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Mehul Choksi के लिए गले की फांस बनी अंग्रेजों के जमाने की ये नीति, जाने क्या है भारत-बेल्जियम प्रत्यर्पण संधि?

Mehul Choksi Extradition Latest News: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में 13,500 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मुख्य आरोपी, हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को अंततः भारत की सात साल लंबी खोज और कूटनीतिक कोशिशों के बाद बेल्जियम में गिरफ्तार कर लिया गया है।

यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई जब वह स्विट्जरलैंड में चिकित्सा के बहाने शरण लेने की तैयारी कर रहा था। यह भारत की कानून प्रवर्तन एजेंसियों-केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED)-के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है।

Mehul-Choksi-extradition

Mehul Choksi भारत की जाल में कैसे फंसा ?

मेहुल चोकसी को शनिवार, 13 अप्रैल को बेल्जियम में उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह स्विट्जरलैंड भागने की योजना बना रहा था। भारतीय जांच एजेंसियों के आग्रह पर बेल्जियम की एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चोकसी को हिरासत में ले लिया। यह कदम CBI के वैश्विक संचालन केंद्र की ओर से अगस्त 2024 में एंटवर्प में उसकी पहचान किए जाने के बाद संभव हो पाया।

भारत ने बिना समय गंवाए बेल्जियम से औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध दायर किया, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के अंतर्गत चोकसी पर मुकदमा चलाने की मांग की गई। इनमें IPC की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 201 (साक्ष्य नष्ट करना), 409 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 477 ए (खातों में हेराफेरी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 शामिल हैं।

India Belgium Extradition Treaty क्या है भारत-बेल्जियम प्रत्यर्पण संधि?

प्रत्यर्पण संधि पर पहली बार हस्ताक्षर 29 अक्टूबर 1901 को ब्रिटिश शासन के दौरान भारत (जो उस समय ब्रिटेन का उपनिवेश था) और बेल्जियम के बीच किए गए थे। समय के साथ इस संधि में समयानुसार संशोधन भी किए गए - 1907, 1911 और फिर 1958 में।

1947 में जब भारत को स्वतंत्रता मिली तब यह प्रश्न उठने लगा कि क्या ब्रिटिश शासन के दौरान हुई संधियां स्वतः समाप्त हो जाएंगी या उन्हें जारी रखा जाएगा। इसी संदर्भ में, भारत और बेल्जियम ने 1954 में आपसी पत्रों के आदान-प्रदान के माध्यम से यह तय किया कि प्रत्यर्पण संधि को यथावत रखा जाएगा और इसे स्वतंत्र भारत और बेल्जियम के बीच मान्यता प्राप्त संधि के रूप में लागू किया जाएगा।

प्रत्यर्पण की शर्तें

इस संधि के तहत, यदि कोई व्यक्ति भारत या बेल्जियम में गंभीर अपराधों में संलिप्त पाया जाता है, तो दूसरे देश को उसे सौंपा जा सकता है, बशर्ते कि कुछ प्रमुख शर्तें पूरी हों।

  • गंभीर अपराधों की सूची

संधि में उन अपराधों की एक सूची दी गई है जिनके लिए प्रत्यर्पण की मांग की जा सकती है। इसमें शामिल हैं:

  • हत्या या हत्या का प्रयास
  • बलात्कार
  • जालसाजी और नकली मुद्रा का लेन-देन
  • धोखाधड़ी
  • जबरन वसूली
  • अवैध मादक पदार्थों की तस्करी

इन अपराधों को दोनों देशों में दंडनीय माना जाता है जो हमें अगली महत्वपूर्ण विशेषता की ओर ले जाता है।

दोहरी आपराधिकता पर

  • भारत और बेल्जियम के बीच प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में "दोहरी आपराधिकता" (Dual Criminality) एक केंद्रीय भूमिका निभाती है।
  • इसका सीधा अर्थ यह है कि जिस व्यक्ति पर आरोप लगाया गया है, उसका किया गया कार्य दोनों देशों में कानून के तहत अपराध माना जाना चाहिए।
  • यदि किसी देश में वह कार्य अपराध है लेकिन दूसरे देश में नहीं, तो प्रत्यर्पण नहीं किया जा सकता। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि प्रत्यर्पण का आधार न्यायपूर्ण और तर्कसंगत हो।

प्रक्रियात्मक नियम और समयसीमा

  • यदि प्रत्यर्पण की मांग करने वाला देश गिरफ्तारी के 14 दिनों के भीतर औपचारिक अनुरोध नहीं करता, तो आरोपी को रिहा किया जा सकता है।
  • अगर गिरफ्तारी के दो महीने के भीतर उसके अपराधों के पर्याप्त और विश्वसनीय प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो आरोपी को मुक्त कर दिया जाएगा।
  • इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया मनमानी न हो और आरोपी के अधिकारों की रक्षा हो।

राजनीतिक शरण और सीमाएं

  • संधि में यह भी प्रावधान है कि कोई भी देश अपने नागरिक को प्रत्यर्पित करने के लिए बाध्य नहीं है। इसके अतिरिक्त, यदि यह सिद्ध होता है कि प्रत्यर्पण का अनुरोध किसी राजनीतिक उद्देश्य से किया गया है, या यह एक राजनीतिक अपराध से संबंधित है, तो इसे अस्वीकार किया जा सकता है।
  • एक और महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि प्रत्यर्पित व्यक्ति को उसी अपराध के लिए मुकदमे का सामना करना होगा, जिसके लिए उसे प्रत्यर्पित किया गया है।
  • प्रत्यर्पण के बाद, उसे बिना पूर्व अनुमति के किसी तीसरे देश को नहीं सौंपा जा सकता, और न ही उस पर किसी नए अपराध का मुकदमा चलाया जा सकता है जब तक कि उसे वापस लौटने का अवसर न दिया जाए।

Mehul Choksi news: बेल्जियम की प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रिया

चोकसी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को स्वीकार करने से पहले, बेल्जियम ने कानूनी जांच के कई स्तरों पर विचार किया। बेल्जियम सरकार ने यह पुष्टि की कि भारतीय एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोप उनके देश में भी अपराध माने जाते हैं। इस प्रकार, दोहरी आपराधिकता के सिद्धांत की पुष्टि हुई।

एक वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया, "बेल्जियम ने हमारी जांच और सबूतों को गंभीरता से लिया। उन्होंने मान्यता दी कि भारत में लगाए गए आरोप बेल्जियम की कानूनी प्रणाली में भी दंडनीय हैं। इससे प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को बल मिला।"

Mehul Choksi Extradition: भारत के लिए क्या मायने रखती है यह गिरफ्तारी

मेहुल चोकसी की गिरफ्तारी भारत के लिए केवल एक कानूनी जीत नहीं है, बल्कि यह देश की न्याय प्रणाली की वैश्विक साख और राजनीतिक इच्छाशक्ति की भी पुष्टि है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी होंगी कि क्या भारत सरकार और एजेंसियां चोकसी को शीघ्र भारत वापस लाने में सफल होती हैं और क्या वह देश की अदालतों में न्याय का सामना करेगा।

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