गलवान घाटी में एक बार फिर से आमने-सामने आईं भारतीय और चीनी सेनाएं, सेना ने किया खंडन
लेह, मई 23: पूर्वी लद्दाख के गलवान से एक बार फिर से चिंतित कर देने वाली खबरें सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गलवान में नॉन पेट्रोलिंग जोन में भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच छिटपुट झड़प की खबरें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि, दोनों सेनाओं के बीच ये झड़प मई के पहले सप्ताह में हुई है। इसी पु्ष्टि सरकार के सीनियर अधिकारियों की ओर से की गई है। हालांकि, कोई झड़प नहीं हुई और दोनों पक्ष जल्दी से अलग हो गए।

द हिंदू की खबर के मुताबिक, 15 जून, 2020 की घटना के बाद गलवान घाटी के वाई-जंक्शन के पास संघर्ष स्थल के दोनों ओर लगभग 3 किलोमीटर, लगभग 1.5 किमी प्रत्येक ओर में एक नो-पेट्रोलिंग ज़ोन बनाया गया था। जहां चीनी सेना के साथ हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। तब पैदल गश्त के लिए 30 दिनों का प्रतिबंध लागू किया गया था। यह ज्ञात नहीं था कि क्या इसे बढ़ाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि, पिछले साल नो-पेट्रोलिंग जोन बनाए जाने के बाद, दोनों पक्ष कभी-कभी यह देखने के लिए टोह लेते हैं कि क्या दूसरे पक्ष ने सीमा पार की है। गश्ती दल अलग-अलग समय पर भेजे जाते हैं। हालांकि एक दिन भारतीय और चीनी गश्ती एक ही समय में इस क्षेत्र में पहुंचे, एक मामूली आमना-सामना हुआ लेकिन वे जल्दी लौट आए। इस दौरान दोनों सेनाओं की ओर से कोई झड़प नहीं हुई।
अधिकारी ने कहा कि चीन के पास अभी भी नो-पेट्रोलिंग जोन के बाहर कैंप ला रखे हैं और पिछले साल से सैनिकों की तैनाती में कोई कमी नहीं आई है। अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्ष "संदेह से बाहर" समय-समय पर पैदल गश्त भेजते हैं। पिछले साल गलवान घाटी में लंबे समय तक चले तनाव को खत्म करने के लिए भारत और चीन की सेनाओं के बीच बातचीत भी शुरू हुई थी। इसमें कूटनयिक और सैन्य स्तर की कई दौर की बातचीत के बाद पैगोंग झील इलाके से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी थीं।
वहीं दूसरी ओऱ सेना की ओर से इस खबर को लेकर बयान जारी किया है। मई के पहले हफ्ते में भारत-चीन के सैनिकों के बीच गलवान घाटी में झड़प की एक अखबार की खबर का सेना ने किया खंडन। सेना की ओऱ से कहा गया है कि, ऐसी कोई घटना नहीं हुई, बातचीत को बेपटरी करने की चाह रखने वाले लोग फैला रही ऐसा बातें।












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