Mizoram Election Results 2018: कुछ इस तरह से मिजोरम में भाजपा ने खोला खाता
नई दिल्ली। पूर्वोत्तर राज्यों में एकमात्र राज्य मिजोरम में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन यहां हार के साथ ही कांग्रेस का पूर्वोत्तर राज्यों से सूपड़ा साफ हो गया। कांग्रेस यहां सिर्फ 5 सीटों पर जीत हासिल कर सकी। लेकिन इस चुनाव में सबसे बड़ी बात यह है कि पहली बार भारतीय जनता पार्टी को यहां एक सीट पर जीत मिली और इसके साथ ही पार्टी ने पहली बार मिजोरम में अपना खाता खोला है। मिजोरम में खुद भाजपा को इस बात का अंदाजा नही था कि पार्टी का यहां खाता खुल सकता है।

1993 से लड़ रही है चुनाव
भाजपा मिजोरम में 1993 से चुनाव लड़ रही है, लेकिन पार्टी इस बार के चुनाव से पहले कभी भी अपना खाता नहीं खोल सकी। लेकिन प्रदेश की 40 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने पहली बार अपना खाता खोला है। भाजपा के उम्मीदवार बुद्धा धन चकमा भाजपा के टिकट पर पहली बार त्युचांग से चुनाव जीतने में सफल हुए है। इससे पहले बुद्धा 2013 में कांग्रेस की सीट से चुनाव जीते थे। लेकिन अगस्त माह में उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया था। दरअसल चकमा समुदाय के चार मेधावी छात्रों को सरकारी कोटे पर मेडिकल सीट पर दाखिला देने से कांग्रेस सरकार ने इनकार कर दिया था, ये सभी छात्र अल्पसंख्यक समुदाय चकमा से आते है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ बुद्धा ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे। ये छात्र प्रदेश के छात्र ईकाई मिजो जिरलई पॉल के सदस्य थे। उस वक्त बुद्धा कांग्रेस सरकार में चकमा समुदाय से एकमात्र मंत्री थे।
भाजपा विरोध के बीच जीत
गौर करने वाली बात है कि मिजोरम मुख्य रूप से ईसाई बाहुल्य राज्य है और यहां भाजपा के खिलाफ लोगों में काफी नाराजगी है। ऐसे में किसी को भी इसकी उम्मीद नहीं थी कि त्यूचॉग में भाजपा जीत दर्ज कर सकती है। हालांकि कुछ समय से आरएसएस यहां बौद्ध धर्म समुदाय के लोगों बीच काम कर रही थी। गौर करने वाली बात है कि पहली बार भाजपा ने यहां 39 सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। जबकि 2013 में पार्टी ने 17 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे।
स्थानीय दलों के साथ गठबंधन
भाजपा मिजोरम में जीत के लिए मुख्य रूप से अल्पसंख्यक वोटों पर निर्भर थी और वह मारा समुदाय को भी अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही थी। 2017 में मारालैंड डेमोक्रैटिक फ्रंट ने 2003 और 2008 में एक सीट पर जीत दर्ज की थी। लेकिन 5 नवंबर को चुनाव से महज एक महीने पहले भाजपा ने के दिग्गज नेता हिफेई के साथ गठबंधन किया। जिसके बाद वह भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे । आपको बता दें कि वह पलक से कांग्रेस विधायक थे और पिछली विधानसभा में स्पीकर भी थे। हालांकि ताजा जानकारी के अनुसार हिफेई कांग्रेस और एमएनएफ से पीछे चल रहे हैं।
सियासी रणनीति
आपको बता दें कि मिजोरम के चुनाव में एमएनएफ ने सीधी जीत दर्ज की है और वह भाजपा की क्षेत्रीय ईकाई का नॉर्थ इस्ट डेमेक्रैटिक अलायंस यानि नेडा का ही हिस्सा है। हालांकि भाजपा ने खुद को नेडा से अलग बताया। लेकिन नेडा की आखिरी बैठक में खुद अमित शाह ने शिरकत की थी, जोकि गुवाहाटी में हुई थी। इस बैठक से एमएनएफ के मुखिया पू जोरामथंगा ने दूरी बना ली थी और ना ही किसी प्रतिनिधि को यहां भेजा था। एमएनएफ चीफ का कहना है कि नेडा एनडीए का ही हिस्सा है और हम भी उसका हिस्सा हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव में हमारे बीच कोई गठबंधन नहीं है, हम भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।
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