'राम मंदिर बनाने से कोई हिंदू नेता नहीं बन जाता', RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान के मायने?
RSS chief Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने पुणे में गुरुवार (19 दिसंबर) को कहा कि 'राम मंदिर बनाने से कोई हिंदू नेता नहीं बन जाता'। मोहन भागवत ने ये बात एक व्याख्यान श्रृंखला में 'विश्वगुरु भारत' पर भाषण देने के दौरान कही थी।
मोहन भागवत ने देश में सद्भाव का एक ऐसा मॉडल विकसित करने की बात कही, जिसे दुनिया अपना सके। मोहन भागवत ने कहा, "राम मंदिर हिंदुओं की आस्था का विषय है...हिंदुओं का मानना है कि राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए। लेकिन ऐसा करने से कोई हिंदू नेता नहीं बन जाता।"

मोहन भागवत बोले- 'हम विश्वगुरु बनने की बात करते हैं, न कि 'महाशक्ति' बनने की'
मोहन भागवत ने कहा, "हम 'विश्वगुरु (वैश्विक नेता)' बनने की बात करते हैं, न कि 'महाशक्ति (महाशक्ति)' बनने की। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमने देखा है कि महाशक्ति बनने के बाद लोग कैसे व्यवहार करते हैं। वर्चस्व की खातिर स्वार्थी लाभ हासिल करना हमारा रास्ता नहीं है..."
रामकृष्ण मिशन में आज भी 25 दिसंबर को मनाए जाने का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा, ''हम ऐसा कर सकते हैं क्योंकि हम हिंदू हैं।'' मोहन भागवत ने कहा कि बाहर से कुछ ताकतों की "चरमपंथी परंपरा" है।
मोहन भागवत ने आगे कहा, "अतीत के बोझ तले दबे रहना, घृणा, द्वेष, दुश्मनी, संदेह का सहारा लेना और रोजाना ऐसे नए मुद्दे उठाना ठीक नहीं होगा...आखिरकार, हमारा समाधान क्या है? हमें दुनिया को दिखाना होगा कि हम इसे एक साथ कर सकते हैं...कई संप्रदाय और विचारधाराएं हैं जो सभी को समायोजित करती हैं...।''
मोहन भागवत के बयान के क्या है मायने?
मोहन भागवत के बयान को लेकर कुछ राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) से नाराज हैं। कई बार यह सवाल उठ चुका है कि RSS और भाजपा के बीच रिश्ते एक जैसी दिशा में नहीं चल रहे हैं। 'राम मंदिर बनाने से कोई हिंदू नेता नहीं बन जाता' मोहन भागवत का ये बयान सोशल मीडिया पर चर्चाओं में है। सोशल मीडिया पर कई यूजर ने कहा है कि मोहन भागवत का ये बयान भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं की ओर इशारा कर रहा है।
RSS की नीति और दृष्टिकोण के मुताबिक संगठन हमेशा ही भारतीय संस्कृति, समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण के कामों पर ध्यान केंद्रित करता है। इस दृष्टिकोण से भाजपा की नीति और रणनीतियों का मेल होना आवश्यक होता है। हालांकि, हाल के महीनों में कुछ ऐसे मुद्दे उभरकर सामने आए हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि शायद मोहन भागवत और भाजपा नेतृत्व के बीच कुछ असहमतियां हो सकती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों ही भाजपा के सबसे बड़े नेता माने जाते हैं, जिनकी ताकत और लोकप्रियता पार्टी के लिए अहम है। पीएम मोदी की विकास की नीति और योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश में 'विकास' की दिशा के बावजूद, कभी-कभी RSS के दृष्टिकोण और भाजपा के कार्यों में अंतर देखने को मिलता है। इसलिए कहा जा रहा है कि मोहन भागवत के इस बयान का इशारा भाजपा के शीर्ष नेताओं के लिए है।
मोहन भागवत बोले- विदेशी ताकतों को लगता है कि यहां शासन फिर स्थापित हो जाएगा
मोहन भागवत ने कहा कि बाहर से कुछ ताकतों की "चरमपंथी परंपरा" है। उन्होंने कहा, "उन्होंने अतीत में देश पर शासन किया है। उन्हें लगता था कि उनका शासन फिर से यहां स्थापित हो जाएगा। लेकिन देश संविधान से चलता है। यहां कोई और शासन नहीं कर सकता। लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं और वे देश पर शासन करते हैं।"
उन्होंने कहा, "हमें अतीत के संघर्षों को भूलकर समावेशी होना चाहिए...यही हमारी संस्कृति हमें सिखाती है। लेकिन समय-समय पर इस प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने के प्रयास किए गए...आखिरी लेकिन एकमात्र प्रयास औरंगजेब ने दारा शिकोह को नष्ट करके आत्मसात करने की प्रक्रिया को रोकने के लिए किया, जिसके परिणामस्वरूप एक चरमपंथी शासन का उदय हुआ।"












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