दिल्ली पर अध्यादेश लाने को राजी क्यों हुई मोदी सरकार, दुनिया के इन देशों का रहा खास प्रभाव?

दिल्ली के शासन में 'सेवा' मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार जो अध्यादेश लेकर आई है, उसपर दुनिया के देशों की राजधानियों के शासन मॉडल का प्रभाव है।

ordinance on Delhi

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दिल्ली के शासन पर जो अध्यादेश लागू किया है, उसपर दुनिया के कई देशों की राजधानियों के शासन मॉडल का प्रभाव है। दिल्ली राज्य होते हुए भी एक केंद्र शासित प्रदेश है; और यह राष्ट्रीय राजधानी भी है, जिससे पूरे देश का हित जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि अध्यादेश लाने से पहले केंद्र ने काफी पड़ताल की है।

कई देशों की राजधानियों के शासन मॉडल का असर
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दिल्ली के प्रशासन पर 'सर्विसेज' से जुड़े विषयों में उपराज्यपाल की शक्तियों को असरदार बनाने के लिए जो अध्यादेश का रास्ता अपनाया है, वह दुनिया के चुनिंदा देशों की राजधानियों के शासन मॉडल से प्रभावित है।

राजधानियों पर केंद्र या संघ सरकार का प्रभाव ज्यादा
जितने भी अंतरराष्ट्रीय मॉडलों का अध्ययन किया गया है, वहां कैपिटल सिटी या राजधानी को प्रमुख रूप से केंद्र या संघ सरकार के ही नियंत्रण में रखा गया है। इसका मकसद, शासन के विभिन्न अंगों में पुख्ता तालमेल, राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को सुनिश्चित करना है।

वाशिंगटन डीसी सीधे संघीय सरकार के अधीन
केंद्र सरकार के अध्यादेश में मोटे तौर पर जिन देशों की राजधानियों के शासन की प्रक्रिया का प्रभाव है, उनमें अमेरिका की वाशिंगटन डीसी, जर्मनी की बर्लिन, फ्रांस की पेरिस, कनाडा के ओटावा और ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा जैसी राजधानियां शामिल हैं। उदाहरण के लिए वाशिंगटन डीसी सीधे संघीय सरकार के अधीन है। वहां कोई चुनी हुई सरकार नहीं है। अलबत्ता एक मेयर जरूर होता है।

बर्लिन भी संघीय सरकार की अथॉरिटी के अधीन
इसी तरह जर्मनी की राजधानी बर्लिन भी संघीय सरकार की अथॉरिटी के अधीन है। यहां अपनी एक प्रदेश सरकार है, लेकिन सिक्योरिटी, विदेश मामले और बाकी सभी नीतिगत मामलों में संघीय सरकार की भूमिका प्रमुख है।

पेरिस में क्षेत्रीय सरकार स्थानीय प्रशासन-सांस्कृतिक मामलों तक सीमित
फ्रांस की राजनधानी पेरिस का मॉडल थोड़ा-बहुत दिल्ली की तरह है। इसका शासन केंद्र सरकार और रीजनल अथॉरिटी दोनों के हाथों में है। सभी प्रमुख मामलों, जैसे कि सिक्योरिटी, ट्रांसपोर्ट और शहरी विकास की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार के पास है। क्षेत्रीय सरकार का उत्तरदायित्व सिर्फ स्थानीय प्रशासन और सांस्कृतिक मामलों तक सीमित रखी गई है।

कैनबरा पर नियंत्रण संघीय सरकार का
ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरिटरी (एसीटी) में स्थित है। लेकिन, कैनबरा पर नियंत्रण संघीय सरकार का है। एसीटी का भी अपना शासन है, लेकिन केंद्र सरकार की भूमिका प्रमुख क्षेत्रों में प्रभावी है, जैसे कि शासन, योजना और सभी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट।

ओटावा में भी संघीय सरकार की भूमिका प्रमुख
वहीं कनाडा की राजधानी ओटावा का प्रशासन भी प्रमुख रूप से वहां की संघीय सरकार ही चलाती है। केंद्र और दिल्ली प्रदेश सरकार में अलग-अलग दलों की सरकारें पहले भी रह चुकी हैं, लेकिन इतनी कटुता कभी नहीं देखी गई थी, जितनी अभी देखी जा रही है।

धमकियां और प्रताड़ना की शिकायत
रिपोर्ट के मुताबिक 16 मई को दिल्ली में सचिव (सर्विसेज) ने मुख्य सचिव से शिकायत की थी कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला आने के बाद राज्य के मंत्रियों की ओर से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और धमकियां मिल रही हैं।

एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है, इसलिए दिल्ली के प्रशासन पर उसका नियंत्रण रहने से राजधानी शहर होने के नाते उससे जुड़े सुरक्षा उपायों को प्रभावी तरीके से तालमेल के साथ लागू किया जा सकता है।

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    उनका यहां तक कहना था कि सच तो यह है कि जब दिल्ली को 1991 में संविधान संशोधन के जरिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घोषित किया गया था, तभी यह अवधारणा स्पष्ट कर दी गई थी कि क्योंकि दिल्ली में संघ सरकार है, इसका दोहरा अधिकार और उत्तरदायित्व नहीं हो सकता।

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