मोदी के पीएम बनने से देश बर्बाद होगा तो मनमोहन ने क्या किया?

मोदी पर मनमोहन के बयान के बाद यूपीए शासन काल और मनमोहन सिंह की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाये जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि अगर मोदी के पीएम बनने से पहले ही उन्हें 'विपदा' कहा जा रहा है तो मनमोहन का कार्यकाल कौन सा किसी विपदा से कम रहा है। वह मुजफ्फरनगर में हुए नरसंहार को रोंक नहीं सके? असम में 2012 के दौरान उपजे विवाद को रोंकने के लिए उन्होने क्या किया ? जब पाकिस्तान के सैनिकों ने भारत के जवानों के सर काटे तो उन्होने पाक को क्या सख्त संकेत दिया? अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने माना कि वह महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को रोंकने के लिए कुछ भी नहीं कर सके। ऐसे में क्या ये दस वर्ष देश के लिए एक 'विपदा' नहीं रहे।
सच तो यह है कि मनमोहन सिंह ने जनता की सांत्वना पाने के लिए मोदी को निशाना बनाया पर ऐसा कर वह खुद पर ही सवाल खड़े कर गये। उन्होने आम आदमी पार्टी पर कुछ भी नहीं बोला जो कि कांग्रेस के लिए एक बड़ी मुश्किल लेकर आयी। अब तो यह कहा जा रहा है कि मोदी के प्रति पीएम का यह रूख कांग्रेस की फ्रस्टेशन और हार चार राज्यों में हार के दर्द को दिखा रहा है। मोदी देश का नेतृत्व करेंगे या नहीं इसका फैसला तो समय आने पर होगा लेकिन मनमोहन सिंह का कार्यकाल कभी सफल नहीं कहा जा सकता है।
कहा जा सकता है कि कांग्रेस के पास सांप्रदायिकता ही एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर वह मोदी को घेर सकती है बाकी गुजरात में मोदी के दस वर्ष उन्हें किसी भी यूपीए नेता से बेहतर ही साबित करते हैं।












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