो गई थी। इस बीमारी की वजह से ना सिर्फ बंदरों बल्कि लोगों की भी मौत हुई थी।

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