अब दुश्मनों के दांत होंगे खट्टे, भारतीय नौसेना में शामिल होगा मिसाइल विध्वंसक विशाखापत्तनम और पनडुब्बी वेला
अपनी मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना अपने बेड़े में एक मिसाइल विध्वंसक और कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी शामिल करेगी।
नई दिल्ली, 16 नवंबर। अपनी मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना अपने बेड़े में एक मिसाइल विध्वंसक और कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी शामिल करेगी। नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल सतीश नामदेव घोरमेडे ने कहा कि मिसाइल विध्वसंक युद्धपोत विशाखापत्तनन को 21 नवंबर को जबकि पनडुब्बी वेला को 25 नवंबर को नौसेना में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन युद्धपोतों के शामिल होने के बाद जल्द ही दिसंबर की शुरुआत में सर्वे वेसल लार्ज प्रोजेक्ट, संध्याक का पहला जहाज लॉन्च किया जाएगा।

क्या है युद्धपोत विशाखापत्तनम की खासियत
नौसेना उप प्रमुख ने बताया कि विशाखापत्तनम का निर्माण स्वदेशी स्टील का उपयोग करके किया गया है और यह भारत में 163 मीटर की कुल लंबाई और 7400 टन से अधिक के विस्थापन के साथ निर्मित सबसे बड़े विध्वंसक में से एक है। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए इस युद्धपोत के निर्माण में 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। आईएनएस विशाखापत्तनम लगभग 163 मीटर लंबा और लगभग 7400 टन वजनी है। यह युद्धपोत स्वदेशी हथियारों से लैस है। विशाखापत्तनम हथियारों और सेंसर से लैस है, जिसमें सुपरसोनिक जिसमें सुपरसोनिक सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, मध्यम और कम दूरी की बंदूकें, पनडुब्बी रोधी रॉकेट और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और संचार सूट शामिल हैं।
नई पीढ़ी के हाइड्रोग्राफिक उपकरणों से लैस 'संध्याक' जहाज
घोरमडे ने कहा कि 'संध्याक' जहाज भारतीय नौसेना के लिए गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता द्वारा बनाई जा रही चार सर्वे वेसल (बड़ी) परियोजनाओं में से पहली परियोजना है। इन बड़े सर्वेक्षण जहाजों को मौजूदा संध्याक श्रेणी के सर्वेक्षण जहाजों से बदला जाएगा, जो हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्र संबंधी और भूभौतिकीय डेटा एकत्र करने और विश्लेषण करने के लिए एयूवी, आरओवी, 11 मीटर सर्वेक्षण नौकाओं और उन्नत स्वदेशी डेटा अधिग्रहण प्रणालियों सहित नई पीढ़ी के हाइड्रोग्राफिक उपकरणों से लैस हैं।












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