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क्या इंडी गठबंधन छोड़ देगी PDP? महबूबा मुफ्ती की पार्टी ने साफ कर दी कश्मीर की चुनावी तस्वीर

जम्मू और कश्मीर पीडीपी ने उन खबरों का पूरी तरह से खंडन कर दिया है, जिसमें उसके विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक से निकलने की अटकलें लगाई गई थी। पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर में मुख्यमंत्री रह चुकीं महबूबा मुफ्ती की पार्टी ने कहा है कि वह विपक्षी गठबंधन की एकता के लिए प्रतिबद्ध है।

पीडीपी के इंडी गठबंधन से बाहर होने की खबरें इस वजह से तूल पकड़ रही थीं, क्योंकि हाल ही में इसकी सहयोगी नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने अकेले चुनाव लड़ने की बात कह दी थी।

pdp on india alliance

पीडीपी ने इंडी गठबंधन छोड़ने की खबरों का किया खंडन
लेकिन, पीपुल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (पीडीपी) ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर उसको लेकर कुछ मीडिया में चल रही खबरों का जोरदार खंडन किया है।

मनगढ़ंत खबरों पर ध्यान न दें-पीडीपी
पीडीपी ने अपने पोस्ट में लिखा है, 'जम्मू और कश्मीर पीडीपी के इंडिया अलायंस से नाता तोड़ने पर विचार करने की मनगढ़ंत खबरों पर ध्यान न दें। हम एकता और अपने गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग हैं। इस दुर्भावनापूर्ण गलत सूचना से गुमराह न हों!'

बता दें कि पीडीपी की यह प्रतिक्रिया तब आई है, जब कुछ मीडिया रिपोर्ट में इसके इंडिया ब्लॉक छोड़ने और अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने के फैसले के दावे किए जा रहे थे।

फारूक ने कहा अकेले लड़ेंगे, उमर ने अलग ढंग से रखी बात
पिछले हफ्ते नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने भी कह दिया था कि उनकी पार्टी अगला लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। हालांकि, बाद में उनके बेटे और पार्टी के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने आनन-फान में प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर यह साफ करने की कोशिश की थी कि नेशनल कांफ्रेंस इंडिया ब्लॉक को लेकर प्रतिबद्ध है।

जम्मू कश्मीर में सीट बंटवारे पर क्यों फंसा है पेच?
लेकिन, उन्होंने लगे हाथ कश्मीर की तीनों लोकसभा सीटों पर सीट बंटवारे की संभावनाओं से इनकार कर दिया था, क्योंकि, 2019 में उनकी पार्टी वो सारी सीटें जीत गई थी।

उमर ने कहा था कि उनकी पार्टी जम्मू की दोनों सीटों और लद्दाख की एकमात्र सीट पर सीटों के तालमेल को लेकर तैयार है। बता दें कि यह तीनो ही सीटें अभी बीजेपी के पास है और कश्मीर में इंडिया ब्लॉक की तीनों सहयोगियों, नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और कांग्रेस में इसी वजह से पेच फंस रहा है।

कांग्रेस जम्मू की दोनों सीटों पर नहीं लड़ना चाहती। वह जम्मू, कश्मीर और लद्दाख तीनों जगह एक-एक सीट मांग रही है। लेकिन, कश्मीर में तीनों दल अपनी दावेदारी जता रहे हैं। वहीं जम्मू में भाजपा के जनाधार का मुकाबला करने के लिए कोई तैयार नहीं है। जानकारी के मुताबिक सिर्फ कांग्रेस एक सीट पर वहां चुनाव लड़ने की हामी भर रही है।

अब्दुल्ला अड़े तो इंडी अलायंस का क्या होगा?
2019 के लोकसभा चुनावों में कश्मीर की तीनों बारामूला, श्रीनगर और अनंतनाग में नेशनल कांफ्रेंस को जीत मिली थी, जबकि उधमपुर, जम्मू और लद्दाख की तीनों सीटें भाजपा के खाते में गई थी।

तब यहां संविधान का अनुच्छेद-370 लागू था, जिसे इसी चुनाव के बाद मोदी सरकार ने हमेशा-हमेशा के लिए इतिहास बना दिया। अब जम्मू और कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश हैं और राज्य का दर्जा खत्म किया जा चुका है।

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