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Mehul Choksi News: भगोड़े मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण को मिली मंजूरी, 13,000Cr का घोटालेबाज कब लाया जाएगा?

Mehul Choksi India Extradition Approved: भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को भारत लाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ गया है। एंटवर्प की एक अदालत ने शुक्रवार (17 अक्टूबर 2025) को चोकसी के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी। बेल्जियम पुलिस द्वारा की गई उनकी गिरफ्तारी को पूरी तरह वैध करार दिया। यह फैसला भारत सरकार के लंबे संघर्ष का नतीजा है, जो 13,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के आरोपी चोकसी को सलाखों के पीछे लाने के लिए चली आ रही है।

हालांकि, चोकसी के पास अभी उच्च न्यायालय में अपील का रास्ता खुला है, जिससे तत्काल प्रत्यर्पण मुश्किल है। अधिकारियों ने इसे प्रत्यर्पण प्रक्रिया का 'पहला और महत्वपूर्ण चरण' बताया है।

Mehul Choksi

What Is PNB Mehul Choksi Scam: पीएनबी घोटाले का मास्टरमाइंड

मेहुल चोकसी (65 वर्षीय) भारत के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक-पीएनबी धोखाधड़ी मामले-के प्रमुख आरोपी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, चोकसी ने अपने भतीजे नीरव मोदी (Nirav Modi) के साथ मिलकर 2011 से 2018 के बीच बैंक से 13,000 करोड़ रुपये (करीब 1.8 बिलियन डॉलर) का कर्ज लिया और उसे डिफॉल्ट कर दिया। आरोप है कि उन्होंने फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए धोखाधड़ी की, धन शोधन किया और सबूत नष्ट करने की कोशिश की।

चोकसी जनवरी 2018 में भारत छोड़कर भाग गए थे। पहले वे एंटीगुआ और बारबुडा चले गए, जहां उन्होंने नागरिकता ले ली। जुलाई 2024 में सीबीआई ने उन्हें बेल्जियम में ट्रैक किया, जिसके बाद औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा गया। 11 अप्रैल 2025 को एंटवर्प पुलिस ने सीबीआई के अनुरोध पर उन्हें गिरफ्तार किया। तब से वे बेल्जियम की जेल में बंद हैं। उनकी कई जमानत याचिकाएं 'भागने के खतरे' के आधार पर खारिज हो चुकी हैं।

अदालत का फैसला: दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, प्रत्यर्पण वैध

शुक्रवार को एंटवर्प अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें बेल्जियम के अभियोजक (भारत की ओर से) और चोकसी की कानूनी टीम ने अपनी दलीलें पेश कीं। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों पर विचार किया और निष्कर्ष निकाला कि:

  • गिरफ्तारी वैध : 11 अप्रैल को की गई गिरफ्तारी सीबीआई के प्रत्यर्पण अनुरोध पर आधारित थी और पूरी तरह कानूनी थी।
  • प्रत्यर्पण योग्य अपराध : चोकसी पर लगे आरोप-आपराधिक षड्यंत्र (IPC 120B), सबूत नष्ट करना (IPC 201), आपराधिक विश्वासघात (IPC 409), धोखाधड़ी (IPC 420), दस्तावेजों में हेराफेरी (IPC 477A), और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 (रिश्वतखोरी) व 13 (आपराधिक कदाचार)-बेल्जियम के कानून के तहत भी दंडनीय हैं। यह 'दोहरे अपराध' (ड्यूअल क्रिमिनलिटी) की शर्त पूरी करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय संधियां : प्रत्यर्पण अनुरोध में संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध सम्मेलन (UNTOC) और संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार सम्मेलन (UNCAC) का हवाला दिया गया, जिन पर बेल्जियम ने हस्ताक्षर किए हैं।

अधिकारी ने बताया, 'यह फैसला भारत के पक्ष में है। पहला कानूनी कदम साफ हो गया है।' लेकिन चोकसी के वकील ने कहा कि वे उच्च न्यायालय में अपील करेंगे, जिससे प्रक्रिया में देरी हो सकती है।

भारत की मेहनत: तीन बार CBI टीम भेजी, यूरोपीय फर्म हायर की

प्रत्यर्पण प्रक्रिया लंबी और जटिल रही। सीबीआई ने कम से कम तीन बार अपनी टीम बेल्जियम भेजी और साक्ष्य पेश किए। इसके अलावा, एक निजी यूरोपीय कानूनी फर्म को भी हायर किया गया। भारत ने 2018-2022 के बीच चोकसी द्वारा कथित छह बैंक धोखाधड़ी के दस्तावेजी सबूत दिए, जिनमें कुल 13,000 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। अदालत को यह विश्वास दिलाया गया कि चोकसी के भारत से फिर भागने की प्रबल आशंका है।

मानवीय आश्वासन: आर्थर रोड जेल में CPT मानकों वाली सुविधाएं

भारत सरकार ने बेल्जियम को विस्तृत आश्वासन दिए हैं कि प्रत्यर्पण के बाद चोकसी को मानवीय परिस्थितियों में रखा जाएगा। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव राकेश कुमार पांडे ने 4 सितंबर 2025 को एक पत्र में कहा:-

  • चोकसी को मुंबई की आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा, जो यूरोपीय CPT (यातना और अमानवीय उपचार रोकथाम समिति) के न्यूनतम मानकों का पालन करता है।
  • सुविधाएं: स्वच्छ पेयजल, पर्याप्त भोजन, चिकित्सा सुविधाएं, समाचार पत्र, टीवी, निजी डॉक्टर से इलाज का विकल्प।
  • कोई एकांत कारावास नहीं, कोई overcrowding का खतरा नहीं।

यह आश्वासन चोकसी के वकीलों द्वारा 'अमानवीय व्यवहार' के दावों का जवाब था।

नागरिकता विवाद: चोकसी का दावा खारिज

चोकसी ने दावा किया कि उन्होंने 16 नवंबर 2017 को एंटीगुआ की नागरिकता लेने के बाद 14 दिसंबर 2018 को भारतीय नागरिकता त्याग दी थी। लेकिन भारतीय जांचकर्ताओं ने इसे खारिज कर दिया। उनका कहना है कि चोकसी अभी भी भारतीय नागरिक हैं और एंटीगुआ का दावा विवादित है। अदालत ने भी भारत के इस रुख को माना।

आगे की राह: अपील पर निर्भर, लेकिन उम्मीदें बंधीं

यह फैसला चोकसी के 8 साल के भागने के सफर का अंतिम चरण हो सकता है। नीरव मोदी की तरह (जो ब्रिटेन में प्रत्यर्पण प्रक्रिया में हैं), चोकसी का मामला भी लंबा खिंच सकता है। लेकिन अधिकारियों का मानना है कि अपील असफल होने पर जल्द प्रत्यर्पण संभव है। सीबीआई और ईडी ने इसे 'बड़ी सफलता' बताया, जो अन्य भगोड़ों के लिए चेतावनी है।

ये भी पढ़ें- Mehul Choksi News: मुंबई कोर्ट का बड़ा फैसला, भगोड़े मेहुल चोकसी की अरबों की संपत्तियों की होगी नीलामी

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