Military Drone में चाइनीज सामान नहीं लगेंगे, सरकार ने इस्तेमाल पर लगाई पाबंदी: सूत्र

Military Drone संवेदनशील डिवाइस हैं। इनमें मेड इन चाइना पार्ट्स का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन की मनमानी और आक्रामकता पर नकेल कसने के लिए भारत सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है।

भारत ने सैन्य ड्रोन निर्माताओं से कहा है कि ड्रोन की मैनुफैक्चरिंग के दौरान चाइनीज सामान के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसे में ड्रोन तैयार करने में चाइनीज पार्ट्स का इस्तेमाल तत्काल बंद किया दाए।

Military Drone

ड्रोन में चाइनीज पार्ट्स बैन पर इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रक्षा अधिकारियों का मानना है कि सैन्य ड्रोन में चीन निर्मित पार्ट्स लगाए जाने पर खुफिया जानकारी लीक होने की आशंका है।

इस आधार पर आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने मिलिट्री ड्रोन में चाइनीज पार्ट्स पर बैन लगाने का फैसला लिया है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में ड्रोन टेंडर पर चर्चा के लिए फरवरी और मार्च में बैठकें हुईं।

सरकार ने सैन्य ड्रोन के भारतीय निर्माताओं को चीन में बने पार्ट्स का उपयोग करने से प्रतिबंधित कर दिया। इस संबंध में समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा कमजोरियों पर गंभीर चिंताओं के बाद यह निर्णय लिया गया है।

रिपोर्ट में चार रक्षा और उद्योग अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि देश में सुरक्षा के मोर्चे पर नेता चिंतित थे। ड्रोन के संचार कार्यों, मानव रहित हवाई वाहन के कैमरे, रेडियो ट्रांसमिशन और ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर में चाइनीज उत्पादों के कारण खुफिया जानकारी खतरे में पड़ सकती है।

चीन निर्मित हिस्सों को प्रतिबंधित करने का निर्णय भारत और चीन, दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसियों के बीच सैन्य तनाव के बीच आया है। कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बात की

तनाव का प्रमुख कारण मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास गलवान में भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के बीच झड़प है।

जिन अधिकारियों ने ड्रोन में चाइनीज पार्ट्स बैन की बात कही, इनमें कोई भी मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं है। एक और कारण विषय की संवेदनशीलता के कारण नाम गोपनीय रखने की मंशा है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, रॉयटर्स ने साक्षात्कार में छह सरकारी, तीन रक्षा और उद्योग जगत के लोगों के हवाले से जानकारी दी है। इनके अलावा कई और अहम, लेकिन गोपनीय सूत्रों के नाम भी शामिल हैं।

ड्रोन में चाइनीज आइटम प्रतिबंधित क्यों?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक देश में ड्रोन टेंडरों पर चर्चा के लिए फरवरी और मार्च में दो बैठकें बुलाई गईं। ऑक्शन में शामिल होने वाले संभावित लोगों से मुखातिब भारतीय सैन्य अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा कारणों से मैनुफैक्चरिंग में चीनी सामान का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

मीटिंग मिनट्स की समीक्षा का दावा कर रॉयटर्स ने कहा, अधिकारियों का स्पष्ट निर्देश है कि "भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के उपकरण या उप-घटक सुरक्षा कारणों से स्वीकार्य नहीं होंगे"।

इसका तात्पर्य अनिवार्य रूप से चीन में बनने वाले उपकरण और ड्रोन में लगने वाले पार्ट्स से है। रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में, पेंटागन (अमेरिका) ने भी चीन में बने ड्रोन और घटकों की खरीद और उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया।

एक भारतीय रक्षा अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि देश को घरेलू मैनुफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए उच्च लागत स्वीकार करने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा, "अगर आज मैं चीन से उपकरण खरीदूं और कहूं कि मैं इसे भारत में बनाना चाहता हूं, तो लागत 50% बढ़ जाएगी।"

उन्होंने कहा, "एक राष्ट्र के रूप में हमें यहां पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में मदद करने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।" वित्त मंत्री सीतारमण ने फरवरी 2023 में वादा किया था कि निजी उद्योग के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास के लिए इस वित्तीय वर्ष के बजट का एक-चौथाई हिस्सा आवंटित होगा।

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