CORONA: हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के बाद अब सैनिटाइजर के निर्यात पर मोदी सरकार ने लगाया प्रतिबंध
नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। देश में अब तक 49 हजार लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, जबकि 1698 लोगों की जान इस बीमारी ने ली है। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने 17 मई तक लॉकडाउन का ऐलान किया है। WHO की गाइडलाइन के मुताबिक साबुन से हाथ धोने या एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर के इस्तेमाल से ही कोरोना का खात्मा हो सकता है। देश में सैनिटाइजर की कमी ना हो, इस वजह से सरकार ने इसके निर्यात पर रोक लगा दी है।

दरअसल देश में कोरोना का पहला मामला सामने आते ही लोग सैनिटाइजर पर टूट पड़े। ब्रांडेड कंपनियों के सैनिटाइजर बाजार से कब गायब हुए पता ही नहीं चला। इसके बाद लॉकडाउन-1 के दौरान मोदी सरकार ने देश में सभी सैनिटाइजर बनाने वाली कंपनियों में उत्पादन शुरू करवाया। अब धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ने पर देश में सैनिटाइजर की कमी दूर हो रही है। वहीं मामले में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है। जिसके तहत सैनिटाइजर के निर्यात पर अस्थायी तौर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बिना सरकार की इजाजत के कोई भी कंपनी दूसरे देश को सैनिटाइजर नहीं बेच पाएगी। वहीं इससे पहले कोरोना मरीजों की जान बचाने में अहम रोल निभाने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया था।
इस वजह से कारगर है सैनिटाइजर
कोरोना समेत ज्यादातर वायरस आएनए, प्रोटीन और लिपिड से मिलकर ब्लॉक्स के रूप में बने होते हैं। हालांकि, इन तीनों का आपस में जुड़ाव बहुत ही कमजोर होता है। इनमें लिपिड की भूमिका सबसे अहम होती है, जो तीनों को आपस में जोड़े रहता है, लेकिन ये भी सच है कि लिपिड की वजह से ही वायरस का बाहरी हिस्सा सबसे कमजोर रहता है। ये तीनों मिलकर खतरनाक वायरस का काम करते हैं, क्योंकि इनकी आपसी संरचना बहुत ही कमजोर होती है, इसीलिए इन्हें अलग-अलग करके नष्ट करने के लिए भी ज्यादा शक्तिशाली केमिकल की जरूरत नहीं है। साबुन या एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर से ये आसानी से नष्ट हो जाते हैं।












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