मोदी सरकार का डिप्टी सेक्रेटरी लेवल के एक तिहाई पद बाहर से भरने का प्लान
नई दिल्ली: मोदी सरकार संयुक्त सचिव स्तर के पद में बाहरी एक्सपर्ट की भर्ती के बाद डिप्टी सेक्रेटरी लेवल के पदों पर भी बाहरी लोगों को लाने की योजना पर काम कर रही है। केंद्र सरकार प्रशासन में दक्षता बढ़ाने और विशेषज्ञता के लिए डिप्टी सेक्रेटरी लेवल स्तर के एक तिहाई पद बाहर से भर सकती है। इससे पहले केंद्र सरकार ने पिछले साल ज्वाइंट स्तर के 9 पद लेटरल एंट्री द्वारा भरे थी। यूनियन सर्विस कमीशन ये भर्ती की थी।

'3 जून को हुई बैठक'
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक सूत्रों ने कहा है कि 3 जून को सचिव (कार्मिक) ने अपने विभाग की बैठक ली थी। इसमें उन्होंने केंद्रीय कार्मिक योजना (सीएसएस) में डीएस / निदेशक पदों को भरने के लिए एक प्रस्ताव तैयार करने को कहा था। इस प्रस्ताव के तहत प्राइवेट सेक्टर के करीब 400 विशेषज्ञों को सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम(सीसीएस) के तहत डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर के पद भरने के लिए कहा है।

'डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर के पद पर आएंगे बाहरी लोग'
केंद्र सरकार में सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत डिप्टी सेक्रेटरी और डॉयरेक्टर स्तर के कुल 650 पद हैं। ऐसे में यहां एक तिहाई बाहरी विशेषज्ञों की भर्ती का मतलब है कि प्रशासन के महत्वपूर्ण पदों पर 60 फीसदी निजी सेक्टर का कब्जा हो जाएगा। गौरतलब है कि अभी तक ये सयुंक्त सचिव और डायरेक्टर जैसे पदों पर भर्ती भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के जरिए होती है। वहीं डिप्टी सेक्रेटरी और डायरेक्टर के पद प्रमोशन के जरिए भरे जाते हैं। फिलहाल सरकार इन पदों को बाहरी लोगों से नहीं भर सकती है। इसके लिए सरकार को केंद्रीय सचिवालय रुल्स 2009 में बदलाव करना होगा

'नीति आयोग के पदों में बाहरी लोगों की एंट्री'
मोदी सरकार अपने थिंक टैंक नीति आयोग में कुल 516 पदों में से 54 पदों पर बाहरी विशेषज्ञों की नियुक्ति पर विचार कर रही है। इन पदों को 'फ्लेक्सी-पूल पोस्ट' के रूप में मान्यता प्राप्त है। आमतौर पर नीति आयोग इन पदों पर जरूरते के अनुसार सलाहकार नियुक्त करता है। पिछले अप्रैल में सरकार की भर्ती एजेंसी यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन(यूपीएससी) ने विभिन्न विभागों में ज्वाइंट सेक्रेटरी के स्तर पर 9 लेटरल नियुक्ति की थी। इन 10 पदों पद सरकार को 6,077 आवेदन मिले थे।












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