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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की स्मृति में बनेगा स्मारक, केंद्र सरकार ने उठाया ऐतिहासिक कदम

भारत सरकार ने दिवंगत प्रणब मुखर्जी देश के 13वें राष्ट्रपति के सम्मान में एक स्मारक बनाने का फैसला किया है। यह स्मारक दिल्ली के राष्ट्रीय स्मृति स्थल जो राजघाट परिसर का हिस्सा है। उस पर बनाया जाएगा। अगस्त 2020 में प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया था और यह स्मारक उनकी अमिट विरासत और देश के प्रति उनके योगदान का प्रतीक बनेगा।

परिवार ने जताया आभार, प्रधानमंत्री को दिया धन्यवाद

प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने इस फैसले का गर्मजोशी से स्वागत किया और इसे अपने पिता की विरासत के लिए एक मार्मिक श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि यह कदम पूरी तरह से अप्रत्याशित और शालीनता से भरा था।

Pranab Mukherjee

1 जनवरी को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के भूमि और विकास कार्यालय द्वारा उन्हें इस स्मारक के लिए भूमि आवंटन की जानकारी दी गई। इसके बाद शर्मिष्ठा मुखर्जी ने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह इशारा मेरे पिता की स्मृति का सम्मान करने का प्रमाण है।

प्रणब मुखर्जी एक अद्वितीय राजनीतिक करियर

प्रणब मुखर्जी का पांच दशकों से अधिक का राजनीतिक करियर भारतीय राजनीति का स्वर्णिम अध्याय रहा। उन्होंने 2012 से 2017 तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। राष्ट्रपति बनने से पहले वे कई प्रमुख मंत्रालयों का नेतृत्व कर चुके थे। जिनमें 2009-2012 तक वित्त मंत्री का कार्यकाल प्रमुख है। मुखर्जी को 2019 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

कांग्रेस पार्टी की उदासीनता पर शर्मिष्ठा की नाराजगी

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस पार्टी की ओर से अपने पिता के निधन पर औपचारिक शोक प्रस्ताव न लाने पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मेरे पिता 45 वर्षों तक कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे और 30 वर्षों तक कांग्रेस कार्य समिति का हिस्सा थे।

उन्होंने कांग्रेस की इस उदासीनता की तुलना सोनिया गांधी के व्यक्तिगत शोक संदेश से की और इसे पार्टी की ओर से औपचारिक श्रद्धांजलि की कमी का संकेत बताया।

स्मारक का राजनीतिक सीमाओं से परे महत्व

केंद्र सरकार का यह कदम न केवल प्रणब मुखर्जी की स्मृति का सम्मान करता है। बल्कि यह राजनीतिक सीमाओं से परे उनके योगदान के प्रति देश की प्रशंसा को भी दर्शाता है।

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