'राम मंदिर के बाद अब काशी-मथुरा'—मोहन भागवत का बड़ा बयान, RSS स्वयंसेवक को दी खुली छूट
RSS chief Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने दिल्ली में संघ की शताब्दी व्याख्यान श्रृंखला के तीसरे और आखिरी दिन बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि संघ तो किसी आंदोलन में सीधे तौर पर नहीं जाएगा, लेकिन काशी और मथुरा को लेकर अगर आंदोलन होता है तो स्वयंसेवक उस आंदोलन से जुड़ने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं।
मोहन भागवत ने संकेत दिया कि संघ इस मांग का समर्थन करता है कि वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में ईदगाह स्थल हिंदुओं को दिए जाएं। मोहन भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक इन स्थलों के लिए किसी भी आंदोलन से जुड़ने के लिए स्वतंत्र हैं, और दूसरा पक्ष अपने दावे छोड़कर जवाब दे सकता है क्योंकि यह "सिर्फ तीन का मामला" है।

गुरुवार (28 अगस्त) को संघ की व्याख्यान श्रृंखला 'संघ की यात्रा के 100 वर्ष - नए क्षितिज' का समापन हुआ और मोहन भागवत ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों द्वारा भेजे गए 218 प्रश्नों के उत्तर दिए है।
🔴 मोहन भागवत बोले- "सिर्फ तीन जगह की बात है"
मोहन भागवत ने कहा -
"आंदोलन में संघ नहीं जाता। एकमात्र आंदोलन राम मंदिर का था जिससे हम जुड़े और उसे आखिर तक ले गए। अब बाकी आंदोलनों में संघ नहीं जाएगा। लेकिन हिंदू मानस में काशी, मथुरा और अयोध्या का विशेष महत्व है। दो जन्मभूमि हैं और एक निवास स्थान। हिंदू समाज इसकी मांग करेगा। संघ आंदोलन में नहीं जाएगा, लेकिन स्वयंसेवक जा सकते हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम समाज को भी भाईचारे के लिए आगे आना चाहिए और स्वेच्छा से ये स्थल हिंदुओं को सौंपने चाहिए। मोहन भागवत ने कहा, "अगर मैं, एक हिंदू संगठन का प्रमुख होकर, यह कह सकता हूं तो दूसरी तरफ से भी थोड़ा प्रयास होना चाहिए। आखिर यह तो सिर्फ तीन जगहों की बात है। अगर वे कह दें कि ले लो, तो यह भाईचारे के लिए बहुत बड़ा कदम होगा।"
🔴 2019 में अलग था मोहन भागवत रुख
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2019 में मोहन भागवत ने कहा था कि संघ अब किसी आंदोलन में नहीं जाएगा और केवल चरित्र निर्माण पर ध्यान देगा। उस समय यह माना गया था कि संघ काशी और मथुरा के मुद्दों पर पीछे हट रहा है। लेकिन इस बार उनके बयान से साफ संकेत मिल रहे हैं कि राम मंदिर के बाद काशी और मथुरा पर भी हिंदू समाज के दावे को संघ का परोक्ष समर्थन है।
🔴 'भाजपा के फैसले संघ नहीं करता है'
भागवत ने इस दौरान संघ और बीजेपी के रिश्तों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा -"यह बिल्कुल गलत है कि संघ बीजेपी के लिए फैसले करता है। मैं शाखा चलाता हूं, वह मेरा काम है। वे राज्य चलाते हैं, वह उनका काम है। सलाह हम दे सकते हैं, लेकिन फैसला उनका होता है।"
बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव में हो रही देरी पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा -"अगर हम तय करते तो इतना समय लगता क्या?"
🔴 संघ परिवार के भीतर मतभेद भी, मोहन भागवत बोले- 'कभी-कभी सब एक मत नहीं हो पाते'
भागवत ने स्वीकार किया कि संघ परिवार के भीतर भी मतभेद रहते हैं। श्रमिक संगठन और लघु उद्योग संगठन अक्सर आमने-सामने रहते हैं। उन्होंने कहा -"कभी-कभी सभी संगठन, पार्टी और सरकार एक मत नहीं हो पाते। तब हम कहते हैं कि आप अपने रास्ते चलो। अगर परिणाम सही मिला तो अच्छा होगा।"
🔴 अन्य मुद्दों पर मोहन भागवत के बयान
🔹75 साल में रिटायरमेंट की चर्चा: भागवत ने साफ किया कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि वे 75 की उम्र में रिटायर होंगे। "RSS में हमें काम दिया जाता है, चाहे चाहें या न चाहें। अगर 80 की उम्र में मुझे शाखा चलाने को कहा जाएगा तो करना ही होगा।"
🔹 भारत एक है (अखंड भारत): मोहन भागवत ने कहा कि जिन्होंने देश का विभाजन किया, वे आध्यात्मिक और आर्थिक रूप से सफल नहीं हुए।
🔹 कानून और पारदर्शिता: मोदी सरकार के नए विधेयक पर उन्होंने कहा कि नेतृत्व पारदर्शी होना चाहिए और संसद ही इस पर निर्णय लेने की सही संस्था है।
🔹 विपक्ष के साथ संबंध: भागवत ने कहा कि संघ किसी को बहिष्कृत नहीं मानता। "हमारी तरफ से कोई रुकावट नहीं है, रुकावट उनकी तरफ से है।"












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