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मोदी सरकार 2.0 में काले धन पर एक्शन का हाल, जानिए अघोषित विदेशी संपत्ति से कितना मिलेगा?

केंद्र सरकार ने पिछले चार साल दौरान काला धन के मूल्यांकन को लेकर कुल 349 आदेश जारी किए।

Prime Minister Narendra Modi

Government action against Black Money: विदेशों में पड़ा भारत का काला धन देश लाने की मांग पिछले कई वर्षों से की जाती है। समय- समय पर केंद्र सरकार ऐसे संपत्तियों पर एक्शन भी लेती रही है। चूंकि मामला विदेशों से जुड़ा होता है,ऐसे में कई अंतर्राष्ट्रीय पेंच भी होते हैं। इन सबके बावजूद पिछले चार वित्तीय वर्षों के भीतर केंद्र से कई मामलों में एक्शन लिया है। इस हफ्ते सोमवार को सदन में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मौजूदा केंद्र सरकार द्वारा काला धन और अघोषित विदेशी संपत्ति पर लिए गए एक्शन का ब्यौरा दिया। सदन में उन्होंने बताया कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अब तक कितने काले धन के मामलों में किस तरह की कार्रवाई की गई है।

केंद्र ने जुटाई 13,566 करोड़ की कर मांग
केंद्र सरकार ने काला धन कानून के तहत चार वित्तीय वर्षों में 13,566 करोड़ रुपये की कर मांग जुटाई है। केंद्र ने संसद में बताया कि 2018-19 के वित्तीय वर्ष से मौजूदा वित्तीय वर्ष तक कुल 349 मूल्यांकन आदेश पारित किए गए। सरकार ने इसी हफ्ते सोमवार को संसद में कहा कि आयकर विभाग ने अघोषित विदेशी आय और संपत्ति से निपटने के लिए काले धन कानून के तहत पिछले चार वित्तीय वर्षों के दौरान 13,566 करोड़ रुपये की कर मांग की है।

पिछले साल 5,350 करोड़ रुपये की कर मांग
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि 2021-22 में 183 मूल्यांकन आदेश पारित किए गए और काले धन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) के तहत 5,350 करोड़ रुपये की मांग की गई। मंत्री ने यह भी बताया कि 4,164 करोड़ रुपये की अघोषित विदेशी संपत्ति से जुड़े 648 खुलासे एकमुश्त अनुपालन विंडो के तीन महीनों के दौरान किए गए थे, जो 30 सितंबर, 2015 को काला धन कर अधिनियम, 2015 के तहत बंद हो गया था। ऐसे मामलों में कर और जुर्माने के रूप में एकत्र की गई राशि लगभग 2,476 करोड़ रुपये थी।

कैसे बनता है काला धन?
इस तरह का धन अवैध तरीकों जैसे कि मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और आतंकवाद अर्जित किए जाते हैं। काला धन देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित करता है। अवैध साधनों-संसाधनों का इस्तेमाल जैसे अपहरण, तस्करी, नशीली दवाएं, अवेध खनन, जालसाजी, घोटालों, भ्रष्टाचार जैसे रिश्वतखोरी और चोरी से इस तरह के धन अर्जित किए जाते हैं। चूंकि इस तरह के धन अर्जन किसी पंजीकृत व्यवसाय, नौकरी या फिर उद्यम के अंतर्गत नहीं होता। ऐसे में इस पर टैक्स भी नहीं भरा जा सकता। काले धन की उत्पत्ति का दूसरा स्त्रोत है कर बचाने के लिए आय की जानकारी विभाग को नहीं देना। ऐसे में सरकार की दृष्टि में इस तरह के धन को काला धन माना गया है।

काला धन से अर्थव्यवस्था पर असर
अवैध तरीकों से अर्जित धन को काला धन या ब्लैक मनी (Black Money) कहते हैं। या फिर वो धन जो कर योग्य होते हुए भी टैक्स ना दिया गया हो। ऐसे धन को काला धन की श्रेणी में रखा जाता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनांस एंड पॉलिसी (NIPFP) के अनुसार, 'काला धन वह राशि है जिस पर कर की देनदारी तो बनती है लेकिन उसकी जानकारी कर विभाग को नहीं दी जाती है।'

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