NDA Government: पहली बार गठबंधन के भरोसे मोदी सरकार, क्या अटल जी के कार्यकाल से लेंगे सीख?
NDA Government: नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। हालांकि यह पहली दफा होगा, जब मोदी गठबंधन के सहयोगी दलों के भरोसे सरकार चलाएंगे। इसी के साथ अतीत के पन्नों को पलटे तो साल 1996 में 10वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले अटल बिहारी वाजपेयी ने भी तीन बार गठबंधन की सरकार चलाई थी।
हालांकि 2014 और 2019 में भी केंद्र की मोदी सरकार गठबंधन की सरकार थी, लेकिन भाजपा अपने दम पर बहुमत हासिल करते हुए एक मजबूत दल के रूप में उभरा था। दूसरी तरफ इस बार के लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा बहुमत का आंकड़ा यानी 272 को नहीं छू पाई और गठबंधन सहयोगी के भरोसे सरकार चलाएगी।

लगातार दो बार भाजपा को अकेले बहुमत
2014 से 2024 यानी 10 सालों तक उन्हें अपने दम पर सरकार बनाने वाली बीजेपी को 2014 में 282 सीटें मिली थी और 2019 में 303 सीटें हासिल हुईं, जो कि बहुमत से काफी ज्यादा थीं। लेकिन नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में यह पहला मौका है, जब भाजपा को बहुमत से 30 सीटें कम मिली हैं।
वाजपेयी से क्या पीएम मोदी लेंगे सीख?
हालांकि एनडीए के सहयोगी दल एकजुट हैं और भाजपा का साथ देते हुए नरेंद्र मोदी की लीडरशिप में तीसरी बार सरकार बनाने की पूर्ण सहमति दी है। ऐसे में तीन बार गठबंधन की सरकार चलाने अटल बिहारी वाजपेयी से क्या पीएम मोदी सीख लेंगे।
सीख की बात इसलिए क्योंकि उस वक्त वाजपेयी सरकार में भी टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू और जेडीयू के नीतीश कुमार एनडीए के भरोसेमंद साथी थे। इस बार भी गठबंधन की सरकार बनने जा रही है, इसलिए इन दोनों सहयोगियों का ना सिर्फ अहम योगदान है, बल्कि सरकार में उनकी भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहने की आशा है।
वाजपेयी के वक्त हुआ था एनडीए का गठन
आपको बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी ने तीन बार गठबंधन की सरकार चलाई थी। उनके ही कार्यकाल के दौरान एनडीए का गठन हुआ था। पहली दफा उन्होंने साल 1996 में पीएम पद की शपथ ली, लेकिन दुर्भाग्य बहुमत के आंकड़े से दूर होने की वजह से सरकार सिर्फ 13 दिनों तक ही चल पाई।
इसके बाद उनका दूसरा कार्यकाल 1998 से 1999 तक यानी 13 महीने तक चला। हालांकि अटल जी ने अपना तीसरा कार्यकाल पूरा किया। साल 1999 से 2004 तक पूरे 5 साल के लिए सरकार चलाई।
अटल सरकार में सहयोगी दलों से थे 29% मंत्री
वहीं अगर पहले कार्यकाल यानी 13 दिनों की सरकार की बात ना करते हुए अन्य दो कार्यकालों में अटल सरकार में सहयोगी दलों से 25 से 29 फीसदी तक मंत्री बनाए गए थे। साल 1998 के वक्त बनी सरकार के अंदर 86 लोगों को मंत्रिमंडल में तरजीह मिली थी, जिसमें 25 मंत्री सहयोगी दलों से थे।
ऐसे ही तीसरी बार के कार्यकाल में 73 सदस्यीय मंत्रिमंडल में 18 मंत्री पद सहयोगी दलों को जगह मिली थी। जो कि गठबंधन दलों की भागीदारी का 25 प्रतिशत था। वाजपेयी सरकार (1998) में नीतीश कुमार रेल मंत्री बने थे। जबकि तीसरे कार्यकाल (1999) में कृषि विभाग नीतीश कुमार और रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी नीतीश की पार्टी के नेता जॉर्ज फर्नांडीस को मिली थी।
दो बार की मोदी सरकार में नहीं मिला मौका
याद दिला दें कि पिछले दो कार्यकाल में मोदी सरकार ने सहयोगियों को हाशिए पर रखा था या यूं कहें कि उनकी भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। गठबंधन का बड़ा सहयोगी दल जेडीयू के नीतीश कुमार दो मंत्री पद की मांगे थे, लेकिन नहीं मिला।पहले कार्यकाल में सात प्रतिशत मंत्री सहयोगी दलों के शामिल थे तो दूसरे कार्यकाल में 7 फीसदी से घटकर तीन प्रतिशत पर आ गई। 2014 में मोदी कैबिनेट में 71 मंत्री थे, जिनमें मात्र पांच ही मंत्री गठबंधन दलों से थे। ऐसे ही दूसरे कार्यकाल 2019 में 20 सहयोगी दलों के 52 सांसद थे, लेकिन महज दो सांसदों को जगह मिली थी।












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