Middle East तनाव के बीच ऊर्जा संकट, क्या सोलर एनर्जी बनेगा भारत के लिए गेमचेंजर? आखिर कितने तैयार हैं हम
Middle East Tensions Energy Crisis: मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में गहराते युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोहराम मचा है। भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल और लगभग 90% एलपीजी (LPG) आयात करता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर आम आदमी की रसोई और जेब पर पड़ रहा है। गैस सिलेंडर की कीमतें ₹913 के पार पहुंच चुकी हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है क्या सोलर एनर्जी भारत को इस संकट से उबार पाएगी? हैरानी की बात यह है कि एक तरफ भारत महंगे ईंधन के लिए अरब देशों पर निर्भर है, वहीं दूसरी तरफ देश अपनी बनाई 'सोलर बिजली' का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है और उसे बर्बाद करना पड़ रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर क्यों बढ़ी भारत की चिंता?
भारत की ऊर्जा सुरक्षा का रास्ता 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जैसे समुद्री रास्तों से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण इस रूट पर खतरा बढ़ते ही सप्लाई चेन टूट जाती है और बीमा लागत बढ़ने से तेल-गैस महंगे हो जाते हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशों पर इतना निर्भर है कि खाड़ी देशों में एक धमाका होते ही भारत में महंगाई बढ़ जाती है। महंगा आयात देश के विदेशी मुद्रा भंडार को खाली करता है और राजकोषीय घाटे को बढ़ाता है जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है।
भारत में क्यों इस्तेमाल नहीं हो पा रही Solar Energy?
भारत ने सोलर सेक्टर में अद्भुत प्रगति की है, लेकिन सिस्टम की खामियों के कारण हम अपनी ही क्लीन एनर्जी को बर्बाद कर रहे हैं। इसकी वजह हैं सोलर बिजली दिन में सूरज की रोशनी में बनती है, जबकि भारत में बिजली की सबसे ज्यादा मांग (Peak Demand) शाम और रात में होती है।
भारत की 70% बिजली आज भी कोयला प्लांट से आती है। इन प्लांट को अचानक बंद या कम नहीं किया जा सकता (Technical Minimum), इसलिए दिन में जब सोलर बिजली ज्यादा होती है, तो ग्रिड को संतुलित करने के लिए सोलर पावर को ही रोकना पड़ता है।
राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में भारी मात्रा में बिजली बन तो रही है, लेकिन उसे दिल्ली, मुंबई या दक्षिण भारत तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त हाई-वोल्टेज लाइनें मौजूद नहीं हैं। सोलर बिजली को स्टोर करने के लिए 'बैटरी स्टोरेज सिस्टम' अभी भारत में बहुत शुरुआती स्तर पर और महंगा है। यदि स्टोरेज की व्यवस्था हो, तो दिन की धूप से बनी बिजली रात में इस्तेमाल हो सकती है।
क्या सोलर एनर्जी भारत में बन सकता है LPG का विकल्प?
महंगे गैस सिलेंडर ने लोगों को इलेक्ट्रिक कुकिंग (Induction) की ओर सोचने पर मजबूर किया है। सरकार भी 'प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना' के जरिए छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए भारी सब्सिडी दे रही है। शहरों में लोग अब गैस के बजाय इंडक्शन चूल्हों को प्राथमिकता दे रहे हैं। अगर हर घर की छत पर सोलर पैनल हो और उससे इंडक्शन चूल्हा चले, तो एलपीजी पर निर्भरता 50-60% तक कम हो सकती है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करना है।
सोलर एनर्जी भारत का सपोर्ट सिस्टम!
विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर एनर्जी फिलहाल एक 'सपोर्ट सिस्टम' तो है, लेकिन पूरी तरह समाधान बनने के लिए भारत को कई मोर्चों पर काम करना होगा।बैटरी टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना होगा। बड़े स्तर पर बिजली स्टोर करने के लिए सस्ती बैटरी का निर्माण। बिजली को एक राज्य से दूसरे राज्य भेजने के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर। इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देना होगा।
ग्रामीण इलाकों में सस्ते इलेक्ट्रिक चूल्हे और निर्बाध बिजली पहुंचाना। मिडिल ईस्ट के संकट ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब तेल और गैस के भरोसे हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकता। सौर ऊर्जा ही वह गेमचेंजर है जो भारत को 'ऊर्जा आत्मनिर्भर' बना सकती है, बशर्ते हम बिजली की बर्बादी रोककर उसे स्टोर करना सीख लें।
मिडिल ईस्ट संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है। सोलर एनर्जी इस दिशा में एक मजबूत विकल्प जरूर है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह गेमचेंजर बनने में समय लगेगा। सही निवेश और नीतियों के साथ आने वाले सालों में सोलर भारत की ऊर्जा तस्वीर बदल सकता है।
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