Budget 2025: मिलिए उन IAS अफसरों ने, जिन्होंने बनाया केंद्रीय बजट, वित्त मंत्रालय की 'कैद' से अब हुए रिहा
IAS Officers in Budget 2025: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 की सुबह 11 बजे लोकसभा में केंद्रीय बजट 2025 (Union Budget 2025) पेश कर दिया है। बजट में 12 लाख की इनकम टैक्स फ्री समेत कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। बजट बनाने का काम सीनियर आईएएस अधिकारियों व कर्मचारियों के कंधों पर होती है, जो छह माह पूर्व ही बजट बनाने की प्रक्रिया में जुट जाते हैं।
बजट बनाने वाली टीम को क्यों रखा जाता है लॉकडाउन में?
लोकसभा में बजट पेश होने से पहले उसे तैयार करने वाली टीम को पूरी तरह गोपनीयता में रखा जाता है। वित्त मंत्रालय के करीब 100 अधिकारी और कर्मचारी बजट पेश होने से एक हफ्ते पहले मंत्रालय के बेसमेंट में एक तरह से "लॉक-इन" हो जाते हैं। इस दौरान उनके मोबाइल फोन ले लिए जाते हैं, वे न तो बाहर जा सकते हैं और न ही किसी से संपर्क कर सकते हैं।
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आइए जानते हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की टीम के उन आईएएस अधिकारियों के बारे में, जिनकी देखरेख में केंद्रीय बजट 2025 तैयार हुआ।
तुहिन कांत पांडे, आईएएस (Tuhin Kant Pandey IAS)
1987 बैच के ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी तुहिन कांत पांडे हाल ही में फाइनेंस एंड रेवेन्यू सेक्रेटरी नियुक्त किए गए हैं। वह टैक्स सुधारों, राजस्व संग्रह, और वित्तीय प्रोत्साहनों की रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एयर इंडिया के निजीकरण और एलआईसी के आईपीओ में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। इससे पहले वे निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव रह चुके हैं।
वी. अनंत नागेश्वरन (V Anantha Nageswaran)
वी. अनंत नागेश्वरन मुख्य आर्थिक सलाहकार (Chief Economic Advisor) हैं और आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) तैयार करने की जिम्मेदारी संभालते हैं। वह अर्थव्यवस्था के विश्लेषण और नीतिगत सुधारों की सिफारिशों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। IIM अहमदाबाद के पूर्व छात्र और मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट प्राप्त नागेश्वरन ने फाइनेंस और शिक्षा क्षेत्र में भी कार्य किया है।
मनोज गोविल, आईएएस (Manoj Govil IAS)
1991 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी मनोज गोविल (Manoj Govil) व्यय विभाग (Expenditure Department) के प्रमुख हैं। उनका फोकस सरकारी खर्च की दक्षता बढ़ाने, सब्सिडी व्यवस्थापन, और केंद्रीय योजनाओं के वित्तपोषण पर रहता है। इससे पहले वे कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में सचिव रह चुके हैं।
अजय सेठ आईएएस (Ajay Seth IAS)
1987 बैच के कर्नाटक कैडर के आईएएस अधिकारी अजय सेठ आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs) का नेतृत्व कर रहे हैं। वे बजट दस्तावेज तैयार करने और व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की अहम भूमिका निभाते हैं। भारत के पहले सॉवरेन ग्रीन बांड और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस सचिवालय की स्थापना में उनका बड़ा योगदान रहा है। G20 समिट 2023 के दौरान भी वे चर्चाओं में रहे थे।
एम नागराजू आईएएस (M Nagaraju IAS)
1993 बैच के त्रिपुरा कैडर के आईएएस अधिकारी एम नागराजू वित्तीय सेवाओं के विभाग (Department of Financial Services) को संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी सरल क्रेडिट फ्लो सुनिश्चित करना, फिनटेक क्षेत्र को विनियमित करना, और बीमा क्षेत्र के विस्तार में सुधार लाना है। वे पहले कोयला मंत्रालय में भी अहम भूमिका निभा चुके हैं।
अरुणीश चावला, आईएएस (Arunish Chawla IAS)
1992 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी अरुणीश चावला निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) तथा सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPI) के प्रभारी हैं। उनका प्राथमिक कार्य सरकारी विनिवेश कार्यक्रम को आगे बढ़ाना और सरकारी संपत्तियों का मुद्रीकरण करना है। फार्मा सेक्टर और सरकारी प्रशासन में उनका लंबा अनुभव इस कार्य में सहायक है।
बजट सीक्रेसी का कारण क्या है? (What is the reason for budget secrecy?)
बजट को पूरी तरह गोपनीय रखने का मुख्य कारण यह है कि अगर इसकी जानकारी पहले लीक हो जाए, तो कुछ लोग इसका गलत फायदा उठा सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी को पहले से पता चल जाए कि किसी इंडस्ट्री पर टैक्स घटने वाला है, तो वह पहले से ही उस इंडस्ट्री के शेयर खरीद सकता है। बजट पेश होने के बाद जब उस सेक्टर के शेयर बढ़ेंगे, तो वह भारी मुनाफा कमा लेगा, जबकि आम निवेशकों को यह मौका नहीं मिलेगा।
कैसे होती है बजट डॉक्युमेंट्स की छपाई? (How are budget documents printed?)
बजट की छपाई वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में लगी एक खास सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में होती है। 1950 से पहले यह काम राष्ट्रपति भवन की एक सरकारी प्रेस में होता था, लेकिन उस दौरान कुछ दस्तावेज लीक हो गए थे। इसके बाद 1980 में इस प्रेस को वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में शिफ्ट कर दिया गया, और तभी से बजट की छपाई और उसे फाइनल करने में शामिल स्टाफ को एक हफ्ते के लिए बेसमेंट में रखा जाता है।
डिजिटल बजट और लॉक-इन पीरियड (Digital budget and lock-in period)
2021-22 से 'यूनियन बजट मोबाइल ऐप' के जरिए डिजिटल बजट पेश किया जाने लगा। इससे छपी हुई कॉपियों की जरूरत कम हो गई और स्टाफ के लॉक-इन का समय भी दो हफ्ते से घटाकर एक हफ्ता कर दिया गया। हालांकि, बजट की सुरक्षा और गोपनीयता के लिए यह परंपरा अब भी जारी है।
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